{"_id":"193931a03c75280e49e0728552f487bf","slug":"panipat-news-hindi-news-63","type":"story","status":"publish","title_hn":"पानीपत सर्कल में डिफाल्टरों ने डकारे निगम के 194 करोड़ रुपये ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पानीपत सर्कल में डिफाल्टरों ने डकारे निगम के 194 करोड़ रुपये
ब्यूरो/अमर उजाला/पानीपत
Updated Sun, 08 Nov 2015 12:17 AM IST
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ओरों को नसीहत और खुद मियां फजीहत। पानीपत के प्रशासन पर यह बात बिल्कुल सटीक बैठती है। दूसरों को नसीहत देने वाले पानीपत के सरकारी महकमे ही बिजली निगम के डिफाल्टरों की सूची में शामिल है। अगस्त माह तक बिजली निगम के डिफाल्टरों पर करीब 194 करोड़ रुपये बकाया थे। इनमें से सरकारी महकमों की बात करें तो अकेले पानीपत के सर्कल में करीब 570 सरकारी कनेक्शनों पर बिजली निगम के करीब 35 करोड़ रुपये बकाया हैं। जोकि कुल राशि का करीब 18 प्रतिशत है।
ऐसे में यह सभी सरकारी महकमे खुद ही डिफ्लाटरों की श्रेणी में आ गए हैं। हाल यह हैं कि इन विभागों को बार-बार नोटिस जारी करने के बाद भी इनकी सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा। अलबत्ता बिजली निगम ने इन 570 सरकारी कनेक्शनों में से 47 कनेक्शनों को 17 करोड़ रुपये का डिफाल्टर घोषित करते हुए इनके कनेक्शन की काट दिए। शेष 523 पर भी करीब 15 करोड़ रुपये बकाया है, इन पर कभी भी कार्रवाई हो सकती है।
सर्कल में 1 लाख 17 हजार डिफ्लाटर
पानीपत सर्कल की बात करें तो पूरे सर्कल में करीब 1 लाख 17 हजार डिफाल्टर बिजली निगम को चूना लगाने का काम कर रहे हैं। इन पर अगस्त माह के अंत तक 194 करोड़ करीब 40 लाख रुपये की राशि निगम की बकाया थी। इन कनेक्शनों में से बिजली निगम ने कार्रवाई करते हुए 55 हजार 718 कनेक्शनों को काट दिया। बावजूद इसके इनपर कोई असर नहीं पड़ा और विभाग की रिकवरी नहीं हुई।
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प्रयासों के बावजूद नहीं घट रही डिफाल्टरों की सूची
पानीपत सर्कल की बात करें तो पानीपत सर्कल में विभाग ने उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए तीन माध्यमों से बिल भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराई है। इनमें ईजी-बिल भुगतान, ई-पे भुगतान व कैश काउंटर जोकि निगम में सुविधा मुहैया कराई गई है। पानीपत सर्कल में ईजी बिल सेंटरों की संख्या करीब 150 है जबकि ई-पे भुगतान सेंटरों की संख्या भी 100 से अधिक है।
भुगतान के नए तरीकों पर नहीं कर पा रहे उपभोक्ता विश्वास
उपभोक्ताओं को बिल भरने में कोई दिक्कत न आए व समय पर बिल जमा होने से डिफाल्टरों की संख्या कम हो। इसके लिए पानीपत में ईजी बिल व ई-पे बिल सुविधा मुहैया कराई गई है। बावजूद उपभोक्ताओं का इस तरफ रुझान कम है। यही कारण है कि डिफाल्टर भी लगातार बढ़ रहे हैं। ईजी बिल पे व ई बिल पे सुविधा के तहत बिजली निगम ने पब्लिक प्राइवेट पार्टनशिप के तहत दो कंपनियों को ठेका दिया हुआ है। आगे इन कंपनियों ने अपने सेंटर बनाकर उन्हें बिल लेने के लिए अधिकृत किया है। यह सेंटर संचालक उपभोक्ता से प्रति बिल 5 रुपये अतिरिक्त ले सकता है। लेकिन हर सेंटर संचालक कम से कम एक उपभोक्ता से 10 रुपये बिल भरने की ऐवज में चार्ज करता है, जोकि गैर कानूनी है। इसके अतिरिक्त उपभोक्ताओं का विश्वास भी इन सेंटरों पर नहीं बन पा रहा है। रेलवे रोड से 18 लाख रुपये व तहसील कैंप से 8 लाख रुपयों के साथ कच्चे कैंप से इन्हीं सेंटरों के द्वारा कुछ समय पहले लाखों रुपये का फ्रॉड हो गया था। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए ज्यादातर उपभोक्ता इन पर विश्वास नहीं बना पाए हैं। समय पर बिल जमा नहीं होने व बाद में कुल राशि बजट से बाहर होने के कारण डिफाल्टर बढ़ते ही जा रहे हैं।
वर्जन
