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निजी स्कूल बसों में फीस पूरी, सुविधा आधी, जोखिम में नन्हें
अमर उजाला ब्यूरो, पानीपत।
Updated Fri, 20 Jan 2017 12:38 AM IST
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पानीपत
- फोटो : पानीपत
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अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। निजी स्कूलों में ट्रांसपोर्ट फीस पूरी, लेकिन सुविधा आधी अधूरी। अभिभावक सबकुछ जानते हुए भी बच्चों के भविष्य को देखकर चुप हैं। परिवहन विभाग और पुलिस एक दूसरे पर कार्रवाई को टालती रहती है। कई बार हादसे हो चुके हैं, लेकिन स्कूल प्रबंधन भी फायदे के लिए कमियों को दूर नहीं कर रहे। ऐसे में नौनिहालों की जान जोखिम में है।
यूपी के एटा में स्कूल बस के दुर्घटनाग्रस्त होने पर 13 बच्चों की जान चली गई। इसके बाद अमर उजाला माई सिटी ने पानीपत के स्कूलों की बसों की स्थिति देखी। दोपहर को स्कूल से आ रही बसों को देखकर हैरान कर देने वाला सच सामने आया। कई स्कूलों की बसों में बच्चों को क्षमता से अधिक बैठाया गया था। बहुत से बच्चे बसों में खड़े होकर सफर कर रहे थे। कई स्कूलों की बसों के तो टायर तक घिसे हुए दिखे। इसके अलावा बसों में इंडिकेटर और बैक लाइट टूटी मिलीं। टीम की आंखों के सामने से दर्जनों बसें निकलीं, लेकिन बहुत कम में ही फॉग लाइट लगी हुई थी। अभिभावक भी इन सबसे अनभिज्ञ नजर आ रहे थे।
यह होना जरूरी है
स्कूल बसों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गाइडलाइन दी हुई है।
बसों में फॉग लाइट और रिफलेक्टर लगे होने चाहिए।
बसों में चालक और परिचालक प्रशिक्षित हों।
बसों में सीसीटीवी कैमरे लगे हों।
बस में फर्स्ट एड बॉक्स होना चाहिए।
स्कूल बसों से हो चुके हैं कई हादसे
जिले में स्कूल और कॉलेज बसों से कई बार हादसे हो चुके हैं। इनमें कई बार बच्चों तक की जान चली गई है। पिछले साल सर्दियों में डाहर चौक पर एक स्कूल बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इसमें एक दर्जन बच्चे घायल हो गए थे। इन बच्चों को बस से निकालते समय दूसरी बस के टक्कर मारने के कारण डाहर के एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। मतलौडा स्थित एक स्कूल की बस पिछले साल दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस हादसे में भी बड़ी संख्या में बच्चे घायल हुए थे।
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अभिभावक बोले, बच्चों को बसों में भेजना मजबूरी
बच्चों को स्कूल बसों में भेजना अभिभावकों की मजबूरी है। वे सब कुछ जानकर भी प्रबंधन के सामने इस मामले को नहीं रख सकते। मॉडल टाउन निवासी हरीश और जितेंद्र ने बताया कि वह नौकरी करते हैं। सुबह ऑफिस चले जाते हैं। इसके बाद शाम को वापस आते हैं। ऐसे में बच्चों को स्कूल छोड़ना और लाना नहीं हो पाता। उन्होंने बच्चों को स्कूल के वाहन से भेजते हैं। इसके लिए स्कूल प्रबंधन को हर माह ट्रांसपोर्ट फीस दी जाती है। कई बार उनको भी बसों में कमी नजर आती है, लेकिन वे किसी से कह नहीं सकते। भाटिया कॉलोनी निवासी आरती और संध्या ने बताया कि स्कूल बसों में कई कमियां हैं, लेकिन वे किसी को बोल नहीं सकतीं।
वर्जन
स्कूल बसों में सुप्रीम कोर्ट के नियमों को लागू करना होता है। हर स्कूल की प्रबंधन को इसकी पूरी जानकारी है। स्कूल प्रबंधन नियमों को ध्यान में भी रखता है, लेकिन कई बार हादसे हो जाते हैं। वे सहोदय स्कूल कांपलेक्स की बैठक में एक फिर से बसों के मसले को रखेंगे।
विनोद शर्मा, चेयरमैन, सहोदय स्कूल कांपलेक्स पानीपत।
वर्जन
स्कूल बसों की समय-समय पर चेकिंग की जाती है। किसी तरह की कमी मिलने पर बसों के चालान कर दिए जाते हैं। कई बार ज्यादा कमी मिलने पर बसों को इंपाउंड तक कर दिया जाता है। पुलिस इस तरह के अभियान में तेजी लेकर आएगी।
आत्माराम लांबा, डीएसपी ट्रैफिक, पानीपत।
वर्जन
परिवहन विभाग समय-समय पर स्कूल बसों की चेकिंग करता है। किसी तरह की कमी पाए जाने पर उचित कार्रवाई की जाती है। स्कूल प्रबंधन को भी हिदायत दी जाती है। परिवहन विभाग के साथ इसमें पुलिस भी कार्रवाई कर सकती है।
