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कहीं नकेल तो कहीं बेरोकटोक खनन
अमर उजाला, पानीपत
Updated Wed, 27 Nov 2013 11:29 PM IST
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पानीपत। शासन और प्रशासन की लाख कोशिशों के बावजूद रेत खनन नहीं रुक रहा है। यमुना में बड़े स्तर पर चल रही खनन पर रोक लगने के बाद अब छोटे स्तर पर यह काम शुरू हो गया है।
लोग भैंसा-बुग्गी का सहारा लेकर यमुना और आसपास की नदियों से खनन कर रहे हैं। खनन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम भी इसे रोक पाने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
यमुना में लंबे समय से रेत का खनन चल रहा है। पिछले दिनों मामला प्रकाश में आने के बाद प्रशासन और शासन ने नकेल कसने का प्रयास किया। लेकिन माफियाओं के आगे किसी की एक नहीं चली। मंगलवार को एसपी के थाना और चौकी प्रभारी समेत 12 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड करने के बाद सबकी आंखें खुल गईं।
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शहर की हर चौकी और थाने पर नाका लगाकर चेकिंग की गई। बावजूद इसके जिले के कई हिस्सों में खनन जारी रहा। फर्क इतना दिखा कि पहले लोग जेसीबी मशीनों के साथ खनन करते थे और डंपरों में रेत ले जाते थे। अब लोग भैंसा-बुग्गी के सहारे खनन में लगे थे।
ग्रामीण चाहते हैं खनन बंद हो
यमुना के साथ लगते गांवों की पंचायत और ग्रामीण खनन को बंद करने के पक्ष में है। वे पहले भी कई बार रेत की खानों का विरोध कर चुके हैं। लेकिन कानूनी दाव पेच के आगे ग्रामीणों को पीछे हटना पड़ा था। ग्रामीणों का आरोप था कि खान में खनन नियमों को तोड़कर किया जा रहा है।
अमर उजाला ने बुधवार को कुछ ग्राम पंचायत और ग्रामीणों से बात की तो उन्होंने भी माना कि यमुना और आसपास के गांवों से खनन बंद होना चाहिए।
नवादा के सरपंच मंगलूराम और पूर्व सरपंच ताहिर ने बताया कि कुछ लोग किसानों को पैसों का लालच दे देते हैं और वे यहां पर रेत का खनन शुरू कर देते हैं। नीलम देवी और नर सिंह ने बताया कि वे खनन को रुकवाने के प्रयास करते हैं। लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही।
बना रहता है बाढ़ का खतरा
यमुना नदी में रेत का खनन करने से आसपास के क्षेत्र में बाढ़ आने के कारण बढ़ जाते हैं। यमुना सुधार समिति के प्रदेशाध्यक्ष रत्न सिंह रावल ने बताया कि हर साल यमुना में बाढ़ आ जाती है और आसपास के गांव और खेत जलमग्न हो जाते हैं। रेत माफियाओं की मनमर्जी ओर अधिकारियों की अनदेखी का खामियाजा यहां के लोगों को बाढ़ के रूप में भुगतना पड़ता है।
ये होती है कार्रवाई
अवैध रूप से खनन करते पकड़े जाने पर कार्रवाई कड़ी होती है। लेकिन कुछ लोग पैसा कमाने के चक्कर में इन सबकी परवाह नहीं करते। माइनिंग इंस्पेक्टर अनिल कुमार ने बताया कि अवैध रूप से खनन करते पकड़े जाने पर माइन एंड मिनरल एक्ट 21 (4) के तहत कार्रवाई की जाती है। इसमें 10 हजार रुपये जुर्माना, रायल्टी और पैनल्टी लगाया जाता है।
यहां-यहां चल रहा है खनन
यमुना में भैंसा बुग्गी के साथ रेत का खनन चल रहा है। लोग अल सुबह ही इस तरह चले जाते हैं और सूरज निकलने से पहले वापस पहुंच जाते हैं। खनन विभाग की ओर से बुधवार को सनौली रोड पर चलाए अभियान में भी इसका खुलासा हुआ। यहां पर 22 भैंसा बुग्गी वालों को अवैध रूप से रेत लाते काबू किया है। वहीं दिल्ली पैरेलल नहर में रेत का अवैध रूप से खनन लगातार चल रहा है। इस नहर का पानी बंद होने के चलते लोगों ने रेत निकालने के ठिकाने बना लिए हैं। यहां पर लोग सुबह ही पहुंच जाते हैं और नौ और दस बजे तक वापस चले जाते हैं।
वर्जन
विभाग पुलिस के साथ मिलकर अवैध खनन पर रोक लगा रहा है। इस शृंखला में बुधवार को 22 भैंसा बुग्गी वालों को काबू किया गया है। किसी भी सूरत में अवैध खनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