हम रिकवरी के लिए समय-समय पर कार्रवाई कर रहे हैं। सरकारी विभागों से पैसा आ ही जाता है, जो कनेक्शन काटे जाते हैं वह मजबूरी में ही काटे जाते हैं। बिल भुगतान सेंटर खोलने से डिफाल्टरों पर कोई असर नहीं पड़ता। बिल पे करने के लिए उपभोक्ता की नियत सही होनी चाहिए। रिकवरी की बात करें तो हमने 9वें माह में करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक की रिकवरी की है।
बीएस गर्ग, एससी, बिजली निगम पानीपत।
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ऐसे में यह सभी सरकारी महकमे खुद ही डिफ्लाटरों की श्रेणी में आ गए हैं। हाल यह हैं कि इन विभागों को बार-बार नोटिस जारी करने के बाद भी इनकी सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा। अलबत्ता बिजली निगम ने इन 570 सरकारी कनेक्शनों में से 47 कनेक्शनों को 17 करोड़ रुपये का डिफाल्टर घोषित करते हुए इनके कनेक्शन की काट दिए। शेष 523 पर भी करीब 15 करोड़ रुपये बकाया है, इन पर कभी भी कार्रवाई हो सकती है।
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सर्कल में 1 लाख 17 हजार डिफ्लाटर
पानीपत सर्कल की बात करें तो पूरे सर्कल में करीब 1 लाख 17 हजार डिफाल्टर बिजली निगम को चूना लगाने का काम कर रहे हैं। इन पर अगस्त माह के अंत तक 194 करोड़ करीब 40 लाख रुपये की राशि निगम की बकाया थी। इन कनेक्शनों में से बिजली निगम ने कार्रवाई करते हुए 55 हजार 718 कनेक्शनों को काट दिया। बावजूद इसके इनपर कोई असर नहीं पड़ा और विभाग की रिकवरी नहीं हुई।
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प्रयासों के बावजूद नहीं घट रही डिफाल्टरों की सूची
पानीपत सर्कल की बात करें तो पानीपत सर्कल में विभाग ने उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए तीन माध्यमों से बिल भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराई है। इनमें ईजी-बिल भुगतान, ई-पे भुगतान व कैश काउंटर जोकि निगम में सुविधा मुहैया कराई गई है। पानीपत सर्कल में ईजी बिल सेंटरों की संख्या करीब 150 है जबकि ई-पे भुगतान सेंटरों की संख्या भी 100 से अधिक है।
भुगतान के नए तरीकों पर नहीं कर पा रहे उपभोक्ता विश्वास
उपभोक्ताओं को बिल भरने में कोई दिक्कत न आए व समय पर बिल जमा होने से डिफाल्टरों की संख्या कम हो। इसके लिए पानीपत में ईजी बिल व ई-पे बिल सुविधा मुहैया कराई गई है। बावजूद उपभोक्ताओं का इस तरफ रुझान कम है। यही कारण है कि डिफाल्टर भी लगातार बढ़ रहे हैं। ईजी बिल पे व ई बिल पे सुविधा के तहत बिजली निगम ने पब्लिक प्राइवेट पार्टनशिप के तहत दो कंपनियों को ठेका दिया हुआ है। आगे इन कंपनियों ने अपने सेंटर बनाकर उन्हें बिल लेने के लिए अधिकृत किया है। यह सेंटर संचालक उपभोक्ता से प्रति बिल 5 रुपये अतिरिक्त ले सकता है। लेकिन हर सेंटर संचालक कम से कम एक उपभोक्ता से 10 रुपये बिल भरने की ऐवज में चार्ज करता है, जोकि गैर कानूनी है। इसके अतिरिक्त उपभोक्ताओं का विश्वास भी इन सेंटरों पर नहीं बन पा रहा है। रेलवे रोड से 18 लाख रुपये व तहसील कैंप से 8 लाख रुपयों के साथ कच्चे कैंप से इन्हीं सेंटरों के द्वारा कुछ समय पहले लाखों रुपये का फ्रॉड हो गया था। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए ज्यादातर उपभोक्ता इन पर विश्वास नहीं बना पाए हैं। समय पर बिल जमा नहीं होने व बाद में कुल राशि बजट से बाहर होने के कारण डिफाल्टर बढ़ते ही जा रहे हैं।
वर्जन
हम रिकवरी के लिए समय-समय पर कार्रवाई कर रहे हैं। सरकारी विभागों से पैसा आ ही जाता है, जो कनेक्शन काटे जाते हैं वह मजबूरी में ही काटे जाते हैं। बिल भुगतान सेंटर खोलने से डिफाल्टरों पर कोई असर नहीं पड़ता। बिल पे करने के लिए उपभोक्ता की नियत सही होनी चाहिए। रिकवरी की बात करें तो हमने 9वें माह में करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक की रिकवरी की है।
बीएस गर्ग, एससी, बिजली निगम पानीपत।