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मेयर को जमानत, पुलिस को कोर्ट की फटकार
ब्यूरो पानीपत
Updated Tue, 08 Nov 2016 12:56 AM IST
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न्यायाधीश ने साढ़े छह घंटे बाद सुनाया फैसला
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जिला सेशन कोर्ट ने मेयर सुरेश वर्मा को 40 मिनट तक वकीलों की बहस सुनने और छह घंटे के इंतजार के बाद जमानत दे दी। कोर्ट ने बचाव पक्ष के वकील की दलील सुनने के बाद सीआईए-टू को कड़ी फटकार लगाई। बचाव पक्ष के वकील ने अदालत से तीन दिन तक कई-कई घंटे की पूछताछ करने, सबूत पेश न कर पाने और मेयर द्वारा शादी की वीडियो देने के बावजूद न लेने के बारे में बताया था। सतपाल राणा की तरफ से मेयर सुरेश वर्मा की जमानत याचिका खारिज कराने को चंडीगढ़ हाईकोर्ट से वकील आए थे। मेयर वर्मा को जमानत मिलते ही सीनियर डिप्टी मेयर के पति सुभाष बठला और समर्थकों ने मिठाइयां बांटकर खुशी जताई। कुटानी गांव और मेयर के वार्ड में शाम को दिवाली जैसा माहौल रहा। सतपाल राणा ने अब हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की बात कही है।
पानीपत ग्रामीण विकास मोर्चा के अध्यक्ष सतपाल राणा पर जानलेवा हमले के मामले में फंसे मेयर सुरेश वर्मा की जमानत याचिका पर जिला जज एकेे सिंह पंवार की कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। सरकारी वकील अशोक कुमार बागड़ी और सतपाल राणा की तरफ से हाईकोर्ट से आए एडवोकेट वाहला ने अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष के वकील एडवोकेट रमेश गुप्ता ने कोर्ट में पुलिस पर मेयर को जान बूझकर प्रताड़ित करने, राजनैतिक दबाव में काम करने और सतपाल राणा पर जान बूझकर मेयर को फंसाने के आरोप लगाए। तीनों वकीलों में करीब 40 मिनट पर जिरह चली। कोर्ट ने तीनों वकीलों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। शाम पांच बजे मेयर सुरेश वर्मा की जमानत याचिका अदालत ने मंजूर कर ली।
कोर्ट में तीनों पक्षों ने ऐसे रखीं दलील
सतपाल राणा का वकील: 16 अक्तूबर की शाम को सतपाल राणा डाबर कॉलोनी में वाल्मीकि जयंती पर कार्यक्रम में जा रहे थे। उस वक्त मेयर डाबर कॉलोनी में दो लोगों के साथ थे। मेयर सुरेश वर्मा ने राणा को देखकर दो लोगों को कुछ इशारा किया था। रात को 11:30 बजे सतपाल राणा पर हमला कर दो लोगों ने एक व्यक्ति को फोन कर कहा कि मेयर साहब राणा के हाथ पैर तोड़ दिए हैं। सामने वाले व्यक्ति ने कहा कि जान से मार दो।
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पुलिस पक्ष की दलील: वारदात के वक्त मेयर सुरेश वर्मा डाबर कॉलोनी में ही थे।
मेयर पक्ष की दलील: वारदात के वक्त तो मेयर शादी समारोह में था। इसके उनके पास कई गवाह हैं। शादी में लगे कैमरों की फुटेज में भी मेयर दिख रहे हैं। उन्होंने इसकी सीडी पुलिस को भी देने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने सीडी लेने से मना कर दिया।
पुलिस और सतपाल राणा पक्ष की दलील : सतपाल राणा पर मेयर सुरेश वर्मा ने ही रंजिशन हमला करवाया है।
