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परिवार में नए सदस्य के जन्म लेने पर नाना-नानी और मामा-मामी शगुन में देते हैं बास्केटबॉल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 03 Mar 2021 01:04 AM IST
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Nana-Nani and maternal uncle give basketball in the omen after the birth of a new member in the family
Nana-Nani and maternal uncle give basketball in the omen after the birth of a new member in the family - फोटो : Panipat
शहर से 28 किलोमीटर दूर मतलौडा ब्लॉक के गांव अहर बास्केटबॉल की दीवानगी है। इस गांव के किसी परिवार में अगर नया सदस्य जन्म लेता है तो उसके नाना-नानी या मामा-मामी शगुन में बॉस्केटबॉल देते हैं। ताकि लड़का या लड़की बड़ा होग बास्केटबॉल का खिलाड़ी बने। शगुन में बास्केटबॉल मिलने पर ग्रामीण खुशी मनाते हैं। इस गांव ने देश को बास्केटबॉल के 6 अंतरराष्ट्रीय और तीन राष्ट्रीय खिलाड़ी दिए हैं। भारतीय बास्केटबॉल टीम के कप्तान रहे साहिल को बास्केटबॉल के प्रति जनून विरासत में मिला था। साहिल का पैतृक गांव अहर ही है।
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गांव अहर में जब बच्चा जब पांच साल का होता है तो उसे बास्केटबॉल थमा दी जाती है। हर पिता चाहता है कि उसका बेटा या बेटी बास्केटबॉल का अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बने।
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बास्केटबॉल खिलाड़ी सौरभ ने बताया कि जब गांव में एक दो ही बास्केटबॉल खिलाड़ी हुआ करते थे और उन खिलाड़ियों ने गांव और देश का नाम रोशन किया तो गांव में बास्केटबॉल के प्रति दिवानगी बढ़ गई। इन खिलाड़ियों को सरकार ने नौकरी दी। बास्केटबॉल के प्रति जज्बा बढ़ा और गांव के हर घर से बास्केटबॉल के खिलाड़ी निकलने लगे। 1975 में गांव के दो खिलाड़ी भारत की टीम के सदस्य रहे। उस वक्त गांव में बच्चा होने पर बास्केटबॉल देने की परंपरा शुरू हुई थी।
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आमतौर पर गांवों में एक ही खेल स्टेडियम होता है, लेकिन अहर गांव में बास्केटबॉल के छह स्टेडियम है। जो भी नया सरपंच बनता है, वह गांव को एक खेल स्टेडियम की सौगात देता है। ग्राम पंचायत की ओर से तीन राष्ट्रीय स्तर के कोच भी हैं।
भारतीय टीम के पूर्व कप्तान साहिल ने बताया कि वह दो साल तक भारतीय टीम के कप्तान रहे। गांव में विरासत में ही उन्हें बास्केटबॉल मिली। गांव की लड़कियां भी राष्ट्रीय स्तर पर गांव का नाम रोशन कर रहीं हैं। गांव के कई खिलाड़ी देश का नाम रोशन कर चुके हैं। उन्हें गर्व है कि उनका जन्म ऐसे गांव में हुआ।

पूरे गांव को युवाओं पर गर्व : सरपंच
गांव अहर के सरपंच रामदिया ने बताया कि 1975 में गांव के सरकारी स्कूल में एक डीपीई थे। वह बास्केटबॉल के खिलाड़ी थे। उन्होंने गांव के युवाओं के अंदर बास्केटबॉल के प्रति दिवानगी पैदा की थी। गांव में साहिल, मस्तू, वेद प्रकाश, दलीप कुमार, रणजीत सिंह, चांदराम, दीपक कुमार व दीपक सिंह जैसे दिग्गज खिलाड़ी रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि अहर गांव देश को कोबे ब्रायंट जैसा दिग्गज बास्केटबॉल खिलाड़ी भी जरूर देगा।
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