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लापरवाह प्रशासन के आगे बेबस शहरवासी
कैथ्ाल
Updated Sun, 13 Oct 2013 11:51 PM IST
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हरियाणा के जिले कैथल में दो वर्ष बीतने को आए लेकिन नगर परिषद कैथल की ओर से चंडीगढ़ की तर्ज पर शहर में दर्जन भर जगहों पर बस शेल्टर बनाए जाने का निर्णय कागजों से बाहर नहीं निकल पाया।
यही कारण है कि शहर के विभिन्न चौक चौराहों पर विद्यार्थियों समेत अन्य लोगों को धूप और बरसात के समय में सिर छुपाने के लिए जगह नहीं मिल पाती। उन्हें खुले आसमान के नीचे खड़ा रहना पड़ता है।
शहर के लोगों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन परिषद का इस ओर कोई ध्यान नहीं है।
नगर परिषद ने वर्ष 2011 में शहर में बस शेल्टर बनाने की योजना बनाई गई थी। इसमें करीब एक दर्जन जगह भी चिन्हित की गई थी। जहां शेल्टर बनाए जाने थे। लेकिन यह योजना केवल कागजों में ही सिमट कर रह गई। इस दिशा में अभी तक कोई काम नहीं हुआ है।
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समस्या से होते हैं दोचार
शहर के चौकों से हजारों की संख्या में लोग अपने-अपने घरों की ओर रवाना होते हैं। इस दौरान उन्हें वाहनों बस, ऑटोरिक्शा के इंतजार में सड़क पर ही खड़ा रहना पड़ता है।
चाहे कितनी भी कड़ी धूप हो या बरसात। उन्हें सर छुुपाने के लिए जगह नहीं मिलती। लोगों को सर छुपाने के लिए दुकानों में शरण लेनी पड़ती है।
करनाल रोड बाईपास और खुराना रोड बाईपास पर बस इंतजार कर रही छात्रा ममता रानी, सुजाता शर्मा, अमृता, कवलजीत, मोनिका, भावना ने कहा कि जब से कॉलेज आना शुरू किया है।
इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है। कड़ी धूप व बारिश में सिर छुपाने के लिए कुछ साधन नहीं है। उन्होंने कहा कि बस शेल्टर होने से राहत मिल जाती है। बसों के इंतजार में काफी समय खड़े रहना पड़ता है।
यहां है सबसे ज्यादा बस शेल्टर की आवश्यकता
शहर में विश्वकर्मा चौक, भगवान परशुराम चौक, चंदाना गेट, क्वालिटी चौक, सर छोटू राम चौक, पिहोवा चौक, अंबाला रोड बाईपास, करनाल रोड़ बाई पास, ढांढ रोड बाई पास, जींद रोड बाई पास, भगत सिंह चौक, आरकेएसडी कॉलेज के बाहर, करनाल रोड पर जाट कॉलेज व आईजी कॉलेज के बाहर बस शेल्टरों की जरूरत है।
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यही कारण है कि शहर के विभिन्न चौक चौराहों पर विद्यार्थियों समेत अन्य लोगों को धूप और बरसात के समय में सिर छुपाने के लिए जगह नहीं मिल पाती। उन्हें खुले आसमान के नीचे खड़ा रहना पड़ता है।
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शहर के लोगों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन परिषद का इस ओर कोई ध्यान नहीं है।
नगर परिषद ने वर्ष 2011 में शहर में बस शेल्टर बनाने की योजना बनाई गई थी। इसमें करीब एक दर्जन जगह भी चिन्हित की गई थी। जहां शेल्टर बनाए जाने थे। लेकिन यह योजना केवल कागजों में ही सिमट कर रह गई। इस दिशा में अभी तक कोई काम नहीं हुआ है।
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समस्या से होते हैं दोचार
शहर के चौकों से हजारों की संख्या में लोग अपने-अपने घरों की ओर रवाना होते हैं। इस दौरान उन्हें वाहनों बस, ऑटोरिक्शा के इंतजार में सड़क पर ही खड़ा रहना पड़ता है।
चाहे कितनी भी कड़ी धूप हो या बरसात। उन्हें सर छुुपाने के लिए जगह नहीं मिलती। लोगों को सर छुपाने के लिए दुकानों में शरण लेनी पड़ती है।
करनाल रोड बाईपास और खुराना रोड बाईपास पर बस इंतजार कर रही छात्रा ममता रानी, सुजाता शर्मा, अमृता, कवलजीत, मोनिका, भावना ने कहा कि जब से कॉलेज आना शुरू किया है।
इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है। कड़ी धूप व बारिश में सिर छुपाने के लिए कुछ साधन नहीं है। उन्होंने कहा कि बस शेल्टर होने से राहत मिल जाती है। बसों के इंतजार में काफी समय खड़े रहना पड़ता है।
यहां है सबसे ज्यादा बस शेल्टर की आवश्यकता
शहर में विश्वकर्मा चौक, भगवान परशुराम चौक, चंदाना गेट, क्वालिटी चौक, सर छोटू राम चौक, पिहोवा चौक, अंबाला रोड बाईपास, करनाल रोड़ बाई पास, ढांढ रोड बाई पास, जींद रोड बाई पास, भगत सिंह चौक, आरकेएसडी कॉलेज के बाहर, करनाल रोड पर जाट कॉलेज व आईजी कॉलेज के बाहर बस शेल्टरों की जरूरत है।