मेयर पक्ष की दलील: यदि मेयर वर्मा षड्यंत्र रचते और हमला कराते तो यह काम वह अपने भाइयों से न करवाकर किसी और से करवा सकते थे। सभी आरोप बेबुनियाद हैं।
पुलिस पक्ष की दलील: उनको मेयर के पास दो मोबाइल फोन मिले हैं, जबकि उन्हें शक है कि मेयर के पास तीन मोबाइल फोन हैं। इसको वह छुपा रहे हैं। उसी फोन से हमलावरों को निर्देश दिए गए थे।
मेयर पक्ष की दलील: तीन दिन पुलिस ने पांच-पांच घंटे मेयर से पूछताछ की। पुलिस मेयर से तीसरा मोबाइल बरामद क्यों नहीं कर पाई।
मेयर पक्ष की दलील: वह मेयर के शादी समारोह में होने की सीडी पुलिस को देना चाहते थे, तो पुलिस ने सीडी लेने से क्यों मना कर दिया।
पुलिस पक्ष की दलील: पुलिस का कंप्यूटर खराब था, इसलिए सीडी नहीं ली। (इस पर जिला न्यायाधीश ने पुलिस को कड़ी फटकार लगाई)।
पुलिस पक्ष की दलील: मेयर सुरेश वर्मा ने तीन दिन की पूछताछ के दौरान पुलिस का बिल्कुल सहयोग नहीं किया।
मेयर पक्ष की दलील: सहयोग कैसे करते हैं। मेयर वर्मा तीन दिन पुलिस के पास पांच-पांच घंटे रहे। पुलिस के सैकड़ों सवालों का मेयर वर्मा ने जवाब दिया। कानून का पूरा सम्मान किया।
मेयर पक्ष की दलील: पुलिस ने राजनैतिक दबाव में ही मेयर सुरेश वर्मा पर धारा 307 लगा दी। इसके बारे में पुलिस ने डॉक्टर से सतपाल राणा की मेडिकल रिपोर्ट तक नहीं ली।
सतपाल राणा पक्ष की दलील: मेयर सुरेश वर्मा पानीपत ग्रामीण विकास मोर्चा के अध्यक्ष सतपाल राणा से रंजिश रखते थे। वह मेयर के कारनामों का आरटीआई के माध्यम से खुलासा कर रहे थे। इसलिए उन पर मेयर ने हमला कराया।
मेयर सुरेश वर्मा पक्ष की दलील: मेयर सुरेश वर्मा ने कभी नहीं कहा कि सतपाल राणा की उनसे कोई दुशमनी है। वह एक जिम्मेदारी भरे पद पर रहते हुए ऐसा कदम क्यों उठाएंगे।
कुटानी गांव में मनी दिवाली
मेयर सुरेश वर्मा की जमानत याचिका मंजूर होते ही गांव कुटानी में ग्रामीणों ने पटाखे चलाकर और मिठाइयां बांटकर खुशी मनाई गई। ग्रामीणों ने मेयर वर्मा की जमानत याचिका मंजूर होने पर एक दूसरे को बधाई भी दी। पार्षद पति संजीव कुमार ने कहा कि वह असत्य पर सत्य की जीत है। उनको कानून पूरा विश्वास था। सीनियर डिप्टी मेयर काजल बठला के पति सुभाष बठला और अन्य समर्थकों ने कोर्ट में ही मिठाई बांटकर खुशी जताई।
पुलिस के दावे कोर्ट में ढेर
पुलिस तीन दिन की पूछताछ और दो पेज की जांच रिपोर्ट तैयार कर मेयर सुरेश वर्मा की जमानत याचिका खारिज कराने पर पूरी तरह से आश्वास्त थी। पुलिस मेयर की मामले में भूमिका होने का दावा ठोक रही थी। पुलिस तीन दिन तक यही राग अलापती रही कि मेयर जांच में सहयोग नहीं कर रहे। कोर्ट ने तीनों पक्षों की दलील सुनने के बाद और पुलिस को कड़ी फटकार लगाई। इसके साथ ही पुलिस के दावे कोर्ट में ढेर हो गए।
पुलिस ने सुबह से ही छापेमारी शुरू की
कोर्ट में पुलिस अपनी दलीलें पेश करने के बाद भी मेयर वर्मा को कस्टडी में लेने के लिए आश्वस्त थी। पुलिस सुबह 11 बजे ही मेयर को कस्टडी में लेने के लिए छापेमारी में जुट गई थी। पुलिस ने सुबह 11 से साढ़े चार बजे तक मेयर वर्मा के कार्यालय और उनके घर पर कई बार छापेमारी की। कोर्ट के फैसले के बाद पुलिस की छापेमारी रुक गई।
