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पार्षदों ने एकजुट होकर पूर्व मेयर पर लगाए जेबीएम के साथ मिलीभगत के आरोप, बोले भ्रष्टाचार के सबूतों को सीएम को सौंपेंगे
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पानीपत निगम हाउस में दरार आ चुकी है। बुधवार को मॉडल टाउन में शहर के सभी 26 पार्षदों ने बैठक की, जिसमें पार्षदों ने एकजुटता से मुख्य तौर से पूर्व मेयर भूपेंद्र सिंह को निशाना बनाते हुए शहर की सफाई व्यवस्था पर जबरदस्त प्रहार किया। बैठक में अधिकतर पार्षदों ने मेयर के पिता एवं पूर्व मेयर रहे चुके सरदार भूपेंद्र सिंह पर शहर की कूड़ा उठान कंपनी जेबीएम के साथ मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। पार्षदों का कहना है कि पूर्व मेयर पहले जेबीएम कंपनी का विरोध किया करते थे, लेकिन जब से उनकी कंपनी के साथ मिलीभगत हुई है, वे खुद पार्षदों को कहकर कंपनी की तरफदारी करते हुए कूड़ा उठान के लिए पर्चियां तक कटवाने की हिदायत देते हैं। उन्होंने पूर्व मेयर के खिलाफ मोर्चा खोलते हुुए कहा कि उनके पास पूर्व मेयर की धांधली के कई सबूत भी हैं, जिसे वे सीएम को दिखाकर उनकी सच्चाई बताएंगे।
पार्षदों का आरोप है कि पूर्व मेयर, मेयर अवनीत कौर के पद का फायदा उठाते हुए शहर के बड़े कामों में अपनी हिस्सेदारी तक करवा चुके हैं। पार्षदों ने जेबीएम कंपनी को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि शहर से अब तक कूड़ा उठान का काम पूरा नहीं हो पाया है, जबकि कंपनी कॉलोनियों से कूड़ा उठान के लिए पर्चियां काटने का काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि जिस शहर की सफाई कुछ साल पहले महज 48 लाख रुपये में हुआ करती थी, अब वो अधिकतम एक करोड़ रुपये प्रतिमाह से भी हो सकती है। उसकी जगह निगम को हर माह पांच करोड़ रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। निगम के पास बजट खत्म हो चुका है, सालाना कंपनी निगम से करीब 60 करोड़ रुपये ले जा रही है, जबकि अधिकतम ये काम महज 12 करोड़ रुपये सालाना में आराम से करवाया जा सकता है। पार्षदों ने एकजुटता से कहा कि वे सीएम से इस कंपनी का ठेका रद्द करवाने की मांग भी करेंगे।
विकास कार्यों से शुरू हुई चर्चा, विधायक और मेयर पर रुकी
बैठक में सभी पार्षदों की चर्चा शहर के विकास कार्यों से लेकर शुरू हुई। जिसमें निगम के बजट को रखा गया, इसके बाद जेबीएम पर पेंच फंसा, जिसके टेंडर को अधिकतर पार्षदों ने रद्द करवाने पर सहमति बनाई, क्योंकि जेबीएम ही निगम का अधिकतर बजट खा जाती है, विकास कार्यों के लिए निगम के पास बजट तक नहीं रहता। इसके बाद शहरी विधायक पर चर्चाएं चलीं। उनके टेंडरों पर रोक लगाने से अधिकतर पार्षद नाखुश दिखे, जबकि उनके आदेशों पर स्ट्रीट लाइटों का पौने दो करोड़ रुपये का टेंडर लगाने पर उनका भी विरोधाभास किया गया। इसके बाद चर्चा जेबीएम कंपनी और पूर्व मेयर भूपेंद्र सिंह की मिलीभगत को लेकर चली। जिसमें कई पार्षदों ने खुलकर पूर्व मेयर की कंपनी के साथ मिलीभगत की अवहेलना करते हुए उनकी शिकायत सीएम तक को करने की बात कही। वहीं, अधिकतर पार्षदों ने एकजुटता से मेयर की अध्यक्षता को दरकिनार करते हुए खुद हाउस की बैठक चलाने पर भी सहमति जताई।
