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Panipat News: पर्यूषण पर्व का मुख्य संदेश आत्मशुद्धि और संयम
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पानीपत। अग्रवाल मंडी स्थित जैन स्थानक में युवा प्रेरक अरुण चंद्र महाराज ने पर्यूषण पर्व पर प्रवचन दिया। महाराज के साथ उनके शिष्य अभिषेक मुनि और अभिनंदन मुनि ने भी प्रवचन दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि आत्मशुद्धि और संयम पर्यूषण पर्व का मुख्य संदेश है।
अरुण मुनि ने कहा कि जिनवाणी सबके लिए कल्याणकारी है और जीवन को सही दिशा प्रदान करती है। शुभ भाव होंगे तो शुभ परिणाम ही प्राप्त होगा और अशुभ भावों से अशुभ ही मिलेगा। द्वेष, नफरत और ईर्ष्या जीवन का सबसे बड़ा अवरोध है। पर्यूषण पर्व का वास्तविक उद्देश्य आत्मशुद्धि है। इसी कारण इस पर्व में 90 महान महापुरुषों की जीवनियां सुनाई जाती हैं ताकि त्याग, संयम और साधना का सही मार्ग समझा जा सके। छोटे-बड़े नियमों का पालन ही आत्मिक शांति देता है। उन्होंने कहा कि पर्यूषण काल में स्नान का त्याग, बाहर घूमने का त्याग, सिंगार का त्याग, कच्ची पक्की हरि का त्याग, गुस्से और गाली-गलौज से बचना, प्रतिक्रमण जैसे नियम आत्मसंयम की ओर ले जाते हैं। जब पूरा परिवार धर्म-ध्यान में बैठता है तो घर भी मंदिर जैसा पवित्र बन जाता है।
पर्यूषण पर्व को केवल धार्मिक उत्सव न मानें बल्कि आत्मा की शुद्धि और साधना का अवसर बनाएं।
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अरुण मुनि ने कहा कि जिनवाणी सबके लिए कल्याणकारी है और जीवन को सही दिशा प्रदान करती है। शुभ भाव होंगे तो शुभ परिणाम ही प्राप्त होगा और अशुभ भावों से अशुभ ही मिलेगा। द्वेष, नफरत और ईर्ष्या जीवन का सबसे बड़ा अवरोध है। पर्यूषण पर्व का वास्तविक उद्देश्य आत्मशुद्धि है। इसी कारण इस पर्व में 90 महान महापुरुषों की जीवनियां सुनाई जाती हैं ताकि त्याग, संयम और साधना का सही मार्ग समझा जा सके। छोटे-बड़े नियमों का पालन ही आत्मिक शांति देता है। उन्होंने कहा कि पर्यूषण काल में स्नान का त्याग, बाहर घूमने का त्याग, सिंगार का त्याग, कच्ची पक्की हरि का त्याग, गुस्से और गाली-गलौज से बचना, प्रतिक्रमण जैसे नियम आत्मसंयम की ओर ले जाते हैं। जब पूरा परिवार धर्म-ध्यान में बैठता है तो घर भी मंदिर जैसा पवित्र बन जाता है।
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पर्यूषण पर्व को केवल धार्मिक उत्सव न मानें बल्कि आत्मा की शुद्धि और साधना का अवसर बनाएं।