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जन स्वास्थ्य विभाग बांटेगा पानी जांच की किट
अमर उजाला, पानीपत
Updated Sat, 30 Nov 2013 11:34 PM IST
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पानीपत में जन स्वास्थ्य विभाग पानी की शुद्धता जांचने के लिए लोगों को किट
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बांटेगा। एचटूएस किट के माध्यम से हर कोई खुद ही पानी की शुद्धता की जांच
कर सकेगा।
जांच के बाद निगेटिव रिपोर्ट मिलने पर लैब में पानी की जांच की जा सकती है कि उसमें कौन का खतरनाक तत्व विद्यमान है। निर्धारित समय तक योजना को पूरा करने के लिए विभाग ने कमर कस ली है। किट बांटने के लिए कर्मचारियों की विशेष ड्यूटियां लगाई जा रही है।
अमर उजाला ने अपने दो नवंबर के माई सिटी संस्करण में विशेष रूप से इस मुद्दे को उठाया था। खबर के माध्यम से विभाग और प्रशासन को चेताया था कि पानी की शुद्धता जांचने वाली कोई भी किट अभी तक नहीं बांटी गई हैं। खबर प्रकाशित होने के बाद विभाग ने गांव-गांव में पानी की शुद्धता जांचने वाली किट बांटने की योजना तैयार की है।
31 मार्च तक बांटनी होंगी 1800 किट
जन स्वास्थ्य विभाग को यह किट 31 मार्च तक बांटनी होगी। इस समय विभाग के जिला कार्यालय ने 900 किट खुद खरीदी हैं और नौ सौ किट हेड आफिस, पंचकूला से जल्दी ही आने का दावा किया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों की माने तो जो इस समय 900 किट उपलब्ध हैं, उनको बांटने का कार्य जल्दी ही शुरू किया जाएगा।
स्कूल में भी देनी होगी किट
विभाग ने फील्ड कर्मचारियों को विशेष हिदायतें दी हैं कि कोई भी किट खराब नहीं होनी चाहिए। जिस भी गांव में जाकर किट दी जाएगी, वह सरपंच, पंच, आंगनबाड़ी वर्कर और स्कूल में शिक्षकों को दी जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि ये सब किसी भी गांव के जागरूक लोगों की गिनती आते हैं। उन्हें किट देने के बाद उनका सदुपयोग भी हो सकता है। जिम्मेदारी के साथ पानी की जांच की भी करेंगे।
खुद ही जाकर लानी होगी रिपोर्ट
गांव में बांटी जाने वाली एचटूएस किट की रिपोर्ट विभाग की टीम को खुद ही लानी होगी। जिस भी गांव के सरपंच या अन्य किसी भी सदस्य को किट दी जाएगी तो उससे बाद में संपर्क करना होगा। जो भी जांच रिपोर्ट होगी, उसकी जानकारी एकत्रित करनी होगी। किट की रिपोर्ट निगेटिव आने पर उसकी जांच लैब में करानी होगी।
अमर उजाला ने उठाया था मुद्दा
अमर उजाला ने दो नवंबर को माई सिटी संस्करण में प्रकाशित हुए समाचार में पानी की शुद्धता जांच करने वाली किट नहीं बांटने के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। खबर के माध्यम से चेताया गया था कि विभाग ने अभी तक एक भी किट नहीं बांटी है। अब विभाग जागा है और 31 मार्च तक एचटूएस किट बांटने की योजना बनाई है।
इस तरह से जांचनी होती है शुद्धता
पानी की शुद्धता की जांच करने के लिए एचटूएस किट का इस्तेमाल किया जाता है। इससे आम आदमी भी पता लगा सकता है कि पानी शुद्ध है या नहीं। एचटूएस किट की शीशी पर एक निशान लगा है। उस निशान तक पानी डालकर रखना होता है।
पानी डालने के 24 या 48 घंटे बाद पानी का रंग काला पड़ जाता है तो समझ लिजिए कि पानी पीने लायक नहीं है। उसमें कोई न कोई बैक्टिरिया विद्यमान है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। पानी डालते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि शीशी के मुंह पर हाथ न लगे। सावधानी से ढक्कन खोलने के बाद पानी सप्लाई की टोंटी या अन्य साधन जो पानी उपलब्ध कराता है, उसके सामने शीशी को लगाकर पानी डाला जाना चाहिए। उसके बाद शीशी को बंद करके रखना होता है और 24 या 48 घंटे बाद ही उसे देखना होता है।
वर्जन
विभाग ने 31 मार्च तक 18 सौ एचटूएस किट बांटने की योजना बनाई है। इस किट के माध्यम से एक आम आदमी भी आसानी से पानी की शुद्धता जांच सकता है। कार्यालय में 900 किट तो आ गई हैं, बाकी बची नौ सौ किट भी हेड आफिस से जल्दी ही पहुंच जाएंगी। किट को बांटने के लिए जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं।