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अमरूरत योजना में घपला
पार्षदों ने बैठक में मुद्दा उठाया कि शहर से लगते ग्रामीण एरिया में अमरूत योजना के तहत दबाए जा रहे सीवरेज में भी बड़ी धांधली हो रही है। करोड़ों रुपये के इस प्रोजेक्ट को तहस-नहस किया जा रहा है। इसकी कई बार निगम अधिकारियों को शिकायत के बाद भी इस पर निगम कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।
बजट नहीं है सीएम से करेंगे उम्मीद
बैठक में पार्षदों ने कहा कि शहर के विकास कार्यों को करवाने के लिए काम आने वाला बजट तो जेबीएम कंपनी खा जाती है। इसके बाद निगम के पास इतनी आय नहीं है कि अन्य विकास कार्यों को करवाया जाए। उन्होंने फैसला किया है कि वे खुद सीएम से मिलेंगे और बजट की मांग भी करेंगे ताकि शहर के विकास कार्यों को सुचारू रूप से चलाया जा सके।
हाउस मेयर नहीं, पार्षद चलाएंगे
पूर्व मेयर से खुंदस खाए पार्षदों ने कहा कि पूर्व मेयर की निगम के हर काम में दखलअंदाजी रहती है। वे इस तरह हाउस को बिलकुल चलने नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि आगे से हाउस की बैठक को सभी पार्षद मिलकर अपने तरीके से चलाएंगे, न कि मेयर के तरीके से। इस बारे में भी सीएम से बात की जाएगी।
बैठक में दिखाए पूर्व मेयर की धांधली के सबूत
पार्षदों का कहना है कि बैठक के दौरान कुछ पार्षदों ने पूर्व मेयर भूपेंद्र सिंह की जेबीएम कंपनी और अन्य विकास कार्यों में चल रही धांधली के सबूत तक दिखाएं हैं। इनमें पूर्व पार्षद की कुछ रिकार्डिंग भी शामिल रही हैं, जबकि कुछ ने दस्तावेज दिखाने की बात भी रखी थी। अब अधिकतर पार्षद सहमति से इन सबूतों को सीएम के सामने रखेंगेे।
पहले करते थे विरोध, अब कटवा रहे पर्ची
बैठक में पूर्व मेयर की भूमिका पर बड़ा सवाल बनाते हुए पार्षदों ने कहा कि जो आदमी पहले जेबीएम कंपनी के खिलाफ धरने प्रदर्शन किया करता था, आज वहीं आदमी पार्षदों को उसकी कंपनी से लोगों की पर्चियां कटवाने की मांग करता है। उन्होंने खुलकर पूर्व मेयर की खिलाफत की।
कुछ न बताई सच्चाई, कुछ ने किया किनारा
बैठक में हुई चर्चा के बारे में कुछ पार्षदों ने नाम न छापने की शर्त पर खुलकर बातें बताईं, जिसमें पूर्व मेयर की जेबीएम कंपनी के साथ धांधली के साथ अन्य विकास कार्यों में भी निगम अधिकारियों के साथ मिलीभगत की पोल खोली, जबकि कुछ पार्षदों ने इस प्रकार की कोई जानकारी न होने की बात भी कही।
ये रहे मौजूद
इस मौके पर पार्षद दुष्यंत भट्ट, लोकेश नागरू, अशोक कटारिया, रविंद्र भाटिया, पार्षद पति अशोक नारंग, अशोक छाबड़ा, संजीव दहिया, विजय जैन, रविंद्र कुमार, अश्वनी ढींगड़ा, पवन कुमार, अनिल बजाज, शकुंतला गर्ग, बलराम मकौल, रविंद्र नागपाल समेत सभी 26 पार्षद मौजूद रहे।
मैं ईमानदार था, हूं और रहूंगा : पूर्व मेयर
