{"_id":"69110771bc90ec93370c7e7b","slug":"retired-employees-medical-reimbursement-claim-rejected-panipat-news-c-244-1-pnp1012-146866-2025-11-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panipat News: सेवानिवृत्त कर्मचारी के चिकित्सा प्रतिपूर्ति का दावे किया खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Panipat News: सेवानिवृत्त कर्मचारी के चिकित्सा प्रतिपूर्ति का दावे किया खारिज
विज्ञापन
- कर्मचारी ने चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लिए दाखिल की थी याचिका
माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। जिला उपभोक्ता आयोग ने थर्मल पावर स्टेशन के सेवानिवृत्त कर्मचारी के चिकित्सा प्रतिपूर्ति के दावे को खारिज कर दिया। आयोग ने सुनवाई के दौरान माना कि जितना खर्च हुआ था उसकी पूर्ति हो चुकी है। नियमों के अनुसार भुगतान होने के कारण बाकी क्लेम का दावा करना उचित नहीं है। इस कारण दावे को आयोग ने खारिज कर दिया है।
थर्मल से सेवानिवृत्त कर्मचारी कुंदन ने आयोग में याचिका दाखिल की थी। उनका कहना था कि बीमार होने पर उन्होंने एक निजी अस्पताल में उपचार कराया था। उपचार में 14,769 रुपये खर्च हुए थे। मेडिकल बिल उन्होंने डिस्पेंसरी में जमा किए लेकिन उन्हें मात्र 10 हजार रुपये की चिकित्सा प्रतिपूर्ति का भुगतान किया। बाकी बिल पास नहीं किए गए। इसके बाद उन्होंने आयोग में याचिका दाखिल की थी। मामले की सुनवाई आयोग के चेयरमैन डॉ. आरके डोगरा व सदस्य विनीत कौशिक ने की। जिसमें दोनों पक्षों को सुना गया। सुनवाई के दौरान थर्मल की ओर से दावा किया गया कि जितना भुगतान नियमों के आधार पर किया जाना था, कर दिया गया है। सुनवाई के बाद आयोग ने माना कि शिकायतकर्ता यह साबित नहीं कर सके कि कोई राशि बकाया है। मामला सेवा में कमी या लापरवाही का नहीं बनता।
विज्ञापन
माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। जिला उपभोक्ता आयोग ने थर्मल पावर स्टेशन के सेवानिवृत्त कर्मचारी के चिकित्सा प्रतिपूर्ति के दावे को खारिज कर दिया। आयोग ने सुनवाई के दौरान माना कि जितना खर्च हुआ था उसकी पूर्ति हो चुकी है। नियमों के अनुसार भुगतान होने के कारण बाकी क्लेम का दावा करना उचित नहीं है। इस कारण दावे को आयोग ने खारिज कर दिया है।
थर्मल से सेवानिवृत्त कर्मचारी कुंदन ने आयोग में याचिका दाखिल की थी। उनका कहना था कि बीमार होने पर उन्होंने एक निजी अस्पताल में उपचार कराया था। उपचार में 14,769 रुपये खर्च हुए थे। मेडिकल बिल उन्होंने डिस्पेंसरी में जमा किए लेकिन उन्हें मात्र 10 हजार रुपये की चिकित्सा प्रतिपूर्ति का भुगतान किया। बाकी बिल पास नहीं किए गए। इसके बाद उन्होंने आयोग में याचिका दाखिल की थी। मामले की सुनवाई आयोग के चेयरमैन डॉ. आरके डोगरा व सदस्य विनीत कौशिक ने की। जिसमें दोनों पक्षों को सुना गया। सुनवाई के दौरान थर्मल की ओर से दावा किया गया कि जितना भुगतान नियमों के आधार पर किया जाना था, कर दिया गया है। सुनवाई के बाद आयोग ने माना कि शिकायतकर्ता यह साबित नहीं कर सके कि कोई राशि बकाया है। मामला सेवा में कमी या लापरवाही का नहीं बनता।
विज्ञापन