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विशेषज्ञ कर रहे इमरजेंसी में ड्यूटी, बिना इलाज मरीज लौट रहे घर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 20 Jul 2022 01:54 AM IST
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Specialists doing duty in emergency, 500 patients returning home without treatment every week
पानीपत। सिविल अस्पताल डॉक्टरों के अभाव से जूझ रहा है। अस्पताल प्रशासन जैसे तैसे डॉक्टरों की ड्यूटी एडजस्ट कर काम चला रहा है। डॉक्टरों की कमी के कारण विशेषज्ञों को इमरजेंसी वार्ड में ड्यूटी करनी पड़ रही है। एक शिफ्ट में एक स्पेशलिस्ट को यहां ड्यूूटी करनी पड़ती है इसलिए इनसे संबंधित रोगियों को अक्सर बिना इलाज के हर घर लौटना पड़ता है।
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इमरजेंसी में माइक्रोबायोलोजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, हड्डी रोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ, ईएनटी, बेहोशी के डॉक्टर और मनोरोग विशेषज्ञ की ड्यूटी लगाई जाती है। दो शिफ्ट में एमबीबीएस डॉक्टर ड्यूटी करते हैं। विशेषज्ञों की ड्यूटी होने से सप्ताह में औसतन पांच सौ मरीजों को बिना इलाज ही घर लौटना पड़ता है। माइक्रोबायोजिस्ट डॉ. प्रीति के इमरजेंसी वार्ड में ड्यूटी पर रहने से काला पीलिया के मरीजों को बिना इलाज वापस लौटना पड़ता है। इनके यहां होने से लैब का काम भी प्रभावित होता है। अब इनको ब्लड बैंक इंचार्ज भी बना दिया गया है। मनोरोग विशेषज्ञ के यहां ड्यूटी पर होने के कारण 50-60 रोगियों को बिना इलाज घर लौटना पड़ता है। अस्पताल में एक ही रेडियोलॉजिस्ट है। वह पहले अपने एग्जाम की तैयारी के लिए छुट्टी पर थे। वहां से लौटने के बाद अब इमरजेंसी में ड्यूटी कर रहे हैं। इसलिए अस्पताल में अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहा है। अस्पताल में दो नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं। एक की इमरजेंसी में ड्यूटी के कारण दूसरे विशेषज्ञ पर वर्क लोड बढ़ जाता है। यहां ड्यूटी लगने से विशेषज्ञ अक्सर नाराज दिखते हैं। ये विशेषज्ञ सड़क हादसों में घायल और अन्य मरीजों को सिर्फ प्राथमिक उपचार ही दे सकते हैं। इसलिए भी अस्पताल से रेफरल का प्रतिशत बढ़ जाता है।
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सिविल अस्पताल में पैथालॉजिस्ट नहीं है। ऐसे में माइक्रो बायॉलोजिस्ट को ही ब्लड बैंक का इंचार्ज बनाया गया है। उनके ऊपर काम का अतिरिक्त भार है। इनके बाद अस्पताल की लैब और काला पीलिया का पहले से ही चार्ज है। अब ब्लड बैंक खुलने से लैब का काम प्रभावित होगा। काला पीलिया के मरीजों को कई बार बिना इलाज लौटना पड़ सकता है।
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इमरजेंसी वार्ड में ड्यूटी करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि उनकी सप्ताह में दो बार इमजेंसी में ड्यूटी लगा दी जाती है। उनके मरीजों की पर्चियां बंद करानी पड़ती हैं। दूर दूर से गरीब मरीज किराया खर्च कर अस्पताल पहुंचते हैं, फिर उन्हें बिना इलाज ही घर लौटना पड़ता है। सरकार को इस संबंध में सोचना चाहिए।
अस्पताल में स्टाफ की स्थिति
दो सौ बेड के अस्पताल में सिर्फ 30 डॉक्टरों से काम चल रहा है, जबकि 80 की जरूरत है। सिविल अस्पताल में 100 बेड के हिसाब से भी डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, चतुर्थ श्रेणी स्टाफ नहीं हैं। दो सौ बेड के अस्पताल में तीन सौ स्टाफ नर्स और पांच सौ से ज्यादा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी होने चाहिए। वर्तमान में डॉक्टरों के 42 पद स्वीकृत हैं। इनमें पांच पद खाली हैं तो आठ डॉक्टर लंबे समय से छुट्टी पर चल रहे हैं। दो डॉक्टर नौकरी छोड़ चुके हैं, वहीं दो डॉक्टर कोर्स पर गए हैं। अस्पताल में 90 स्थायी और 30 एनएचएम की नर्स होनी चाहिए। वर्तमान में मात्र 38 स्थायी स्टाफ नर्स हैं। 26 नर्स एनएचएम के अंतर्गत कार्यरत हैं।

फिलहाल अस्पताल में डॉक्टरों की कमी है। इसलिए व्यवस्था संभालने के लिए विशेषज्ञों की ड्यूटी लगाई जाती है। डॉक्टरों की कमी पूरी होने पर यह समस्या दूर होगी।
- डॉ. संजीव ग्रोवर, पीएमओ सिविल अस्पताल
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