प्रदूमन, कार्यकारी सचिव, आरटीए, पानीपत।
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पानीपत। निजी स्कूलों में ट्रांसपोर्ट फीस पूरी, लेकिन सुविधा आधी अधूरी। अभिभावक सबकुछ जानते हुए भी बच्चों के भविष्य को देखकर चुप हैं। परिवहन विभाग और पुलिस एक दूसरे पर कार्रवाई को टालती रहती है। कई बार हादसे हो चुके हैं, लेकिन स्कूल प्रबंधन भी फायदे के लिए कमियों को दूर नहीं कर रहे। ऐसे में नौनिहालों की जान जोखिम में है।
यूपी के एटा में स्कूल बस के दुर्घटनाग्रस्त होने पर 13 बच्चों की जान चली गई। इसके बाद अमर उजाला माई सिटी ने पानीपत के स्कूलों की बसों की स्थिति देखी। दोपहर को स्कूल से आ रही बसों को देखकर हैरान कर देने वाला सच सामने आया। कई स्कूलों की बसों में बच्चों को क्षमता से अधिक बैठाया गया था। बहुत से बच्चे बसों में खड़े होकर सफर कर रहे थे। कई स्कूलों की बसों के तो टायर तक घिसे हुए दिखे। इसके अलावा बसों में इंडिकेटर और बैक लाइट टूटी मिलीं। टीम की आंखों के सामने से दर्जनों बसें निकलीं, लेकिन बहुत कम में ही फॉग लाइट लगी हुई थी। अभिभावक भी इन सबसे अनभिज्ञ नजर आ रहे थे।
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यह होना जरूरी है
स्कूल बसों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गाइडलाइन दी हुई है।
बसों में फॉग लाइट और रिफलेक्टर लगे होने चाहिए।
बसों में चालक और परिचालक प्रशिक्षित हों।
बसों में सीसीटीवी कैमरे लगे हों।
बस में फर्स्ट एड बॉक्स होना चाहिए।
स्कूल बसों से हो चुके हैं कई हादसे
जिले में स्कूल और कॉलेज बसों से कई बार हादसे हो चुके हैं। इनमें कई बार बच्चों तक की जान चली गई है। पिछले साल सर्दियों में डाहर चौक पर एक स्कूल बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इसमें एक दर्जन बच्चे घायल हो गए थे। इन बच्चों को बस से निकालते समय दूसरी बस के टक्कर मारने के कारण डाहर के एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। मतलौडा स्थित एक स्कूल की बस पिछले साल दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस हादसे में भी बड़ी संख्या में बच्चे घायल हुए थे।
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अभिभावक बोले, बच्चों को बसों में भेजना मजबूरी
बच्चों को स्कूल बसों में भेजना अभिभावकों की मजबूरी है। वे सब कुछ जानकर भी प्रबंधन के सामने इस मामले को नहीं रख सकते। मॉडल टाउन निवासी हरीश और जितेंद्र ने बताया कि वह नौकरी करते हैं। सुबह ऑफिस चले जाते हैं। इसके बाद शाम को वापस आते हैं। ऐसे में बच्चों को स्कूल छोड़ना और लाना नहीं हो पाता। उन्होंने बच्चों को स्कूल के वाहन से भेजते हैं। इसके लिए स्कूल प्रबंधन को हर माह ट्रांसपोर्ट फीस दी जाती है। कई बार उनको भी बसों में कमी नजर आती है, लेकिन वे किसी से कह नहीं सकते। भाटिया कॉलोनी निवासी आरती और संध्या ने बताया कि स्कूल बसों में कई कमियां हैं, लेकिन वे किसी को बोल नहीं सकतीं।
वर्जन
स्कूल बसों में सुप्रीम कोर्ट के नियमों को लागू करना होता है। हर स्कूल की प्रबंधन को इसकी पूरी जानकारी है। स्कूल प्रबंधन नियमों को ध्यान में भी रखता है, लेकिन कई बार हादसे हो जाते हैं। वे सहोदय स्कूल कांपलेक्स की बैठक में एक फिर से बसों के मसले को रखेंगे।
विनोद शर्मा, चेयरमैन, सहोदय स्कूल कांपलेक्स पानीपत।
वर्जन
स्कूल बसों की समय-समय पर चेकिंग की जाती है। किसी तरह की कमी मिलने पर बसों के चालान कर दिए जाते हैं। कई बार ज्यादा कमी मिलने पर बसों को इंपाउंड तक कर दिया जाता है। पुलिस इस तरह के अभियान में तेजी लेकर आएगी।
आत्माराम लांबा, डीएसपी ट्रैफिक, पानीपत।
वर्जन
परिवहन विभाग समय-समय पर स्कूल बसों की चेकिंग करता है। किसी तरह की कमी पाए जाने पर उचित कार्रवाई की जाती है। स्कूल प्रबंधन को भी हिदायत दी जाती है। परिवहन विभाग के साथ इसमें पुलिस भी कार्रवाई कर सकती है।
प्रदूमन, कार्यकारी सचिव, आरटीए, पानीपत।