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एनडीसी पोर्टल की खामियों से राजस्व हानि का खतरा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 21 Jan 2022 02:09 AM IST
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Risk of loss of revenue due to flaws in NDC portal
पानीपत। गलत प्रॉपर्टी सर्वे के बाद अब एनडीसी पोर्टल की कुछ खामियों की वजह से निगम पर एनडीसी के राजस्व की हानि का खतरा मंडराने लगा है। दरअसल निगम से जारी की जाने वाली एनडीसी पर प्रॉपर्टी आईडी तो दर्शायी जाती है लेकिन एरिया के गज का पता नहीं चलता।
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दूसरी तरफ यह भी पता नहीं चलता कि एनडीसी का पहले इस्तेमाल किया जा चुका है या नहीं। इसका न निगम के पास कोई विकल्प है और न ही तहसील के पास। हालांकि अब नगर निगम सिर्फ अपने एरिया की प्रॉपर्टियों के कॉरपेट एरिया का ही टैक्स वसूलेगा जबकि कवर्ड एरिया की पड़ताल तहसील अपने स्तर पर करेगा। इससे पहले की तुलना में कॉरपेट एरिया को कवर्ड मानकर वसूले जाने वाला टैक्स भी कम होगा लेकिन पोर्टल पर इसका कोई ब्योरा नहीं है कि पहले उक्त एनडीसी का प्रयोग हो चुका है या नहीं। इसे लेकर अब प्रशासनिक अधिकारी सरकार को पत्राचार कर सकते हैं।
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दूसरी तरफ नगर निगम अब निगम क्षेत्र में आने वाली सभी संपत्तियों के कॉरपेट एरिया से ही अपना प्रॉपर्टी टैक्स वसूलेगा। इनके कवर्ड एरिया की पैमाइश तहसील अधिकारी अपने स्तर पर करवाएंगे। इसके लिए मौका रिपोर्ट भी की जा सकती है। इसके अलावा प्रॉपर्टी के गज, बना हुआ एरिया और फोटो पहले ही रजिस्ट्रियों में साथ संलग्न होते आए हैं।
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एनडीसी का कितनी बार हुआ प्रयोग, रोकने का नहीं विकल्प
रजिस्ट्री सॉफ्टवेयर में एक एनडीसी का कितनी बार प्रयोग किया गया है इसे रोकने का न तहसील के पास कोई विकल्प है और न ही नगर निगम के पास। कुछ लोग एक ही एनडीसी को बार बार प्रयोग कर बड़े प्लाट को टुकड़ों में बेच देते हैं। इससे नगर निगम को एनडीसी के चार्ज की हानि होती है।
मान लीजिए एक प्लाट एक हजार गज का है। मालिक इसमें से सिर्फ 100 गज बेचना चाहता है। वह निगम से सिर्फ 100 गज की एनडीसी लेकर प्लाट की रजिस्ट्री करवा देता है। अब बचे हुए 900 गज को भी ऐसे ही टुकड़ों में बेचने के लिए उसी एनडीसी का सहारा लिया जाता है। अब तहसील और निगम के पास एनडीसी का कितनी बार इस्तेमाल हुआ, इसे पता करने या इस गड़बड़ी को रोकने का कोई विकल्प नहीं है। इस विकल्प को सॉफ्टवेयर में लाने के लिए प्रशासनिक अधिकारी सरकार को पत्राचार करेंगे ताकि जो एनडीसी इस्तेमाल हो चुुुकी है वह सॉफ्टवेयर में दर्शाए।
स्टॉम्प पेपर की तरह डिफेस होनी चाहिए एनडीसी
तहसील अधिकारियों ने बताया कि जिस प्रकार स्टॉम्प पेपर को दूसरी बार इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, इसी प्रकार एनडीसी को भी दूसरी बार इस्तेमाल न किया जा सके इसका विकल्प सॉफ्टवेयर में होना चाहिए। जैसे एक बार स्टॉम्प पेपर इस्तेमाल होने के बाद इसके नंबर की वजह से ये निष्क्रिय हो जाता है ऐसा ही प्रावधान एनडीसी में होना चाहिए।
पोर्टल पर विकल्प से होगा समाधान
एनडीसी पोर्टल पर अगर एनडीसी के प्रयोग का विकल्प दिया जाए तो इसका समाधान हो सकता है। जिससे ये पता चल सके कि संबंधित प्रॉपर्टी की एनडीसी का पहले इस्तेमाल किया जा चुका है या नहीं। वहीं, अब कवर्ड एरिया की पैमाइश तहसील के हवाले से ही की जाएगी। इसके लिए शपथ पत्र और मौके की तस्दीक या अन्य दस्तावेज इस्तेमाल करवाया जा सकता है। कुलदीप मलिक, तहसीलदार, पानीपत।

डीसी से विचार-विमर्श कर डीएलआर को भेजेंगे पत्र
इस बारे में जिला उपायुक्त से विचार विमर्श किया जाएगा। इसके बाद डायरेक्टर लैंड रिकार्ड यानी सरकार को इस बारे पत्राचार किया जाएगा। इसके बाद जो इस विषय पर निर्णय लिया जाएगा उसके बारे में बताया जा सकता है। -धीरज चहल, एसडीएम, पानीपत।
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