माधवी गुप्ता, खनन अधिकारी, पानीपत
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लोग भैंसा-बुग्गी का सहारा लेकर यमुना और आसपास की नदियों से खनन कर रहे हैं। खनन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम भी इसे रोक पाने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
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यमुना में लंबे समय से रेत का खनन चल रहा है। पिछले दिनों मामला प्रकाश में आने के बाद प्रशासन और शासन ने नकेल कसने का प्रयास किया। लेकिन माफियाओं के आगे किसी की एक नहीं चली। मंगलवार को एसपी के थाना और चौकी प्रभारी समेत 12 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड करने के बाद सबकी आंखें खुल गईं।
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शहर की हर चौकी और थाने पर नाका लगाकर चेकिंग की गई। बावजूद इसके जिले के कई हिस्सों में खनन जारी रहा। फर्क इतना दिखा कि पहले लोग जेसीबी मशीनों के साथ खनन करते थे और डंपरों में रेत ले जाते थे। अब लोग भैंसा-बुग्गी के सहारे खनन में लगे थे।
ग्रामीण चाहते हैं खनन बंद हो
यमुना के साथ लगते गांवों की पंचायत और ग्रामीण खनन को बंद करने के पक्ष में है। वे पहले भी कई बार रेत की खानों का विरोध कर चुके हैं। लेकिन कानूनी दाव पेच के आगे ग्रामीणों को पीछे हटना पड़ा था। ग्रामीणों का आरोप था कि खान में खनन नियमों को तोड़कर किया जा रहा है।
अमर उजाला ने बुधवार को कुछ ग्राम पंचायत और ग्रामीणों से बात की तो उन्होंने भी माना कि यमुना और आसपास के गांवों से खनन बंद होना चाहिए।
नवादा के सरपंच मंगलूराम और पूर्व सरपंच ताहिर ने बताया कि कुछ लोग किसानों को पैसों का लालच दे देते हैं और वे यहां पर रेत का खनन शुरू कर देते हैं। नीलम देवी और नर सिंह ने बताया कि वे खनन को रुकवाने के प्रयास करते हैं। लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही।
बना रहता है बाढ़ का खतरा
यमुना नदी में रेत का खनन करने से आसपास के क्षेत्र में बाढ़ आने के कारण बढ़ जाते हैं। यमुना सुधार समिति के प्रदेशाध्यक्ष रत्न सिंह रावल ने बताया कि हर साल यमुना में बाढ़ आ जाती है और आसपास के गांव और खेत जलमग्न हो जाते हैं। रेत माफियाओं की मनमर्जी ओर अधिकारियों की अनदेखी का खामियाजा यहां के लोगों को बाढ़ के रूप में भुगतना पड़ता है।
ये होती है कार्रवाई
अवैध रूप से खनन करते पकड़े जाने पर कार्रवाई कड़ी होती है। लेकिन कुछ लोग पैसा कमाने के चक्कर में इन सबकी परवाह नहीं करते। माइनिंग इंस्पेक्टर अनिल कुमार ने बताया कि अवैध रूप से खनन करते पकड़े जाने पर माइन एंड मिनरल एक्ट 21 (4) के तहत कार्रवाई की जाती है। इसमें 10 हजार रुपये जुर्माना, रायल्टी और पैनल्टी लगाया जाता है।
यहां-यहां चल रहा है खनन
यमुना में भैंसा बुग्गी के साथ रेत का खनन चल रहा है। लोग अल सुबह ही इस तरह चले जाते हैं और सूरज निकलने से पहले वापस पहुंच जाते हैं। खनन विभाग की ओर से बुधवार को सनौली रोड पर चलाए अभियान में भी इसका खुलासा हुआ। यहां पर 22 भैंसा बुग्गी वालों को अवैध रूप से रेत लाते काबू किया है। वहीं दिल्ली पैरेलल नहर में रेत का अवैध रूप से खनन लगातार चल रहा है। इस नहर का पानी बंद होने के चलते लोगों ने रेत निकालने के ठिकाने बना लिए हैं। यहां पर लोग सुबह ही पहुंच जाते हैं और नौ और दस बजे तक वापस चले जाते हैं।
वर्जन
विभाग पुलिस के साथ मिलकर अवैध खनन पर रोक लगा रहा है। इस शृंखला में बुधवार को 22 भैंसा बुग्गी वालों को काबू किया गया है। किसी भी सूरत में अवैध खनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
माधवी गुप्ता, खनन अधिकारी, पानीपत