मैं एक आम इंसान हूं, न मेयर हूं, न ही पार्षद हूं। मैने हमेशा ईमानदारी के साथ काम किया है। भविष्य में भी ऐसे ही ईमानदारी के साथ काम करूंगा। किसी के दबाव, आलोचना या आरोपों से मैं डिगने वाला नहीं हूं। हमने हमेशा भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए कदम उठाए हैं। जहां भी भ्रष्टाचार मिला है, उसके खिलाफ आवाज उठाई है। अगर कोई ये कहता है कि उनके खिलाफ किसी के पास सबूत हैं, तो अधिकतर पार्षदों के भी उनके पास सबूत हैं। - भूपेंद्र सिंह, पूर्व मेयर एवं मेयर के पिता
उन्हें सांसदों की मीटिंग के बारे में कोई सूचना नही हैं। आरोप-प्रत्यारोप की जांच करने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
-अवनीत कौर, मेयर
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पार्षदों का आरोप है कि पूर्व मेयर, मेयर अवनीत कौर के पद का फायदा उठाते हुए शहर के बड़े कामों में अपनी हिस्सेदारी तक करवा चुके हैं। पार्षदों ने जेबीएम कंपनी को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि शहर से अब तक कूड़ा उठान का काम पूरा नहीं हो पाया है, जबकि कंपनी कॉलोनियों से कूड़ा उठान के लिए पर्चियां काटने का काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि जिस शहर की सफाई कुछ साल पहले महज 48 लाख रुपये में हुआ करती थी, अब वो अधिकतम एक करोड़ रुपये प्रतिमाह से भी हो सकती है। उसकी जगह निगम को हर माह पांच करोड़ रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। निगम के पास बजट खत्म हो चुका है, सालाना कंपनी निगम से करीब 60 करोड़ रुपये ले जा रही है, जबकि अधिकतम ये काम महज 12 करोड़ रुपये सालाना में आराम से करवाया जा सकता है। पार्षदों ने एकजुटता से कहा कि वे सीएम से इस कंपनी का ठेका रद्द करवाने की मांग भी करेंगे।
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विकास कार्यों से शुरू हुई चर्चा, विधायक और मेयर पर रुकी
बैठक में सभी पार्षदों की चर्चा शहर के विकास कार्यों से लेकर शुरू हुई। जिसमें निगम के बजट को रखा गया, इसके बाद जेबीएम पर पेंच फंसा, जिसके टेंडर को अधिकतर पार्षदों ने रद्द करवाने पर सहमति बनाई, क्योंकि जेबीएम ही निगम का अधिकतर बजट खा जाती है, विकास कार्यों के लिए निगम के पास बजट तक नहीं रहता। इसके बाद शहरी विधायक पर चर्चाएं चलीं। उनके टेंडरों पर रोक लगाने से अधिकतर पार्षद नाखुश दिखे, जबकि उनके आदेशों पर स्ट्रीट लाइटों का पौने दो करोड़ रुपये का टेंडर लगाने पर उनका भी विरोधाभास किया गया। इसके बाद चर्चा जेबीएम कंपनी और पूर्व मेयर भूपेंद्र सिंह की मिलीभगत को लेकर चली। जिसमें कई पार्षदों ने खुलकर पूर्व मेयर की कंपनी के साथ मिलीभगत की अवहेलना करते हुए उनकी शिकायत सीएम तक को करने की बात कही। वहीं, अधिकतर पार्षदों ने एकजुटता से मेयर की अध्यक्षता को दरकिनार करते हुए खुद हाउस की बैठक चलाने पर भी सहमति जताई।
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अमरूरत योजना में घपला
पार्षदों ने बैठक में मुद्दा उठाया कि शहर से लगते ग्रामीण एरिया में अमरूत योजना के तहत दबाए जा रहे सीवरेज में भी बड़ी धांधली हो रही है। करोड़ों रुपये के इस प्रोजेक्ट को तहस-नहस किया जा रहा है। इसकी कई बार निगम अधिकारियों को शिकायत के बाद भी इस पर निगम कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।
