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टीडीआई और टीडीआई आरडब्ल्यूएस में बढ़ी रार, बैठक के लिए सोनीपत जाने से इंकार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 01 Jun 2022 02:00 AM IST
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TDI and TDI RWS rife, refuse to go to Sonepat for meeting
पानीपत। टीडीआई और टीडीआई रेजिडेंट वेलफेयर सोसाइटी में रार बढ़ गई है। आरडब्ल्यूएस ने टीडीआई के एमडी से सोनीपत में मुलाकात करने से इनकार कर दिया है। आरडब्ल्यूएस ने एमडी को पत्र भेजकर साफ कर दिया है कि अगर मुद्दों पर बात होगी तो टीडीआई के लोगों के बीच पानीपत टीडीआई में ही होगी। अगर जल्द टीडीआई में सड़क, बिजली और ई-रिक्शा जैसी सुविधा नहीं मिली तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह टीडीआई के लिए अंतिम अल्टीमेटम है। वहीं दूसरी ओर टीडीआई के अधिकारी आरडब्ल्यूएस से मीटिंग करने का अनुरोध कर रहे हैं।
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टीडीआई आरडब्ल्यूएस के प्रधान शैलेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने करोड़ों रुपये खर्च कर टीडीआई में मकान लिया था। जो भी उनसे वादे किए गए वो सभी झूठे निकले। यहां पर बिजली की व्यवस्था नहीं है। चलने लायक सड़कें नहीं हैं। बिजली के तार गलियों में लटक रहे हैं। इससे खतरा पैदा हो रहा है। टीडीआई के लोगों को ई रिक्शा की भी सुविधा नहीं दी गई है। टीडीआई के पास प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी भी नहीं है। इनके पास एसटीपी नहीं है। बोर्ड ने टीडीआई पर फ्लैट एवं मकान का निर्माण करने पर रोक लगा दी है। तहसीलदार, योजनाकार विभाग और बिजली निगम को सुविधाएं नहीं देने के लिए पत्र लिखा गया है। बिजली कनेक्शन नहीं मिलेंगे। नक्शे पास होंगे न रजिस्ट्री हो सकेगी। टीडीआई के पास कंसेंट टू ऑपरेट सर्टिफिकेट, सीईटीपी और प्रदूूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति नहीं है। बिजली निगम ने पावर हाउस लगाने के लिए टीडीआई से 16 करोड़ रुपये मांगे हैं। अब वो किसी भी सूरत में पीछे नहीं हटेंगे। अगर जल्द समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो कानूनी कार्रवाई करेंगे। टीडीआई के दूसरे सभी प्रोजेक्ट बंद करेंगे। वो एमडी के मुलाकात शहर के बाहर नहीं ब्लकि टीडीआई में लोगों के बीच करेंगे। एमडी को लोगों के बीच आकर उनके सवालों के जवाब देने होंगे।
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एडवोकेट जोगेंद्र राठी ने सीएम विंडो पर शिकायत दी थी। उनका आरोप था कि टीडीआई बिना अनुमति के चल रही है। इनके पास जरूरी कागजात भी नहीं है। इस शिकायत पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जांच की। जांच में पाया गया कि कंपनी का सीटीओ 2018 में एक्सपायर हो चुका है। कंपनी ने इसे रिन्यू नहीं कराया है। यहां पर सेंट्रल एफुलेंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) भी नहीं है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की से इन्हें एनओसी भी नहीं मिली है।
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