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Panipat News: शिशु गृह पर कोरोना का साया, बच्चों को नहीं मिल रहा खाना

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 14 Jul 2025 02:18 AM IST
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Shadow of Corona on Shishu Griha, children are not getting food
पानीपत। शिशु गृह पर चार साल बाद भी कोरोना का साया बना हुआ है। कोरोना काल में संक्रमण के चलते बंद खाना की व्यवस्था को आज तक लागू नहीं किया जा सका है। ऐसे अभिभावक जो खाना देकर जाते हैं बच्चे उसी के सहारे दिन का समय निकालने को मजबूर होते हैं।
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जिला नागरिक अस्पताल में बाल विकास विभाग अंतर्गत चल रहे बाल संगम में पेयजल के अलावा खाने की कोई व्यवस्था नहीं है। यहां महीने में करीब एक हजार बच्चे आ रहे हैं।
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राष्ट्रीय क्रेच ( शिशु गृह ) योजना का शुभारंभ महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा एक जनवरी 2006 को किया था।
योजना के अंतर्गत बाल विकास विभाग द्वारा जिला नागरिक अस्पताल में एक क्रेच सेंटर चलाया जा रहा है। इसमें प्रतिदिन छह माह से पांच साल तक के 20 से 25 बच्चे पहुंच रहे हैं। जिन्हें खेल-खेल में शिक्षा भी दी जा रही है और उनके सर्वांगीण विकास के लिए खेल भी खिलाए जाते हैं। क्रेच में बच्चों के रहने का समय सुबह नौ से दोपहर तीन बजे तक का होता है।
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बच्चे दिन के छह घंटे क्रेच में बिता रहे हैं लेकिन वहां उनके लिए खाने की व्यवस्था नहीं है। जिससे कुछ बच्चे तो भूखे पेट ही वहां खेलते रहते हैं। जिले में तीन क्रेच सेंटर हैं। इनमें एक जिला बाल भवन, दूसरा नूरवाला और तीसरा बाल संगम नाम से जिला नागरिक अस्पताल में हैं।
जिला नागरिक अस्पताल में ओपीडी के धरातल तल के एक कार्नर में क्रेच बनाया गया है। इसमें बच्चों के बैठने, पीने के लिए पानी, कूलर, पंखे की व्यवस्था भी की गई है।
शिक्षिका टीवी के माध्यम व खेल-खेल में बच्चों को पढ़ाती हैं। क्रेच में ज्यादातर अस्पताल में चिकित्सक व स्टाफ के बच्चे भी शामिल होते हैं।
वहीं मरीजों के बच्चों को भी क्रेच में रखा जाता है। ताकि बच्चे अस्पताल में यहां-वहां घूमते हुए इंफेक्शन की चपेट में न आए और अभिभावक भी निश्चित होकर इलाज व दवा ले सके।

बच्चों के लिए खाने की व्यवस्था इसलिए नहीं है क्योंकि पता नहीं चलता है किस बच्चे को किसी चीज से एलर्जी या इंफेक्शन की समस्या है। उनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए खाने की व्यवस्था नहीं की गई है। संवाद
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