जल संरक्षण को लेकर कृषि विज्ञान केंद्र उझा में आयोजित जिला स्तरीय किसान जागरूकता सम्मेलन में सोमवार को पहुंचे किसानों और महिलाओं को बूंद-बूंद पानी बचाने की शपथ दिलाई गई। समारोह में किसानों ने आश्वासन दिया कि खेत में ही नहीं, बल्कि घरेलू कार्यों में भी पानी की बचाकर जल संरक्षण में अपना योगदान देंगे। महिला किसानों में जल संरक्षण की दिशा में विशेष उत्साह देखने को मिला।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक डॉ. वीरेंद्र देव आर्य ने बताया कि पानीपत के समालखा व बापौली ब्लॉक डार्क जोन में हैं। जिस तरह से भू-जल का दुरुपयोग हो रहा है, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि केवल खेत के लिए ही नहीं, बल्कि पीने के लिए भी पानी नहीं मिलेगा। हमें अपने व अपने बच्चों के भविष्य के लिए हर स्तर पर जल का संरक्षण करना होगा। उन्होंने बताया कि सरकार जल संरक्षण को लेकर पूरी तरह सजग है और कृषि विभाग के माध्यम से ऐसी फसलों व कृषि यंत्रों पर भरपूर अनुदान दिया जा रहा है, जिनसे पानी बचाया जा सके। कृषि विज्ञान केंद्र उझा के वरिष्ठ संयोजक डॉ. राजवीर गर्ग ने जल संरक्षित करने वाली तकनीकों पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि धान-गेहूं फसल चक्र ही गिरते भू-जल स्तर का मुख्य कारण है। इसलिए किसान इस समय पीवी 1509 और पीआर 126 किस्मों की धान का रोपण करें। धान की सीधी बिजाई, पैडी ट्रांसप्लांटर से रोपाई करें। इसके साथ ही फसल अवशेष प्रबंधन को भी अपनाएं। उपमंडल कृषि अधिकारी डॉ. सुनील मान ने कहा कि जल व भूमि का स्वास्थ्य ठीक होगा तो हमारा स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा। जिला विस्तार विशेषज्ञ (कृषि अभियंत्रिकी) डॉ. संदीप आंतिल व कुशलराज ने भी विभिन्न आधुनिक कृषि यंत्रों के माध्यम से जल संरक्षण की जानकारी दी। सहायक भूमि संरक्षण अधिकारी नीना सहवाग ने बताया कि भूमिगत पाइपलाइन के लिए छह एकड़ तक के किसान को विभाग की ओर से 50 फीसदी अनुदान दिया जाता है। समारोह का मंच संचालन तकनीकी सहायक जयभगवान सिंह ने किया। इस अवसर पर सहायक पौधा संरक्षण अधिकारी डॉ. राजेश भारद्वाज, सहायक गन्ना विकास अधिकारी जोगिन्द्र सिंह, गुण नियंत्रण अधिकारी सतबीर सिंह, सहायक सांख्यिकी अधिकारी भूपिंद्र सिंह, तकनीकी सहायक राजीव कुमार व सतेंद्र मलिक, बीएओ बापौली रामफल, बीएओ समालखा जितेंद्र सरोहा, एडीओ राकेश, तेलूराम सहित कृषि विभाग व कृषि विज्ञान केंद्र के अन्य अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।