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पुलिस अधीक्षक ने ईएचसी को किया बर्खास्त
अमर उजाला ब्यूरो/पानीपत
Updated Sat, 10 May 2014 05:40 PM IST
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पानीपत के पुलिस अधीक्षक ने भ्रष्टाचार के आरोप में फंसे थाना शहर में तैनात एक ईएचसी को बर्खास्त कर दिया है। ईएचसी गिरफ्तारी वारंट देने और गिरफ्तार करने की एवज में पांच हजार रुपये की रिश्वत मांग रहा था।
शिकायत मिलने पर विजिलेंस पानीपत ने ईएचसी को रंगे हाथों काबू किया था। पुलिस जांच के दौरान ईएचसी दोषी पाया गया और उसको बर्खास्त करते हुए उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
पुलिस अधीक्षक बी. सतीश बालन ने थाना शहर में तैनात ईएससी की जांच रिपोर्ट का गहनता से अध्ययन किया। जांच रिपोर्ट में उसका आचरण रॉरेस्ट ऑफ रेर पाया गया और कारण बताओ नोटिस में प्रस्तावित बर्खास्त के दंड आदेश पारित कर दिए गए।
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इससे पहले राज्य चौकसी ब्यूरो से ईएससी अशोक कुमार को रिश्वत के आरोप में पकड़े जाने की सूचना पत्र माध्यम चार अक्तूबर 2012 को मिली थी। इसके अगले दिन पांच अक्तूबर को लापरवाही व अनुशानहीनता के आधार पर विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी।
जिसकी जांच उप पुलिस अधीक्षक राजबीर सिंह को सौंपी गई। जांच अधिकारी ने आरोपी को सारे दस्तावेत मुहैया कराए और 48 घंटे का समय दिया गया। इसके बाद सवाल जवाब किए गए और छह अभियोजन साक्षियों के कथन अंकित किए गए। उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट पेश कर दी।
इसके बाद भी आरोपी अशोक कुमार खुद को निर्दोष बताता रहा और इसका लिखित जवाब दिया। उनकी जांच रिपोर्ट में आरोपी दोषी पाया गया। पुलिस अधीक्षक कार्यालय में जांच रिपोर्ट का गहनता से अवलोकन किया गया।
ईएससी अशोक कुमार को 18 अप्रैल 2014 को कारण बताओ नोटिस देकर उसको 15 दिन का समय दिया। उन्होंने दो मई को अपना जवाब प्रस्तुत किया और सात मई को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर अपना पक्ष रखा। उसने व्यक्तिगत पेशी में षड़यंत्र के तहत फंसाना बताया, लेकिन कोई सबूत नहीं दे सका।
यह था मामला
ईएचसी अशोक कुमार थाना शहर में तैनात था। उसको थाना शहर में उद्घोषित अपराधियों को गिरफ्तार करने और न्यायालय में पेश करने के लिए डयूटी पर लगाया था। मामले के अनुसार सोमप्रकाश का बिश्नस्वरूप कालोनी स्थित एक टूर एंड ट्रेवल्स संचालक राजेंद्र शर्मा के साथ पैसों का लेन-देन था। राजेंद्र ने सोमप्रकाश को दो चेक दिए और दोनों चेक बाउंस हो गए।
सोमप्रकाश ने कोर्ट में शिकायत दी और अदालत ने 25 फरवरी 2012 को राजेंद्र शर्मा को उद्घोषित अपराधी घोषित करते हुए गिरफ्तार करने के आदेश दिए। ईएचसी अशोक कुमार की राजेंद्र शर्मा को गिरफ्तार करने की डयूटी लगाई गई। उसने सोमप्रकाश से राजेंद्र शर्मा को गिरफ्तार करने की एवज में पांच हजार रुपये की मांगी।
उसने उसको कई बार वारंट दिलवाए, लेकिन पैसे न मिलने पर राजेंद्र शर्मा तक नहीं गया। सोमप्रकाश ने तंग आकर इसकी शिकायत राज्य चौकसी ब्यूरो पानीपत निरीक्षण को शिकायत दी।
