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बिजली निगम ने निर्माणाधीन एसटीपी से हाईटेंशन लाइनों को हटाने का शुरू किया काम
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पानीपत। बिजली निगम ने बरसत रोड स्थित 25 एमएलडी के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट प्रोजेक्ट से 33 केवी के हाईटेंशन तारों को हटाने का काम शुरू कर दिया है। इसके लिए निगम प्लांट पर अपने पोल लगा रहा है। यह काम निगम की सिटी और सब अर्बन डिवीजन के अंतर्गत दो भागों में बांटा गया है। सिटी डिवीजन मौके पर काम शुरू करने में जुटा है, जबकि सब अर्बन डिवीजन का कहना है कि वे जल्द ही अपनी लाइन को वहां से हटा लेंगे।
सीएम मनोहर लाल समेत एनजीटी के दौरों के बाद भी बिजली निगम के अफसरों ने इस पर संज्ञान नहीं लिया। इस काम के लिए नगर निगम की ओर से 41 लाख रुपये जमा करवा दिए गए, लेकिन बिजली निगम ने काम शुरू नहीं किया। इससे एसटीपी का काम रुक गया। अमर उजाला ने इस प्रकरण को अपने 13 अगस्त के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसके बाद बिजली निगम अधिकारियों ने जल्द काम शिफ्ट करने का आश्वासन दिया और ठीक 20 दिन बाद काम शुरू कर दिया।
खास बात यह है कि इस एसटीपी में आसपास की 20 से ज्यादा कॉलोनियों का गंदा पानी ट्रीट होगा। अभी यह पानी नालों से होकर ड्रेन और फिर यमुना में मिल रहा है, जिस पर सरकार और एनजीटी सख्त हैं। यह प्रोजेक्ट जितना लेट होगा, उतने देर तक यमुना मैली होती रहेगी।
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बिजली निगम की इस गलती की वजह से प्रोजेक्ट का काम रुक गया। जबकि नगर निगम को इस प्रोजेक्ट को जनवरी 2023 में पूरा करना था। इससे एनजीटी के नियमों की अवहेलना तो होगी ही, साथ में यहां काम करने वाले मजदूरों पर भी हादसे का खतरा मंडराता रहेगा। निगम अफसरों का कहना है कि 33 केवी हाईटेंशन तार हटाने के लिए नगर निगम ने बिजली निगम से दिसंबर 2021 में पत्राचार किया। करीब पांच माह बाद 31 मई को बिजली निगम ने नगर निगम से लाइन शिफ्टिंग का फंड मांगा। इसके एवज मेें नगर निगम ने गत 24 जून को करीब 41 लाख रुपये का भुगतान बिजली निगम को कर दिया, लेकिन इसके करीब तीन माह बाद भी तार शिफ्ट नहीं हो सका।
वर्जन
बजट देने के बाद भी नहीं शिफ्ट हुई लाइन : निगम
एसटीपी से लाइन शिफ्ट कराने के लिए बिजली निगम को करीब 41 लाख रुपये का बजट दिया जा चुका है। कई बार पत्राचार भी किया गया। यह प्रोजेक्ट बिजली निगम का सिटी और सब अर्बन सब डिवीजन दो भागों में करेंगे। सिटी डिवीजन ने अब काम शुरू किया है, लेकिन अब तक सब अर्बन सब डिवीजन ने काम शुरू नहीं किया। इससे एसटीपी के प्रोजेक्ट को पूरा करने में बाधाएं आ रही हैं।
- प्रदीप कल्याण, एक्सईएन, नगर निगम
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सीएम मनोहर लाल समेत एनजीटी के दौरों के बाद भी बिजली निगम के अफसरों ने इस पर संज्ञान नहीं लिया। इस काम के लिए नगर निगम की ओर से 41 लाख रुपये जमा करवा दिए गए, लेकिन बिजली निगम ने काम शुरू नहीं किया। इससे एसटीपी का काम रुक गया। अमर उजाला ने इस प्रकरण को अपने 13 अगस्त के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसके बाद बिजली निगम अधिकारियों ने जल्द काम शिफ्ट करने का आश्वासन दिया और ठीक 20 दिन बाद काम शुरू कर दिया।
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खास बात यह है कि इस एसटीपी में आसपास की 20 से ज्यादा कॉलोनियों का गंदा पानी ट्रीट होगा। अभी यह पानी नालों से होकर ड्रेन और फिर यमुना में मिल रहा है, जिस पर सरकार और एनजीटी सख्त हैं। यह प्रोजेक्ट जितना लेट होगा, उतने देर तक यमुना मैली होती रहेगी।
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बिजली निगम की इस गलती की वजह से प्रोजेक्ट का काम रुक गया। जबकि नगर निगम को इस प्रोजेक्ट को जनवरी 2023 में पूरा करना था। इससे एनजीटी के नियमों की अवहेलना तो होगी ही, साथ में यहां काम करने वाले मजदूरों पर भी हादसे का खतरा मंडराता रहेगा। निगम अफसरों का कहना है कि 33 केवी हाईटेंशन तार हटाने के लिए नगर निगम ने बिजली निगम से दिसंबर 2021 में पत्राचार किया। करीब पांच माह बाद 31 मई को बिजली निगम ने नगर निगम से लाइन शिफ्टिंग का फंड मांगा। इसके एवज मेें नगर निगम ने गत 24 जून को करीब 41 लाख रुपये का भुगतान बिजली निगम को कर दिया, लेकिन इसके करीब तीन माह बाद भी तार शिफ्ट नहीं हो सका।
वर्जन
बजट देने के बाद भी नहीं शिफ्ट हुई लाइन : निगम
एसटीपी से लाइन शिफ्ट कराने के लिए बिजली निगम को करीब 41 लाख रुपये का बजट दिया जा चुका है। कई बार पत्राचार भी किया गया। यह प्रोजेक्ट बिजली निगम का सिटी और सब अर्बन सब डिवीजन दो भागों में करेंगे। सिटी डिवीजन ने अब काम शुरू किया है, लेकिन अब तक सब अर्बन सब डिवीजन ने काम शुरू नहीं किया। इससे एसटीपी के प्रोजेक्ट को पूरा करने में बाधाएं आ रही हैं।
- प्रदीप कल्याण, एक्सईएन, नगर निगम