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Panipat News: स्वयं सहायता समूह से जुड़कर रेखा और महिलाओं को भी कर रही प्रेरित
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रेखा। स्वयं
- फोटो : अमर उजाला
पानीपत। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में स्वयं सहायता समूह महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसी कड़ी में गोयला खेड़ा गांव की रेखा हैं। उन्होंने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर न केवल अपनी पहचान बनाई बल्कि अन्य महिलाओं को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं। रेखा ने बताया कि वह 2020 में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी थीं। उस समय उनकी पहचान केवल घर तक सीमित थी और गांव से बाहर बहुत कम लोग उन्हें जानते थे। वे ज्यादातर समय घर के कामकाज में ही व्यस्त रहती थीं और बाहरी दुनिया की जानकारी भी सीमित थी लेकिन समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में धीरे-धीरे बदलाव आने लगा।
स्वयं सहायता समूह के माध्यम से रेखा को रोजगार के अवसर मिले। उन्होंने आर्थिक गतिविधियों में भाग लेना शुरू किया और आत्मविश्वास भी बढ़ा। 15 मार्च 2025 से उन्हें अनाज मंडी में कैंटीन का काम मिला जिससे उनकी नियमित आय शुरू हुई, इसके साथ ही वे पिछले तीन वर्षों से सोशल ऑडिट के कार्य से भी जुड़ी हुई हैं जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं की जानकारी और काम करने का अनुभव मिला। रेखा अब केवल अपने परिवार तक सीमित नहीं हैं बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी जागरूक करने का कार्य कर रही हैं। वे मनरेगा जैसी योजनाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए उन्हें प्रेरित करती हैं और उन्हें बताती हैं कि इन योजनाओं से महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत बन सकती हैं। रेखा अन्य महिलाओं को भी स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के लिए प्रेरित करती हैं। रेखा समूह की देखभाल के साथ-साथ 22 समूह की प्रभारी भी हैं।
रेखा ने बताया कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने खुद की अहमियत को समझा। पहले उन्हें बाहर की दुनिया की ज्यादा जानकारी नहीं थी। वह अब विभिन्न योजनाओं, रोजगार के अवसरों और सामाजिक गतिविधियों के बारे में जानकारी रखती हैं, इससे उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ा है। समूह से जुड़ने पर महिलाओं को बचत की आदत पड़ती है छोटे-छोटे ऋण लेकर काम शुरू करने का मौका मिलता है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उनमें आत्मविश्वास विकसित होता है।
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स्वयं सहायता समूह के माध्यम से रेखा को रोजगार के अवसर मिले। उन्होंने आर्थिक गतिविधियों में भाग लेना शुरू किया और आत्मविश्वास भी बढ़ा। 15 मार्च 2025 से उन्हें अनाज मंडी में कैंटीन का काम मिला जिससे उनकी नियमित आय शुरू हुई, इसके साथ ही वे पिछले तीन वर्षों से सोशल ऑडिट के कार्य से भी जुड़ी हुई हैं जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं की जानकारी और काम करने का अनुभव मिला। रेखा अब केवल अपने परिवार तक सीमित नहीं हैं बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी जागरूक करने का कार्य कर रही हैं। वे मनरेगा जैसी योजनाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए उन्हें प्रेरित करती हैं और उन्हें बताती हैं कि इन योजनाओं से महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत बन सकती हैं। रेखा अन्य महिलाओं को भी स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के लिए प्रेरित करती हैं। रेखा समूह की देखभाल के साथ-साथ 22 समूह की प्रभारी भी हैं।
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रेखा ने बताया कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने खुद की अहमियत को समझा। पहले उन्हें बाहर की दुनिया की ज्यादा जानकारी नहीं थी। वह अब विभिन्न योजनाओं, रोजगार के अवसरों और सामाजिक गतिविधियों के बारे में जानकारी रखती हैं, इससे उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ा है। समूह से जुड़ने पर महिलाओं को बचत की आदत पड़ती है छोटे-छोटे ऋण लेकर काम शुरू करने का मौका मिलता है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उनमें आत्मविश्वास विकसित होता है।
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