विजिलेंस टीम ने अशोक कुमार को पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगों हाथों दबोच लिया और चार अक्तूबर 2012 को राज्य चौकसी ब्यूरो रोहतक में मुकदमा दर्ज कर लिया।
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शिकायत मिलने पर विजिलेंस पानीपत ने ईएचसी को रंगे हाथों काबू किया था। पुलिस जांच के दौरान ईएचसी दोषी पाया गया और उसको बर्खास्त करते हुए उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
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पुलिस अधीक्षक बी. सतीश बालन ने थाना शहर में तैनात ईएससी की जांच रिपोर्ट का गहनता से अध्ययन किया। जांच रिपोर्ट में उसका आचरण रॉरेस्ट ऑफ रेर पाया गया और कारण बताओ नोटिस में प्रस्तावित बर्खास्त के दंड आदेश पारित कर दिए गए।
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इससे पहले राज्य चौकसी ब्यूरो से ईएससी अशोक कुमार को रिश्वत के आरोप में पकड़े जाने की सूचना पत्र माध्यम चार अक्तूबर 2012 को मिली थी। इसके अगले दिन पांच अक्तूबर को लापरवाही व अनुशानहीनता के आधार पर विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी।
जिसकी जांच उप पुलिस अधीक्षक राजबीर सिंह को सौंपी गई। जांच अधिकारी ने आरोपी को सारे दस्तावेत मुहैया कराए और 48 घंटे का समय दिया गया। इसके बाद सवाल जवाब किए गए और छह अभियोजन साक्षियों के कथन अंकित किए गए। उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट पेश कर दी।
इसके बाद भी आरोपी अशोक कुमार खुद को निर्दोष बताता रहा और इसका लिखित जवाब दिया। उनकी जांच रिपोर्ट में आरोपी दोषी पाया गया। पुलिस अधीक्षक कार्यालय में जांच रिपोर्ट का गहनता से अवलोकन किया गया।
ईएससी अशोक कुमार को 18 अप्रैल 2014 को कारण बताओ नोटिस देकर उसको 15 दिन का समय दिया। उन्होंने दो मई को अपना जवाब प्रस्तुत किया और सात मई को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर अपना पक्ष रखा। उसने व्यक्तिगत पेशी में षड़यंत्र के तहत फंसाना बताया, लेकिन कोई सबूत नहीं दे सका।
यह था मामला
ईएचसी अशोक कुमार थाना शहर में तैनात था। उसको थाना शहर में उद्घोषित अपराधियों को गिरफ्तार करने और न्यायालय में पेश करने के लिए डयूटी पर लगाया था। मामले के अनुसार सोमप्रकाश का बिश्नस्वरूप कालोनी स्थित एक टूर एंड ट्रेवल्स संचालक राजेंद्र शर्मा के साथ पैसों का लेन-देन था। राजेंद्र ने सोमप्रकाश को दो चेक दिए और दोनों चेक बाउंस हो गए।
सोमप्रकाश ने कोर्ट में शिकायत दी और अदालत ने 25 फरवरी 2012 को राजेंद्र शर्मा को उद्घोषित अपराधी घोषित करते हुए गिरफ्तार करने के आदेश दिए। ईएचसी अशोक कुमार की राजेंद्र शर्मा को गिरफ्तार करने की डयूटी लगाई गई। उसने सोमप्रकाश से राजेंद्र शर्मा को गिरफ्तार करने की एवज में पांच हजार रुपये की मांगी।
उसने उसको कई बार वारंट दिलवाए, लेकिन पैसे न मिलने पर राजेंद्र शर्मा तक नहीं गया। सोमप्रकाश ने तंग आकर इसकी शिकायत राज्य चौकसी ब्यूरो पानीपत निरीक्षण को शिकायत दी।
विजिलेंस टीम ने अशोक कुमार को पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगों हाथों दबोच लिया और चार अक्तूबर 2012 को राज्य चौकसी ब्यूरो रोहतक में मुकदमा दर्ज कर लिया।