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थाने में आकर तड़पा था घायल, पूरी रात नहीं पूछा हाल
रेवाड़ी/सिद्धार्थ यादव
Updated Sun, 27 Oct 2013 11:28 PM IST
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शराब की बोतल लाने से इंकार करने पर पुलिसकर्मी द्वारा पेट्रोल डालकर युवक
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इंद्रजीत को जलाने के मामले में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़ा हो गया
है।
वारदात के बाद से ही पुलिस इस मामले में पूरी तरह लापरवाही बरतती रही। 22 अक्तूबर को अस्पताल संचालकों ने झुलसे युवक को थाने में भेज दिया। धारूहेड़ा थाने में घायल तड़पता रहा था, लेकिन पुलिस कर्मियों का दिल नहीं पसीजा।
घायल के वहां से जाने के बाद पूरी रात कोई पुलिस अधिकारी उसका बयान लेने या हाल जानने अस्पताल नहीं गया। ऊपर से घायल और उसके मालिक पर लगातार पांच दिन तक समझौता करने के लिए दबाव बनाया जाता रहा। घायल इंद्रजीत के मालिक कबाड़ी व्यवसायी धर्मेंद्र का कहना है कि उसके ऊपर मामला वापस लेने के लिए चौतरफा दबाव बनाया जा रहा है।
घायल काटता रहा था चक्कर
धारूहेड़ा में कबाड़ी की दुकान के संचालक धर्मेंद्र ने बताया कि 22 अक्तूबर शाम को वह अपने नौकर इंद्रजीत को दुकान पर छोड़कर घर गया था। रात लगभग साढ़े आठ बजे वापिस लौटने पर इंद्रजीत को आग में लिपटा देखकर उसकी आग बुझाकर तुरंत सुखदेव अस्पताल लेकर गया। डाक्टर ने पुलिस का मामला बताकर उसे थाने में भेज दिया था। वह घायल इंद्रजीत के साथ धारूहेड़ा थाने में भी गया। वहां मौजूद पुलिस वालों ने अस्पताल में आकर बयान लेने की बात कही और उन्हें एचवे अस्पताल में भेज दिया था, लेकिन रात को अस्पताल में कोई पुलिसकर्मी नहीं आया।
अगले दिन आया पुलिस दरोगा
23 अक्तूबर को सुबह पुलिस दरोगा आया और घायल से घटना के बारे में पूछताछ की थी, जिसका घायल ने हां और ना में जवाब दिया था। धारूहेड़ा में मामले की चर्चा बढ़ने पर 24 अक्तूबर को पुलिस ने मामला दर्ज किया था।
सादी वर्दी में आते थे पुलिस कर्मचारी
कबाड़ी धर्मेंद्र ने आरोप लगाया कि लगातार पांच दिन तक उस पर फैसला करने के लिए पुलिस कर्मचारी दबाव बनाते रहे। पुलिसकर्मी सादी वर्दी में आते थे और उसे धमकाते थे। घटना के समय उनके साथ वाले होटल पर कोई नहीं था, लेकिन होटल के कर्मचारी का इंद्रजीत द्वारा आत्मदाह का प्रयास करने का बयान उन पर भी दबाव को साफ बताता है। कई साथी दुकानदार भी उसे समझौता करने के लिए कह रहे हैं। उनके जरिये भी पुलिस कर्मचारी दबाव बना रहे हैं। वहीं, उसकी पत्नी को भी मामले को निपटाने के लिए घर पहुंचकर कहा जा रहा है।
होटल कर्मचारी को ढाल बनाने की कोशिश
कबाड़ी की दुकान के साथ लगते होटल के कर्मचारी ने दो दिन पहले बयान दिया था कि इंद्रजीत ने आत्मदाह करने की कोशिश की थी, उसे जलाया नहीं गया था, जबकि 22 अक्तूबर को करवाचौथ का उपवास था इसलिए होटल के कर्मचारी छुट्टी लेकर चले गए थे। घटना के बाद वहां पहुंचे होटल संचालक सुनील शर्मा की बाइक पर धर्मेंद्र घायल को अस्पताल लेकर गया था।
यह था मामला
इंद्रजीत द्वारा 24 अक्तूबर को दिए पुलिस बयान में आरोप लगाया गया था कि 22 अक्तूबर की रात लगभग सवा आठ बजे धारूहेड़ा में कबाड़ी की दुकान पर कांस्टेबल मनजीत आया था। शराब की बोतल न लाने पर पेट्रोल छिड़कर उसे जला दिया था। 25 अक्तूबर को एसपी पंकज नैन ने आरोपी पुलिसकर्मी मनजीत को नौकरी से बर्खास्त कर दिया था।
बेशक गंभीर रूप से झुलसे व्यक्ति को थाने में लाया गया था, लेकिन पहले घायल की जान बचानी जरूरी थी। उसके बाद अगले दिन डाक्टर के अनुसार झुलसा व्यक्ति बयान देने के काबिल नहीं था। फैसले का दबाव बनाने की बात सरासर गलत है। आरोपी को पकड़ने के लिए पुलिस मुस्तैदी से जुटी हुई है।