बजट नहीं है सीएम से करेंगे उम्मीद
बैठक में पार्षदों ने कहा कि शहर के विकास कार्यों को करवाने के लिए काम आने वाला बजट तो जेबीएम कंपनी खा जाती है। इसके बाद निगम के पास इतनी आय नहीं है कि अन्य विकास कार्यों को करवाया जाए। उन्होंने फैसला किया है कि वे खुद सीएम से मिलेंगे और बजट की मांग भी करेंगे ताकि शहर के विकास कार्यों को सुचारू रूप से चलाया जा सके।
हाउस मेयर नहीं, पार्षद चलाएंगे
पूर्व मेयर से खुंदस खाए पार्षदों ने कहा कि पूर्व मेयर की निगम के हर काम में दखलअंदाजी रहती है। वे इस तरह हाउस को बिलकुल चलने नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि आगे से हाउस की बैठक को सभी पार्षद मिलकर अपने तरीके से चलाएंगे, न कि मेयर के तरीके से। इस बारे में भी सीएम से बात की जाएगी।
बैठक में दिखाए पूर्व मेयर की धांधली के सबूत
पार्षदों का कहना है कि बैठक के दौरान कुछ पार्षदों ने पूर्व मेयर भूपेंद्र सिंह की जेबीएम कंपनी और अन्य विकास कार्यों में चल रही धांधली के सबूत तक दिखाएं हैं। इनमें पूर्व पार्षद की कुछ रिकार्डिंग भी शामिल रही हैं, जबकि कुछ ने दस्तावेज दिखाने की बात भी रखी थी। अब अधिकतर पार्षद सहमति से इन सबूतों को सीएम के सामने रखेंगेे।
पहले करते थे विरोध, अब कटवा रहे पर्ची
बैठक में पूर्व मेयर की भूमिका पर बड़ा सवाल बनाते हुए पार्षदों ने कहा कि जो आदमी पहले जेबीएम कंपनी के खिलाफ धरने प्रदर्शन किया करता था, आज वहीं आदमी पार्षदों को उसकी कंपनी से लोगों की पर्चियां कटवाने की मांग करता है। उन्होंने खुलकर पूर्व मेयर की खिलाफत की।
कुछ न बताई सच्चाई, कुछ ने किया किनारा
बैठक में हुई चर्चा के बारे में कुछ पार्षदों ने नाम न छापने की शर्त पर खुलकर बातें बताईं, जिसमें पूर्व मेयर की जेबीएम कंपनी के साथ धांधली के साथ अन्य विकास कार्यों में भी निगम अधिकारियों के साथ मिलीभगत की पोल खोली, जबकि कुछ पार्षदों ने इस प्रकार की कोई जानकारी न होने की बात भी कही।
ये रहे मौजूद
इस मौके पर पार्षद दुष्यंत भट्ट, लोकेश नागरू, अशोक कटारिया, रविंद्र भाटिया, पार्षद पति अशोक नारंग, अशोक छाबड़ा, संजीव दहिया, विजय जैन, रविंद्र कुमार, अश्वनी ढींगड़ा, पवन कुमार, अनिल बजाज, शकुंतला गर्ग, बलराम मकौल, रविंद्र नागपाल समेत सभी 26 पार्षद मौजूद रहे।
मैं ईमानदार था, हूं और रहूंगा : पूर्व मेयर
मैं एक आम इंसान हूं, न मेयर हूं, न ही पार्षद हूं। मैने हमेशा ईमानदारी के साथ काम किया है। भविष्य में भी ऐसे ही ईमानदारी के साथ काम करूंगा। किसी के दबाव, आलोचना या आरोपों से मैं डिगने वाला नहीं हूं। हमने हमेशा भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए कदम उठाए हैं। जहां भी भ्रष्टाचार मिला है, उसके खिलाफ आवाज उठाई है। अगर कोई ये कहता है कि उनके खिलाफ किसी के पास सबूत हैं, तो अधिकतर पार्षदों के भी उनके पास सबूत हैं। - भूपेंद्र सिंह, पूर्व मेयर एवं मेयर के पिता
उन्हें सांसदों की मीटिंग के बारे में कोई सूचना नही हैं। आरोप-प्रत्यारोप की जांच करने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
-अवनीत कौर, मेयर