एसके गर्ग, कार्यकारी अभियंता, जन स्वास्थ्य विभाग, पानीपत
जांच के बाद निगेटिव रिपोर्ट मिलने पर लैब में पानी की जांच की जा सकती है कि उसमें कौन का खतरनाक तत्व विद्यमान है। निर्धारित समय तक योजना को पूरा करने के लिए विभाग ने कमर कस ली है। किट बांटने के लिए कर्मचारियों की विशेष ड्यूटियां लगाई जा रही है।
अमर उजाला ने अपने दो नवंबर के माई सिटी संस्करण में विशेष रूप से इस मुद्दे को उठाया था। खबर के माध्यम से विभाग और प्रशासन को चेताया था कि पानी की शुद्धता जांचने वाली कोई भी किट अभी तक नहीं बांटी गई हैं। खबर प्रकाशित होने के बाद विभाग ने गांव-गांव में पानी की शुद्धता जांचने वाली किट बांटने की योजना तैयार की है।
31 मार्च तक बांटनी होंगी 1800 किट
जन स्वास्थ्य विभाग को यह किट 31 मार्च तक बांटनी होगी। इस समय विभाग के जिला कार्यालय ने 900 किट खुद खरीदी हैं और नौ सौ किट हेड आफिस, पंचकूला से जल्दी ही आने का दावा किया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों की माने तो जो इस समय 900 किट उपलब्ध हैं, उनको बांटने का कार्य जल्दी ही शुरू किया जाएगा।
स्कूल में भी देनी होगी किट
विभाग ने फील्ड कर्मचारियों को विशेष हिदायतें दी हैं कि कोई भी किट खराब नहीं होनी चाहिए। जिस भी गांव में जाकर किट दी जाएगी, वह सरपंच, पंच, आंगनबाड़ी वर्कर और स्कूल में शिक्षकों को दी जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि ये सब किसी भी गांव के जागरूक लोगों की गिनती आते हैं। उन्हें किट देने के बाद उनका सदुपयोग भी हो सकता है। जिम्मेदारी के साथ पानी की जांच की भी करेंगे।
खुद ही जाकर लानी होगी रिपोर्ट
गांव में बांटी जाने वाली एचटूएस किट की रिपोर्ट विभाग की टीम को खुद ही लानी होगी। जिस भी गांव के सरपंच या अन्य किसी भी सदस्य को किट दी जाएगी तो उससे बाद में संपर्क करना होगा। जो भी जांच रिपोर्ट होगी, उसकी जानकारी एकत्रित करनी होगी। किट की रिपोर्ट निगेटिव आने पर उसकी जांच लैब में करानी होगी।
अमर उजाला ने उठाया था मुद्दा
अमर उजाला ने दो नवंबर को माई सिटी संस्करण में प्रकाशित हुए समाचार में पानी की शुद्धता जांच करने वाली किट नहीं बांटने के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। खबर के माध्यम से चेताया गया था कि विभाग ने अभी तक एक भी किट नहीं बांटी है। अब विभाग जागा है और 31 मार्च तक एचटूएस किट बांटने की योजना बनाई है।
इस तरह से जांचनी होती है शुद्धता
पानी की शुद्धता की जांच करने के लिए एचटूएस किट का इस्तेमाल किया जाता है। इससे आम आदमी भी पता लगा सकता है कि पानी शुद्ध है या नहीं। एचटूएस किट की शीशी पर एक निशान लगा है। उस निशान तक पानी डालकर रखना होता है।
पानी डालने के 24 या 48 घंटे बाद पानी का रंग काला पड़ जाता है तो समझ लिजिए कि पानी पीने लायक नहीं है। उसमें कोई न कोई बैक्टिरिया विद्यमान है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। पानी डालते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि शीशी के मुंह पर हाथ न लगे। सावधानी से ढक्कन खोलने के बाद पानी सप्लाई की टोंटी या अन्य साधन जो पानी उपलब्ध कराता है, उसके सामने शीशी को लगाकर पानी डाला जाना चाहिए। उसके बाद शीशी को बंद करके रखना होता है और 24 या 48 घंटे बाद ही उसे देखना होता है।
वर्जन
विभाग ने 31 मार्च तक 18 सौ एचटूएस किट बांटने की योजना बनाई है। इस किट के माध्यम से एक आम आदमी भी आसानी से पानी की शुद्धता जांच सकता है। कार्यालय में 900 किट तो आ गई हैं, बाकी बची नौ सौ किट भी हेड आफिस से जल्दी ही पहुंच जाएंगी। किट को बांटने के लिए जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं।
एसके गर्ग, कार्यकारी अभियंता, जन स्वास्थ्य विभाग, पानीपत