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Panipat News: नशा छुड़ाने को खाकी का रौब नहीं, अपनेपन का अहसास करा रही पुलिस
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संदीप सिंह
पानीपत। यमुना से सटे राणा माजरा गांव के युवा मादक पदार्थ तस्करी के रास्ते पर जाकर शार्टकट तरीके से अमीर बनने का रास्ता अपना रहे हैं। ये रास्ता उन्हें सलाखों के पीछे भी पहुंचा रहा है। राणा माजरा गांव के लगभग 50 युवा मादक पदार्थ तस्करी के आरोपों में जेल काट रहे हैं। पांच साल में करीब 40 युवा नशे के दलदल में फंसकर अपनी जान भी गवां चुके हैं। घरों के इकलौते चिराग बुझ रहे हैं। अब पुलिस ने इन युवाओं को दलदल से निकालने का जिम्मा उठाया है। पानीपत की सीआईए वन ने राणा माजरा गांव के युवाओं को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का संकल्प लिया है।
पुलिस ने नशे की दलदल में फंसे युवाओं को अपनेपन का अहसास कराने व जागरूक करने के लिए यहां कई प्रकार की गतिविधियां शुरू की है। युवाओं के लिए खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन कराया जा रहा है। पुलिस के जवान खुद राणा माजरा गांव के युवाओं के साथ क्रिकेट व वॉलीबाल खेलते हैं। उन्हें अपने स्तर पर खेल का सामान भी उपलब्ध कराते हैं। यहां पढ़ने वाले छात्रों को पुलिस अपने स्तर पर शिक्षा से जुड़ी सामग्री उपलब्ध कराने की कोशिश भी करती है। अब पुलिस की ये कोशिश कामयाब भी होती दिखाई दे रही है। सीआईए वन प्रभारी दीपक कुमार ने बताया कि युवाओं को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास है। युवाओं के साथ तालमेल बनाकर नशा तस्करी के खिलाफ काम किया जा रहा है। युवाओं के लिए खेल प्रतियोगिता कराई जाती है। पुलिस के जवान खुद ग्रामीणों के साथ खेलते हैं। युवाओं को नशे के खिलाफ पाठ पढ़ाया जाता है। ये मुहिम कामयाब भी हो रही है। ग्रामीण पुलिस की इस मुहिम से जुड़ रहे हैं। लोगों से अपील है कि मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ पुलिस का सहयोग करें।
10 फरवरी को होगी प्रतियोगिता
10 फरवरी से सीआईए वन की ओर से गांव राणा माजरा में वालीबॉल, क्रिकेट व कबड्डी समेत तमाम प्रतियोगिताएं कराई जाएगी। युवाओं से इनमें भागने लेने की अपील की जा रही है। पुलिस के जवान युवाओं को शिक्षा व खेल का पाठ पढ़ा रहे हैं। जिन के बेटे नशे के कारण अपनी जान गवां चुके हैं। वो भी युवाओं को नशे का रास्ता छोड़ने की अपील कर रहे हैं।
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ऐसे होती उत्तरप्रदेश से हरियाणा में नशे की तस्करी
राणा माजरा गांव से करनाल, जींद, अंबाला और दिल्ली तक के लिए नशा तस्करी होती है। इस गांव के युवाओं को स्मैक की ऐसी लत है कि पूरे दिन यमुना नदी के किनारे जमा रहते हैं। इस गांव की नशा तस्करी का सबसे बड़ा कनेक्शन यमुना नदी ही है। यमुना नदी के पार उत्तरप्रदेश की सीमा शुरू होती है और वहीं से नशा तस्करी होती है। यमुना पार से नशा तस्कर ट्यूब या नाव के सहारे इस गांव में आते हैं और मादक पदार्थ बेचकर वापस चले जाते हैं।
पुलिस ने राणा माजरा गांव की सुरक्षा भी बढ़ाई
पुलिस ने यमुना तट पर स्थित राणा माजरा गांव की सुरक्षा बढ़ा दी है। गांव के चारों और सादे कपड़ों में पुलिस है ताकि यहां आने वाले नशा तस्करों को पकड़ा जा सके। गांव के युवाओं की भी इसमें मदद ली जा रही है। काफी युवा अब नशा छोड़कर समाज की मुख्य धारा में जुड़ रहे हैं।
