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डायलिसिस मशीन का पानी खत्म, तीन मरीजों की जान पर बन आई, स्वास्थ्य मंत्री को मरीजों ने किया ट्वीट
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पानीपत। सिविल अस्पताल के डायलिसिस वार्ड में डायलिसिस कराने आए तीन पीड़ितों की जान पर बन आई। अस्पताल में आए इन रोगियों के डायलिसिस से पहले मशीन का पानी खत्म हो गया। बिजली फॉल्ट के कारण बिजली मोटर काम करना बंद कर दी और हाई क्वालिटी आरओ बंद हो गया। एक मरीज के परिजन ने आनन फानन स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को शाम 4:48 बजे ट्वीट कर मदद मांगी और सिविल सर्जन को इसकी सूचना दी। दिन भर मरीजों का डायलिसिस नहीं हो पाया। उनकी जान पर बन आई। देर शाम डायलिसिस वार्ड का बिजली फॉल्ट ठीक कराया गया। बुधवार सुबह इन तीनों रोगियों का डायलिसिस हुआ। इस घटना ने अस्पताल की व्यवस्था पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
सिविल अस्पताल के डायलिसिस वार्ड में सुबह सात मरीजों का डायलिसिस चल रहा था। मशीनों में ब्लड के साथ आरओ के पानी की सप्लाई भी चल रही थी। आरओ में जितना पानी था, उससे उनकी डायलिसिस हुई। इसके बाद पानी खत्म हो गया और बिजली फॉल्ट के कारण आरओ काम नहीं कर पाया। इससे मरीजों की डायलिसिस रुक गई। इनकी जान पर बन आई। उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगी। अपने मरीज की हालत से चिंतित राज कुमार नाम के युवक ने स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को ट्वीट कर मदद मांगी। बताया जा रहा है कि वहां से हरकत होने के बाद सिविल सर्जन ने आनन फानन फॉल्ट को ठीक कराया। बुधवार सुबह आठ बजे इन तीनों पीड़ितों की डायलिसिस हुई।
एक निजी अस्पताल में डायलिसिस मशीन के टेक्नीशियन योगेश कुमार ने बताया कि एक दिन डायलिसिस लेट होने पर मरीज की जान भी जा सकती है। यह उसकी स्थिति पर निर्भर करता है। मशीन में ए व बी दो पार्ट होते हैं। सोडियम पेटोशियम कई चीजें होती हैं। बी पार्ट में बाइक्रव होता है। पीछे वाली पाइप से पानी आता है। ये तीनों मिलकर फिल्टर से निकलकर मरीज के निकल रहे ब्लड से मिलते हैं। अगर ब्लड को उसकी जरूरत होती है तो ब्लड उसे ले लेता है। अगर टॉक्सिंस ज्यादा होंगे तो वो दे देता है। बिना पानी के डायलिसिस नहीं हो सकती।
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बिजली फॉल्ट के कारण यह परेशानी उत्पन्न हुई थी। जैसे ही उनके संज्ञान में मामला आया, फॉल्ट को आधे घंटे में ठीक करवा दिया गया था। बुधवार को डायलिसिस के काम हुए।
- डॉ. जयंत आहूजा, सिविल सर्जन
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सिविल अस्पताल के डायलिसिस वार्ड में सुबह सात मरीजों का डायलिसिस चल रहा था। मशीनों में ब्लड के साथ आरओ के पानी की सप्लाई भी चल रही थी। आरओ में जितना पानी था, उससे उनकी डायलिसिस हुई। इसके बाद पानी खत्म हो गया और बिजली फॉल्ट के कारण आरओ काम नहीं कर पाया। इससे मरीजों की डायलिसिस रुक गई। इनकी जान पर बन आई। उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगी। अपने मरीज की हालत से चिंतित राज कुमार नाम के युवक ने स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को ट्वीट कर मदद मांगी। बताया जा रहा है कि वहां से हरकत होने के बाद सिविल सर्जन ने आनन फानन फॉल्ट को ठीक कराया। बुधवार सुबह आठ बजे इन तीनों पीड़ितों की डायलिसिस हुई।
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एक निजी अस्पताल में डायलिसिस मशीन के टेक्नीशियन योगेश कुमार ने बताया कि एक दिन डायलिसिस लेट होने पर मरीज की जान भी जा सकती है। यह उसकी स्थिति पर निर्भर करता है। मशीन में ए व बी दो पार्ट होते हैं। सोडियम पेटोशियम कई चीजें होती हैं। बी पार्ट में बाइक्रव होता है। पीछे वाली पाइप से पानी आता है। ये तीनों मिलकर फिल्टर से निकलकर मरीज के निकल रहे ब्लड से मिलते हैं। अगर ब्लड को उसकी जरूरत होती है तो ब्लड उसे ले लेता है। अगर टॉक्सिंस ज्यादा होंगे तो वो दे देता है। बिना पानी के डायलिसिस नहीं हो सकती।
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बिजली फॉल्ट के कारण यह परेशानी उत्पन्न हुई थी। जैसे ही उनके संज्ञान में मामला आया, फॉल्ट को आधे घंटे में ठीक करवा दिया गया था। बुधवार को डायलिसिस के काम हुए।
- डॉ. जयंत आहूजा, सिविल सर्जन