{"_id":"69dd629a8567efb1b5025199","slug":"somewhere-there-are-more-children-and-teachers-six-schools-do-not-have-buildings-panipat-news-c-244-1-pnp1007-155425-2026-04-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panipat News: कहीं बच्चे व शिक्षक अधिक छह स्कूलों के पास भवन नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Panipat News: कहीं बच्चे व शिक्षक अधिक छह स्कूलों के पास भवन नहीं
विज्ञापन
राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मतलौडा। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। राजकीय स्कूलों की स्थिति चिंताजनक हैं। कहीं बच्चे तो कहीं शिक्षक अधिक हैं। ऐसे में बच्चों को शिक्षक न मिलने पर कई विषय दूसरे शिक्षक को पढ़ाने पड़ रहे हैं। वहीं चार से पांच स्कूलों में शिक्षक अधिक हैं। यहां शिक्षकों को बच्चों का इंतजार करना पड़ता है। जिले के पांच स्कूलों के तो अपने भवन ही नहीं हैं। ऐसे में मंदिर या दूसरे भवनों में कक्षाएं लगानी पड़ रही हैं।
शिक्षा मंत्री के जिले में ही शिक्षा का पहिया ठीक से नहीं चल पा रहा है। जिले में 125 हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूल हैं। वहीं करीब 250 प्राथमिक पाठशाला है। जिले के हाई और सीनियर 20 स्कूलों में विद्यार्थियों के अनुपात में शिक्षक अधिक हैं। इन स्कूलों में प्रवेश उत्सव के दौरान विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। बावजूद इसके विद्यार्थियों की संख्या शिक्षकों की संख्या के हिसाब नहीं हो पा रही हैं। इनमें शिक्षकों को दूसरे विषय पढ़ाए जा रहे हैं।
प्राइमरी स्कूलों में शिक्षक कम : राजकीय प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों की संख्या विद्यार्थियों के अनुपात में कम हैं। करीब 25 स्कूलों में शिक्षक कम हैं। शहर के राजपूता रामनगर के राजकीय प्राथमिक पाठशाला में करीब 450 विद्यार्थी पढ़ते हैं। स्कूल मुखिया समेत आठ शिक्षक हैं जबकि 16 शिक्षक की जरूरत है। हेड टीचर अनिल कुमार ने बताया कि उनके समेत आठ शिक्षक हैं। इनमें एक गेस्ट टीचर है। विद्यालय का अपना भवन भी नहीं है। भवन को 2018 में कंडम घोषित कर तोड़ दिया गया था। एक मंदिर में कक्षाएं लगाई जा रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
पानीपत। राजकीय स्कूलों की स्थिति चिंताजनक हैं। कहीं बच्चे तो कहीं शिक्षक अधिक हैं। ऐसे में बच्चों को शिक्षक न मिलने पर कई विषय दूसरे शिक्षक को पढ़ाने पड़ रहे हैं। वहीं चार से पांच स्कूलों में शिक्षक अधिक हैं। यहां शिक्षकों को बच्चों का इंतजार करना पड़ता है। जिले के पांच स्कूलों के तो अपने भवन ही नहीं हैं। ऐसे में मंदिर या दूसरे भवनों में कक्षाएं लगानी पड़ रही हैं।
शिक्षा मंत्री के जिले में ही शिक्षा का पहिया ठीक से नहीं चल पा रहा है। जिले में 125 हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूल हैं। वहीं करीब 250 प्राथमिक पाठशाला है। जिले के हाई और सीनियर 20 स्कूलों में विद्यार्थियों के अनुपात में शिक्षक अधिक हैं। इन स्कूलों में प्रवेश उत्सव के दौरान विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। बावजूद इसके विद्यार्थियों की संख्या शिक्षकों की संख्या के हिसाब नहीं हो पा रही हैं। इनमें शिक्षकों को दूसरे विषय पढ़ाए जा रहे हैं।
विज्ञापन
प्राइमरी स्कूलों में शिक्षक कम : राजकीय प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों की संख्या विद्यार्थियों के अनुपात में कम हैं। करीब 25 स्कूलों में शिक्षक कम हैं। शहर के राजपूता रामनगर के राजकीय प्राथमिक पाठशाला में करीब 450 विद्यार्थी पढ़ते हैं। स्कूल मुखिया समेत आठ शिक्षक हैं जबकि 16 शिक्षक की जरूरत है। हेड टीचर अनिल कुमार ने बताया कि उनके समेत आठ शिक्षक हैं। इनमें एक गेस्ट टीचर है। विद्यालय का अपना भवन भी नहीं है। भवन को 2018 में कंडम घोषित कर तोड़ दिया गया था। एक मंदिर में कक्षाएं लगाई जा रही हैं।
विज्ञापन