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पानीपत। यमुना से सटे राणा माजरा गांव के युवा मादक पदार्थ तस्करी के रास्ते पर जाकर शार्टकट तरीके से अमीर बनने का रास्ता अपना रहे हैं। ये रास्ता उन्हें सलाखों के पीछे भी पहुंचा रहा है। राणा माजरा गांव के लगभग 50 युवा मादक पदार्थ तस्करी के आरोपों में जेल काट रहे हैं। पांच साल में करीब 40 युवा नशे के दलदल में फंसकर अपनी जान भी गवां चुके हैं। घरों के इकलौते चिराग बुझ रहे हैं। अब पुलिस ने इन युवाओं को दलदल से निकालने का जिम्मा उठाया है। पानीपत की सीआईए वन ने राणा माजरा गांव के युवाओं को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का संकल्प लिया है।
पुलिस ने नशे की दलदल में फंसे युवाओं को अपनेपन का अहसास कराने व जागरूक करने के लिए यहां कई प्रकार की गतिविधियां शुरू की है। युवाओं के लिए खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन कराया जा रहा है। पुलिस के जवान खुद राणा माजरा गांव के युवाओं के साथ क्रिकेट व वॉलीबाल खेलते हैं। उन्हें अपने स्तर पर खेल का सामान भी उपलब्ध कराते हैं। यहां पढ़ने वाले छात्रों को पुलिस अपने स्तर पर शिक्षा से जुड़ी सामग्री उपलब्ध कराने की कोशिश भी करती है। अब पुलिस की ये कोशिश कामयाब भी होती दिखाई दे रही है। सीआईए वन प्रभारी दीपक कुमार ने बताया कि युवाओं को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास है। युवाओं के साथ तालमेल बनाकर नशा तस्करी के खिलाफ काम किया जा रहा है। युवाओं के लिए खेल प्रतियोगिता कराई जाती है। पुलिस के जवान खुद ग्रामीणों के साथ खेलते हैं। युवाओं को नशे के खिलाफ पाठ पढ़ाया जाता है। ये मुहिम कामयाब भी हो रही है। ग्रामीण पुलिस की इस मुहिम से जुड़ रहे हैं। लोगों से अपील है कि मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ पुलिस का सहयोग करें।
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10 फरवरी को होगी प्रतियोगिता
10 फरवरी से सीआईए वन की ओर से गांव राणा माजरा में वालीबॉल, क्रिकेट व कबड्डी समेत तमाम प्रतियोगिताएं कराई जाएगी। युवाओं से इनमें भागने लेने की अपील की जा रही है। पुलिस के जवान युवाओं को शिक्षा व खेल का पाठ पढ़ा रहे हैं। जिन के बेटे नशे के कारण अपनी जान गवां चुके हैं। वो भी युवाओं को नशे का रास्ता छोड़ने की अपील कर रहे हैं।
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ऐसे होती उत्तरप्रदेश से हरियाणा में नशे की तस्करी
राणा माजरा गांव से करनाल, जींद, अंबाला और दिल्ली तक के लिए नशा तस्करी होती है। इस गांव के युवाओं को स्मैक की ऐसी लत है कि पूरे दिन यमुना नदी के किनारे जमा रहते हैं। इस गांव की नशा तस्करी का सबसे बड़ा कनेक्शन यमुना नदी ही है। यमुना नदी के पार उत्तरप्रदेश की सीमा शुरू होती है और वहीं से नशा तस्करी होती है। यमुना पार से नशा तस्कर ट्यूब या नाव के सहारे इस गांव में आते हैं और मादक पदार्थ बेचकर वापस चले जाते हैं।
पुलिस ने राणा माजरा गांव की सुरक्षा भी बढ़ाई
पुलिस ने यमुना तट पर स्थित राणा माजरा गांव की सुरक्षा बढ़ा दी है। गांव के चारों और सादे कपड़ों में पुलिस है ताकि यहां आने वाले नशा तस्करों को पकड़ा जा सके। गांव के युवाओं की भी इसमें मदद ली जा रही है। काफी युवा अब नशा छोड़कर समाज की मुख्य धारा में जुड़ रहे हैं।

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