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शुगर मिल को प्राइवेट फर्म को देने का चौतरफा विरोध

Tue, 24 Jan 2017 11:34 PM IST
amar ujala beuro panipat
amar ujala beuro panipat Updated Tue, 24 Jan 2017 11:34 PM IST
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d - फोटो : amar ujala
 सरकार पानीपत सहकारी शुगर मिल को डाहर गांव में शिफ्ट करने के साथ पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप या प्राइवेट फर्म को लीज पर देने पर विचार कर रही है। सरकार के इस फैसले पर चौतरफा विरोध शुरू हो गया है। भारतीय किसान यूनियन समेत मिल डायरेक्टर व कर्मचारी यूनियन इसके विरोध में उतर आई है। तीनों ने सहकारी मिल को प्राइवेट हाथों में देने के फैसले को किसानों की अनदेखी करने वाला बताया है।
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विदित है कि पानीपत सहकारी शुगर मिल 1956-57 में गोहाना रोड पर स्थापित की गई थी। अब मिल को डाहर गांव में स्थानांतरित किया जाना है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सितंबर 2015 में मिल की आधारशिला रखी थी। गत दिनों मिल चंडीगढ़ में बैठक कर मिल स्थानांरित करने का बजट पास कर दिया था। सरकार अब मिल को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप पर देने या फिर प्राइवेट व्यक्ति को देने की योजना में है। इसको लेकर सोमवार को दिल्ली स्थित हरियाणा भवन में एक बैठक भी आयोजित की गई। शुगर मिल के एक अधिकारी के अनुसार जिले में करीब 60 लाख क्विंटल गन्ना है, जबकि मिल एक सत्र में 22 लाख क्विंटल गन्ना ही पेराई कर पाती है। बाकी का गन्ना आसपास के मिलों में भेजना पड़ता है। अमर उजाला माई सिटी ने शुगर मिल से जुड़े किसान यूनियन, डायरेक्टर व कर्मचारी यूनियन के नेताओं से बातचीत की।
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प्राइवेट हाथों में जाने से किसान का होगा नुकसान : भाकियू
भारतीय किसान यूनियन के जिला उप प्रधान बिंटू मलिक ने बताया कि पानीपत सहकारी चीनी मिल में किसान भी शेयर होल्डर हैं, लेकिन सरकार इतने बड़े फैसले में एक बार भी शेयर होल्डर की राय तक नहीं ली। किसानों की जमीन को प्राइवेट एजेंसियों के हाथ में देने का काम कर रही है। सरकार मिल को यथास्थिति में स्थानांतरित करें और आसपास के लोगों को योग्यता के आधार पर नौकरी भी दें। ऐसा नहीं होता है तो भाकियू किसानों को लेकर संघर्ष करेगी।
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डायरेक्टर किसानों के समर्थन में विरोध करने को मजबूर होंगे
शुगर मिल डायरेक्टर जितेंद्र भापरा ने कहा कि शुगर मिल को प्राइवेट लोगों के हाथ में देने का फैसला गलत है। डायरेक्टर सरकार के इस फैसले का विरोध करने को मजबूर होंगे। प्राइवेट कंपनी या फिर अन्य लोग शुगर मिल को एक दुकान की तरह चलाएंगे। किसानों को अपनी मनमर्जी से पेमेंट दी जाएगी और वे कुछ बोल भी नहीं सकेंगे।

कर्मचारी यूनियन भी करेगी विरोध
शुगर मिल कर्मचारी यूनियन के कार्यकारिणी प्रधान बिजेंद्र मलिक ने कहा कि यूनियन पहले ही सरकार के पानीपत सहकारी चीनी मिल को प्राइवेट पार्टनरशिप के फैसले का विरोध कर चुकी है। वे डीसी के माध्यम मुख्यमंत्री को ज्ञापन दे चुके हैं और इस तरह के फैसले का आगे भी विरोध जारी रखेंगे। सरकार को ऐसे कोई फैसले लेने से पहले शेयरधारक किसानों का प्रस्ताव लेना चाहिए थे।


शुगर मिल को डाहर में शिफ्ट किया जाना है। इसको लेकर सरकार की हिदायत के अनुसार काम किया जा रहा है। किसानों या शेयरधारकों को किसी तरह की परेशानी नहीं आने दी जाएगी।
बीर सिंह, एमडी, शुगर मिल पानीपत।
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