{"_id":"57cf09764f1c1b25563183fc","slug":"two-hours-doctors-pen-panipat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दो घंटे थमी रहीं डॉक्टर की कलम, भटकते रहे मरीज ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दो घंटे थमी रहीं डॉक्टर की कलम, भटकते रहे मरीज
अमर उजाला ब्यूरो, पानीपत।
Updated Tue, 06 Sep 2016 11:52 PM IST
विज्ञापन
गौतम बम्बावले
- फोटो : getty
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरियाणा मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर जिले के सरकारी डॉक्टर मंगलवार को दो घंटे कमल छोड़कर हड़ताल पर रहे। इस दौरान सरकारी अस्पतालों, पीएचसी और सीएचसी में ओपीडी पूरी तरह से प्रभावित रही। मरीजों को इलाज के लिए इंतजार करना पड़ा। हड़ताल के दौरान अस्पताल की व्यवस्था बदतर हो गई। डॉक्टरों ने सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शन कर मेडिकल नीतियों में बदलाव की मांग की।
हड़ताल के दौरान डॉक्टरों ने सिविल अस्पताल परिसर में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। साथ ही सरकार से जल्द मेडिकल नीतियों में बदलाव की मांग की। अस्पताल में हड़ताल के दौरान मरीजों स्थिति दयनीय रही। मरीज हड़ताल खत्म होने के इंतजार में दर्द से कराहते रहे।
डॉक्टरों के इंतजार में डॉक्टरों के केबिनों के सामने मरीजों की लंबी-लंबी लाइनें लग गई। मरीजों को इलाज के लिए दस बजे तक इंतजार करना पड़ा। अस्पताल में सिर्फ चार घंटे ही ओपीडी हो पाई। हरियाणा मेडिकल एसोसिएशन के जिला प्रधान डॉ. विजय मलिक ने कहा कि राज्यभर के सरकारी डॉक्टर सरकार की मेडिकल नीतियों का विरोध कर रहे है।
विज्ञापन
डॉक्टरों ने कहा कि सरकार की नीतियों डॉक्टरों के खिलाफ है। सरकार ने अब तक डॉक्टरों को किसी भी प्रकार की सुविधा नहीं दी है। सरकार डॉक्टरों के साथ भेदभाव कर रही है। सरकार की नीतियों से परेशान होकर कई डॉक्टर नौकरी छोड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि रविवार को राज्यभर के डॉक्टर एकत्रित होकर सीएम आवास तक कैंडल मार्च निकालेंगे। इसके बाद भी डॉक्टरों की मांगें नहीं मानी गईं तो सरकार के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाएंगे। इस मौके पर डॉ. प्रीति भाटिया, डॉ. मोना नागपाल, डॉ. एकता बठला, डॉ. एकता शर्मा, डॉ. संजीव गोयल, डॉ. राघवेंद्र, डॉ. शशि लता, डॉ. रिंकू, डॉ. प्रवीण आदि मौजूद रहे।
ये कर रहे हैं मांग
डॉक्टर सातवें वेतन आयोग, एनपीए में दस प्रतिशत बढ़ोतरी, प्रति पोस्टमार्टम एक हजार रुपये, स्पेशलिस्टों को अलग से भत्ता और आपातकाल विभाग में ड्यूटी करने वाले डॉक्टरों के लिए दस हजार रुपये भत्ता देेने की मांग कर रहे हैं। पंजाब में सरकारी डॉक्टरों की संख्या 5400 है, जबकि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मात्र 1800 डॉक्टर ही हैं।
मरीज बोले, नहीं हुई देखभाल