- राजबीर, थाना प्रभारी, धारूहेड़ा
इस पूरे मामले में पुलिस भूमिका की जांच भी करवाई जाएगी। पुलिस आरोपी को जल्द ही गिरफ्तारी कर लेगी।
- पंकज नैन, एसपी, रेवाड़ी
वारदात के बाद से ही पुलिस इस मामले में पूरी तरह लापरवाही बरतती रही। 22 अक्तूबर को अस्पताल संचालकों ने झुलसे युवक को थाने में भेज दिया। धारूहेड़ा थाने में घायल तड़पता रहा था, लेकिन पुलिस कर्मियों का दिल नहीं पसीजा।
घायल के वहां से जाने के बाद पूरी रात कोई पुलिस अधिकारी उसका बयान लेने या हाल जानने अस्पताल नहीं गया। ऊपर से घायल और उसके मालिक पर लगातार पांच दिन तक समझौता करने के लिए दबाव बनाया जाता रहा। घायल इंद्रजीत के मालिक कबाड़ी व्यवसायी धर्मेंद्र का कहना है कि उसके ऊपर मामला वापस लेने के लिए चौतरफा दबाव बनाया जा रहा है।
घायल काटता रहा था चक्कर
धारूहेड़ा में कबाड़ी की दुकान के संचालक धर्मेंद्र ने बताया कि 22 अक्तूबर शाम को वह अपने नौकर इंद्रजीत को दुकान पर छोड़कर घर गया था। रात लगभग साढ़े आठ बजे वापिस लौटने पर इंद्रजीत को आग में लिपटा देखकर उसकी आग बुझाकर तुरंत सुखदेव अस्पताल लेकर गया। डाक्टर ने पुलिस का मामला बताकर उसे थाने में भेज दिया था। वह घायल इंद्रजीत के साथ धारूहेड़ा थाने में भी गया। वहां मौजूद पुलिस वालों ने अस्पताल में आकर बयान लेने की बात कही और उन्हें एचवे अस्पताल में भेज दिया था, लेकिन रात को अस्पताल में कोई पुलिसकर्मी नहीं आया।
अगले दिन आया पुलिस दरोगा
23 अक्तूबर को सुबह पुलिस दरोगा आया और घायल से घटना के बारे में पूछताछ की थी, जिसका घायल ने हां और ना में जवाब दिया था। धारूहेड़ा में मामले की चर्चा बढ़ने पर 24 अक्तूबर को पुलिस ने मामला दर्ज किया था।
सादी वर्दी में आते थे पुलिस कर्मचारी
कबाड़ी धर्मेंद्र ने आरोप लगाया कि लगातार पांच दिन तक उस पर फैसला करने के लिए पुलिस कर्मचारी दबाव बनाते रहे। पुलिसकर्मी सादी वर्दी में आते थे और उसे धमकाते थे। घटना के समय उनके साथ वाले होटल पर कोई नहीं था, लेकिन होटल के कर्मचारी का इंद्रजीत द्वारा आत्मदाह का प्रयास करने का बयान उन पर भी दबाव को साफ बताता है। कई साथी दुकानदार भी उसे समझौता करने के लिए कह रहे हैं। उनके जरिये भी पुलिस कर्मचारी दबाव बना रहे हैं। वहीं, उसकी पत्नी को भी मामले को निपटाने के लिए घर पहुंचकर कहा जा रहा है।
होटल कर्मचारी को ढाल बनाने की कोशिश
कबाड़ी की दुकान के साथ लगते होटल के कर्मचारी ने दो दिन पहले बयान दिया था कि इंद्रजीत ने आत्मदाह करने की कोशिश की थी, उसे जलाया नहीं गया था, जबकि 22 अक्तूबर को करवाचौथ का उपवास था इसलिए होटल के कर्मचारी छुट्टी लेकर चले गए थे। घटना के बाद वहां पहुंचे होटल संचालक सुनील शर्मा की बाइक पर धर्मेंद्र घायल को अस्पताल लेकर गया था।
यह था मामला
इंद्रजीत द्वारा 24 अक्तूबर को दिए पुलिस बयान में आरोप लगाया गया था कि 22 अक्तूबर की रात लगभग सवा आठ बजे धारूहेड़ा में कबाड़ी की दुकान पर कांस्टेबल मनजीत आया था। शराब की बोतल न लाने पर पेट्रोल छिड़कर उसे जला दिया था। 25 अक्तूबर को एसपी पंकज नैन ने आरोपी पुलिसकर्मी मनजीत को नौकरी से बर्खास्त कर दिया था।
बेशक गंभीर रूप से झुलसे व्यक्ति को थाने में लाया गया था, लेकिन पहले घायल की जान बचानी जरूरी थी। उसके बाद अगले दिन डाक्टर के अनुसार झुलसा व्यक्ति बयान देने के काबिल नहीं था। फैसले का दबाव बनाने की बात सरासर गलत है। आरोपी को पकड़ने के लिए पुलिस मुस्तैदी से जुटी हुई है।
- राजबीर, थाना प्रभारी, धारूहेड़ा
इस पूरे मामले में पुलिस भूमिका की जांच भी करवाई जाएगी। पुलिस आरोपी को जल्द ही गिरफ्तारी कर लेगी।
- पंकज नैन, एसपी, रेवाड़ी