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Panipat News: धूल-धुएं की मात्रा बढ़ने से शहर की हवा जहरीली

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 24 Nov 2023 01:47 AM IST
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The city's air becomes poisonous due to increase in dust and smoke.
पानीपत। शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स लगातार छठे दिन यलो जोन में रहा। पिछले छह दिनों से एक्यूआई धीर-धीरे बढ़ रहा है। बृहस्पतिवार को एक्यूआई 198 दर्ज किया गया। यह बुधवार के मुकाबले 26 अंक बढ़ गया। इसमें पीएम-10 की अधिकतम मात्रा चार अंक बढ़कर 160 पहुंच गई। पीएम-2.5 की अधिकतम मात्रा 34 अंक बढ़कर 215 पहुंच गई। हवा में अब धूल व धुएं की मात्रा बढ़ रही है। पर्यावरण मामलों के विशेषज्ञाें के अनुसार हवा चलने से एक्यूआई स्थिर बना हुआ है। अब तापमान जल्द गिरा और हवा का दबाव बढ़ा तो एक्यूआई दोबारा बढ़ सकता है। प्रशासन को ग्रैप-4 के तहत सख्ती से काम करना होगा।
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प्रशासन की लापरवाही से शहर की आबोहवा खराब हो रही है। ग्रैप-4 के नियमों का सख्ती से पालन नहीं रहा है। हवा में धूल के कणों की मात्रा तेजी से बढ़ रही है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देश पर नगर निगम को शहर की सड़कों व पेड़ पौधों पर, एनएचएआई को नेशनल हाईवे पर व पीडब्ल्यूडी को स्टेट हाईवे पर पानी का छिड़काव करना था, लेकिन यहां काम शुरू नहीं किया गया। इसलिए हवा में पीएम 2.5 की मात्रा लगातार बढ़ी है। उद्योगों से निकलने वाले धुएं व वाहनों के कारण पीएम-10 की मात्रा भी लगातार बढ़ रही है।
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हवा में अब तक 2.5 की मात्रा न्यूनतम 167, औसत 198 और अधिकतम 215 दर्ज की गई है। पीएम-10 की मात्रा न्यूनतम 147, औसत 153 और अधिकतम 160 दर्ज की गई है। नाइट्रोजन ऑक्साइड की मात्रा न्यूनतम 24, औसत 30 व अधिकतम 32 दर्ज की गई है। अमोनिया की मात्रा न्यूनतम दो और औसत व अधिकतम तीन दर्ज की गई है। हवा में कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा न्यूनतम 22, औसत 25 व अधिकतम 28 दर्ज की गई। सल्फर डाई ऑक्साइड की मात्रा न्यूनतम 12 व अधिकतम 13 दर्ज की गई है। जहरीली हुई आबोहवा से दमा, चमड़ी व हृदय के रोगी बढ़ रहे हैं। सुबह शाम आंखों में जलन महसूस हो रही है। दमा रोगियों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है।
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पर्यावरण मामलों के विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र सिंह ने बताया कि अब एक्यूआई दोबारा बढ़ रहा है। बृहस्पतिवार को एक्यूआई 198 पहुंच गया है। प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए। तापमान में गिरावट के साथ एक्यूआई बढ़ेगा। प्रशासन को पर्यावरण पर सख्ती से काम करना चाहिए। इसलिए प्रदूषण के कारकों का निरीक्षण होना जरूरी है। आने वाले दिनों में भी एक्यूआई के कम होने की उम्मीद है।
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