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Panipat News: बजट के फेर में फंसा अस्पताल में मशीनों की मरम्मत का कार्य
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पानीपत। स्वास्थ्य विभाग पिछले पांच साल से बजट के फेर में फंसा है। साल में एक बार मिलने वाली 50 लाख की राशि भी अब तक नहीं मिली है। पिछले पांच साल में स्वास्थ्य विभाग की अल्ट्रासाउंड मशीन, आंखों की फेको मशीन, सी आर्म मशीन व कान के परदाें की जांच की मशीन कंडम हो गई। इनके लिए सिविल सर्जन की ओर से बार-बार डिमांड भेजी गई, लेकिन मुख्यालय से मशीन नहीं मिली।
2018 से 2019 तक तो सिविल अस्पताल में अल्ट्रासाउंड भी बंद रहे। सरकार ने खर्च देकर निजी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड कराए। लोगों की परेशानियों को देखते हुए सरबत दा भला संस्था ने 10 लाख की मशीन दान की थी। स्वास्थ्य विभाग लाचार साबित हो रहा है। सरकारी डॉक्टरों को भी स्वास्थ्य विभाग पर विश्वास नहीं रहा। डॉक्टर भी सोशल मीडिया के जरिये संस्थाओं से मदद मांगते रहे। अब रिफाइनरी सी आर्म मशीन देने के लिए आगे आई है।
- अप्रैल 2023 में एक हजार मास्क, 50 पीपीई किट
- रिफाइनरी से दो आठ लाख रुपये की सी नेट मशीन
- सरबत दा भला से अल्ट्रासाउंड मशीन
- सरबत दा भला से नवजातों के एसएनसीयू वार्ड के लिए अत्याधुनिक मशीन
- रिफाइनरी बापौली सीएचसी व ददलाना को भी अपग्रेड कर रही है।
- अब रिफाइनरी सिविल अस्पताल को सी-आर्म मशीन देगी।
नौ माह बाद भी सिविल अस्पताल में सी आर्म मशीन उपलब्ध नहीं करा पाया है। इस मशीन से ही हड्डी की वास्तविक स्थिति का पता चलता है। सड़क हादसों में घायल लोगों के लिए यह बेहद जरूरी है। ऐसे में मरीजों को पीजीआई खानपुर रेफर करना पड़ता है। अधिकतर मरीज मजबूरन खानपुर व रोहतक जाने के बजाय निजी अस्पतालों में ही चले जाते हैं। हड्डियों में स्क्रू, रॉड व प्लेट डालने से पहले इसी मशीन से जांच की जाती है। कई केस में सी-आर्म मशीन न होने से डॉक्टरों को ऑपरेशन वाला पूरा हिस्सा खोलना पड़ता है। इस मशीन से डॉक्टर ऑपरेशन वाली जगह को स्क्रीन पर देख सकते और टूटी हड्डी में रॉड या प्लेट डाल सकते हैं।
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सिविल अस्पताल में पिछले नौ माह से कान के पर्दों की जांच की दोनों मशीन खराब है। इन मशीनों को ठीक करने के लिए तीन बार डिमांड भेजी गई लेकिन मशीन ठीक नहीं हुई। डॉक्टरों के प्रशिक्षण के अभाव में मोतियाबिंद की अत्याधुनिक तकनीक से सर्जरी करने वाली फेको मशीन भी कंडम हो गई है। टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत रिफाइनरी ने दो सीबी नेट मशीन दी हैं।
सी-आर्म मशीन जल्द उपलब्ध कराने का प्रयास है। मुख्यालय में भी इसका केस बनाकर भेजा गया है। अब रिफाइनरी से भी मशीन को लेकर बात चल रही है। जल्द किसी निर्णय पर पहुंचेंगे। बापौली व ददलाना सीएचसी को अपग्रेड करने के लिए भी रिफाइनरी ने सहयोग का आश्वासन दिया है।
- डॉ. जयंत आहूजा, सिविल सर्जन पानीपत।
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2018 से 2019 तक तो सिविल अस्पताल में अल्ट्रासाउंड भी बंद रहे। सरकार ने खर्च देकर निजी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड कराए। लोगों की परेशानियों को देखते हुए सरबत दा भला संस्था ने 10 लाख की मशीन दान की थी। स्वास्थ्य विभाग लाचार साबित हो रहा है। सरकारी डॉक्टरों को भी स्वास्थ्य विभाग पर विश्वास नहीं रहा। डॉक्टर भी सोशल मीडिया के जरिये संस्थाओं से मदद मांगते रहे। अब रिफाइनरी सी आर्म मशीन देने के लिए आगे आई है।
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- अप्रैल 2023 में एक हजार मास्क, 50 पीपीई किट
- रिफाइनरी से दो आठ लाख रुपये की सी नेट मशीन
- सरबत दा भला से अल्ट्रासाउंड मशीन
- सरबत दा भला से नवजातों के एसएनसीयू वार्ड के लिए अत्याधुनिक मशीन
- रिफाइनरी बापौली सीएचसी व ददलाना को भी अपग्रेड कर रही है।
- अब रिफाइनरी सिविल अस्पताल को सी-आर्म मशीन देगी।
नौ माह बाद भी सिविल अस्पताल में सी आर्म मशीन उपलब्ध नहीं करा पाया है। इस मशीन से ही हड्डी की वास्तविक स्थिति का पता चलता है। सड़क हादसों में घायल लोगों के लिए यह बेहद जरूरी है। ऐसे में मरीजों को पीजीआई खानपुर रेफर करना पड़ता है। अधिकतर मरीज मजबूरन खानपुर व रोहतक जाने के बजाय निजी अस्पतालों में ही चले जाते हैं। हड्डियों में स्क्रू, रॉड व प्लेट डालने से पहले इसी मशीन से जांच की जाती है। कई केस में सी-आर्म मशीन न होने से डॉक्टरों को ऑपरेशन वाला पूरा हिस्सा खोलना पड़ता है। इस मशीन से डॉक्टर ऑपरेशन वाली जगह को स्क्रीन पर देख सकते और टूटी हड्डी में रॉड या प्लेट डाल सकते हैं।
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सिविल अस्पताल में पिछले नौ माह से कान के पर्दों की जांच की दोनों मशीन खराब है। इन मशीनों को ठीक करने के लिए तीन बार डिमांड भेजी गई लेकिन मशीन ठीक नहीं हुई। डॉक्टरों के प्रशिक्षण के अभाव में मोतियाबिंद की अत्याधुनिक तकनीक से सर्जरी करने वाली फेको मशीन भी कंडम हो गई है। टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत रिफाइनरी ने दो सीबी नेट मशीन दी हैं।
सी-आर्म मशीन जल्द उपलब्ध कराने का प्रयास है। मुख्यालय में भी इसका केस बनाकर भेजा गया है। अब रिफाइनरी से भी मशीन को लेकर बात चल रही है। जल्द किसी निर्णय पर पहुंचेंगे। बापौली व ददलाना सीएचसी को अपग्रेड करने के लिए भी रिफाइनरी ने सहयोग का आश्वासन दिया है।
- डॉ. जयंत आहूजा, सिविल सर्जन पानीपत।