डॉक्टरों की हड़ताल के चलते ओपीडी में आने वाले मरीज काफी परेशान रहे। अस्पताल में सुबह ही मरीज इलाज को आ गए, लेकिन उनकी पर्ची तक नहीं कट सकी। आठ से लेकर दस बजे तक मरीजों को भटकना पड़ा। कई मरीज इंतजार करने की बजाय निजी अस्पतालों में पहुंच गए। अशोक नगर निवासी आरती और मनीषा ने बताया कि वे दोनों सुबह आठ बजे ही अस्पताल में पहुंच गए थे। वे ओपीडी की पर्ची बनवाने पहुंची, लेकिन उनकी पर्ची नहीं बनाई। वे बहुत देर तक डॉक्टरों के केबिन और अस्पताल के चक्कर लगाते रहे।
विज्ञापन
हड़ताल के दौरान डॉक्टरों ने सिविल अस्पताल परिसर में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। साथ ही सरकार से जल्द मेडिकल नीतियों में बदलाव की मांग की। अस्पताल में हड़ताल के दौरान मरीजों स्थिति दयनीय रही। मरीज हड़ताल खत्म होने के इंतजार में दर्द से कराहते रहे।
विज्ञापन
डॉक्टरों के इंतजार में डॉक्टरों के केबिनों के सामने मरीजों की लंबी-लंबी लाइनें लग गई। मरीजों को इलाज के लिए दस बजे तक इंतजार करना पड़ा। अस्पताल में सिर्फ चार घंटे ही ओपीडी हो पाई। हरियाणा मेडिकल एसोसिएशन के जिला प्रधान डॉ. विजय मलिक ने कहा कि राज्यभर के सरकारी डॉक्टर सरकार की मेडिकल नीतियों का विरोध कर रहे है।
विज्ञापन
डॉक्टरों ने कहा कि सरकार की नीतियों डॉक्टरों के खिलाफ है। सरकार ने अब तक डॉक्टरों को किसी भी प्रकार की सुविधा नहीं दी है। सरकार डॉक्टरों के साथ भेदभाव कर रही है। सरकार की नीतियों से परेशान होकर कई डॉक्टर नौकरी छोड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि रविवार को राज्यभर के डॉक्टर एकत्रित होकर सीएम आवास तक कैंडल मार्च निकालेंगे। इसके बाद भी डॉक्टरों की मांगें नहीं मानी गईं तो सरकार के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाएंगे। इस मौके पर डॉ. प्रीति भाटिया, डॉ. मोना नागपाल, डॉ. एकता बठला, डॉ. एकता शर्मा, डॉ. संजीव गोयल, डॉ. राघवेंद्र, डॉ. शशि लता, डॉ. रिंकू, डॉ. प्रवीण आदि मौजूद रहे।
ये कर रहे हैं मांग
डॉक्टर सातवें वेतन आयोग, एनपीए में दस प्रतिशत बढ़ोतरी, प्रति पोस्टमार्टम एक हजार रुपये, स्पेशलिस्टों को अलग से भत्ता और आपातकाल विभाग में ड्यूटी करने वाले डॉक्टरों के लिए दस हजार रुपये भत्ता देेने की मांग कर रहे हैं। पंजाब में सरकारी डॉक्टरों की संख्या 5400 है, जबकि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मात्र 1800 डॉक्टर ही हैं।
मरीज बोले, नहीं हुई देखभाल
डॉक्टरों की हड़ताल के चलते ओपीडी में आने वाले मरीज काफी परेशान रहे। अस्पताल में सुबह ही मरीज इलाज को आ गए, लेकिन उनकी पर्ची तक नहीं कट सकी। आठ से लेकर दस बजे तक मरीजों को भटकना पड़ा। कई मरीज इंतजार करने की बजाय निजी अस्पतालों में पहुंच गए। अशोक नगर निवासी आरती और मनीषा ने बताया कि वे दोनों सुबह आठ बजे ही अस्पताल में पहुंच गए थे। वे ओपीडी की पर्ची बनवाने पहुंची, लेकिन उनकी पर्ची नहीं बनाई। वे बहुत देर तक डॉक्टरों के केबिन और अस्पताल के चक्कर लगाते रहे।