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सर्विस लेवल प्रोग्रेस, सिटीजन वायस ने बचाने में की मदद लेकिन सर्टिफिकेशन ने धोई रैंकिंग

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 21 Nov 2021 01:36 AM IST
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Service level progress, Citizen Voice helped save, but certification washed away ranking
पानीपत। स्वच्छ सर्वेक्षण 2021 में यूएलबी को 6 हजार अंकों की प्रतिस्पर्धा के लिए तीन चरणों से गुजरना था। इसमें पहला सर्विस लेवल प्रोगेस है, जिसमें निकाय द्वारा शहरवासियों को दी जाने वाली सुविधाओं का आकलन किया जाता है। इनमें वेस्ट मैनेजमेंट, डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन जैसी चीजें शामिल होती हैं। ये चरण 2400 अंकों को होता है। इसमें पानीपत को करीब आधे यानी 1179 अंक ही मिले हैं।
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दूसरा चरण सिटीजन वॉइस है। यह 1800 अंकों का है। इसमें से जिले को 912 अंक मिले हैं। यह करीब 50 प्रतिशत हैं। इसमें नगर निगम, निकाय व स्वच्छ सर्वेक्षण टीम शहरवासियों से सफाई को लेकर 10 सवाल पूछती है। इनके जवाबों को टीम व निकाय द्वारा रिकार्ड किया जाता है। इनके आधार पर नंबर दिए जाते हैं।
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तीसरा चरण सर्टिफिकेशन का है। ये चरण कुल 1800 अंकों का था, इसमें से निगम ने केवल 500 अंक प्राप्त किए हैं।
ये अंक केवल निगम के सर्टिफिकेटस के नाम पर दिए जाते हैं। चूंकि पानीपत नगर निगम पहले ही ओडीएफ प्लस प्लस घोषित हो चुका है। इसलिए इसे 500 अंक दिए गए हैं। इसके अलावा निगम के पास किसी प्रकार का कोई सर्टिफिकेट नहीं है। अगर निगम के पास जीएफसी का सर्टिफिकेट होता तो 1100 अंक मिल सकते थे।
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यहां लगे झटके
जीएफसी यानी गारबेज फ्री सिटी कुल 1100 अंकों का था, जिसमें निगम अपनी भागीदारी तक दर्ज नहीं करवा पाया था। इससे निगम को सीधा 1100 अंकों का झटका लगा है। निगम द्वारा इसमें अपनी भागीदारी तक दर्ज न करवा पाने से इस भाग के सर्वेक्षण के ऑडिट में निगम फेल तक साबित हो चुका है।
इसके अलावा सफाई मित्रा सुरक्षा अभियान कुल 1000 अंकों का था। इसमें पूरे देश से केवल 413 शहर ही प्रतिभागिता दर्ज करवा पाए थे। बाकी शहर इस प्रतियोगिता के योग्य तक नहीं मिले। हालांकि स्वच्छ भारत मिशन 2 में इस अभियान की सबसे ज्यादा आवश्यकता होगी। इसमें पब्लिक हेल्थ के साथ नगर निगम की सफाई शाखा की मुख्य भागीदारी रहेगी। इसके अंतर्गत सीटी-पीटी टायलेट, मैनहोल, सीवरेज लाइन, खुले में गंदा पानी तक, नालियों की सफाई तक पर नजर रखी जाएगी।

ये हैं कमियां-
- अभी तक शहर से डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन तक का सौ प्रतिशत तक काम नहीं हो पाया है।
- शहर में सार्वजनिक स्थानों पर कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। तकरीबन हर गली चौराहे पर गंदगी के ढेर हैं।
- शहर की सीवरेज व्यवस्था लगभग ठप है, वार्ड 23 व 16 समेत सभी ग्रामीणों वार्डां के हालात दयनीय हैं।
- शहर के सार्वजनिक शौचालयों की हालात खस्ता है। इनमें न पानी और न ही सफाई है, यहां पोस्टर बैनर तक नहीं हैं।
- शहर की मोबाइल टायलेट तक गायब हैं, शौचालयों में फायर बिग्रेड से पानी भरने की नौबत तक आती है।
- ज्यादातर शौचालय की स्थिति सही नहीं है। न लाइट, न पानी, न साबुन, न सफाई।
जीएफसी के लिए करेंगे आवेदन
नगर निगम की स्वच्छ भारत मिशन की टीम लीडर कविता कादियान ने बताया कि इस बार निगम जीएफसी की स्टार रेटिंग के लिए आवेदन नहीं कर पाया। लेकिन अबकी बार जीएफसी के लिए आवेदन किया जाएगा और पानीपत की रैंकिंग को बेहतर किया जाएगा।
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