पुलिस ने कोई सबूत पेश नहीं किया
मेयर सुरेश वर्मा के वकील रमेश गुप्ता ने बताया कि पुलिस की तरफ से कोर्ट में जो दलीलें पेश की गई थीं। वे सब बेबुनियाद थीं। पुलिस के पास मेयर के खिलाफ कोई सबूत नहीं था। उनके पास मेयर के बेगुनाह होने के पूरे सबूत थे। पुलिस की झूठी दलीलों से ही विश्वास हो गया था कि मेयर की जमानत याचिका मंजूर हो जाएगी।
वकील के एक प्रश्न पर दोनों पक्ष हुए चुप
पुलिस पक्ष के वकील और सतपाल राणा के पक्ष में हाईकोर्ट से आए वकील बार-बार कोर्ट में यह दलील दे रहे थे कि सतपाल राणा पर हमला कराने का षड्यंत्र मेयर सुरेश वर्मा ने रचा है। दोनों पक्षों की इस दलील के बीच मेयर सुरेश वर्मा के वकील रमेश गुप्ता ने कहा कि यदि मेयर सुरेश वर्मा ही सतपाल राणा पर जानलेवा हमला कराने का षड्यंत्र रचते तो वह यह काम अपने भाइयों से क्यों करवाते। यह काम वह किसी और से करवा सकते थे। मेयर सुरेश वर्मा को पता था कि यदि हमला हुआ तो उनका नाम सीधे आएगा। जिले के एक जिम्मेदारी भरे पद पर होते हुए मेयर हमला क्यों करवाएंगे। मेयर वर्मा के वकील रमेश गुप्ता की इस दलील पर पुलिस और सतपाल राणा पक्ष के दोनों वकील चुप हो गए।
मेयर की जमानत याचिका के खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे राणा
मेयर सुरेश वर्मा की सेशन कोर्ट में जमानत याचिका मंजूर होने के बाद पानीपत ग्रामीण विकास मोर्चा के अध्यक्ष सतपाल राणा ने हाईकोर्ट में अपनी याचिका दायर करने की बात कही है। सतपाल राणा मंगलवार को हाईकोर्ट में अपनी अर्जी डालकर सेशन कोर्ट की जमानत याचिका का विरोध करेंगे।
यह है मामला
16 अक्तूबर की रात डाबर कॉलोनी में वाल्मीकि जयंती के कार्यक्रम से लौटते वक्त पानीपत ग्रामीण मोर्चा के प्रधान सतपाल राणा पर जानलेवा हमला हुआ था। सतपाल राणा का आरोप था कि उसे गोली मारने की कोशिश की गई। पुलिस में दी शिकायत में सतपाल राणा ने मेयर सुरेश वर्मा व उसके पांच भाईयों दलबीर वर्मा, संजय वर्मा, आजाद वर्मा धनपत वर्मा व विक्रम वर्मा समेत विक्की, सुखविंद्र उर्फ सूखा, पिंटू , सुभाष मलिक, गुल्लू व मुनीम कुंडू के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था। पुलिस ने मामले की जांच के बाद पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने मेयर वर्मा के खिलाफ भी गिरफ्तारी का वारंट हासिल कर लिए थे। सीआईए-टू ने तीन दिन की जांच के बाद मेयर सुरेश वर्मा को गिरफ्तार कर लिया था। बाद में मेयर को एक लाख रुपये की जमानत और मुचलके पर रिहा कर दिया।
पुलिस ने तीन दिन मेयर सुरेश वर्मा से पूछताछ की। पुलिस ने दो पेज की अपनी जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश की थी। कोर्ट ने वकीलों की बहस सुनने के बाद मेयर वर्मा की जमानत याचिका मंजूर कर ली है।
मनोज वर्मा, प्रभारी सीआइए-टू, पानीपत।
पुलिस कोर्ट में मेयर सुरेश वर्मा के खिलाफ कोई सबूत पेश नहीं कर पाई। मेयर की मामले में कोई भूमिका नहीं है। पुलिस राजनैतिक दबाव में काम कर रही है। हमने कोर्ट में मेयर के मामले में शामिल न होने के पूरे सबूत पेश किए। कोर्ट ने हमारी दलीलों को सुनते हुए पुलिस को लंबी पूछताछ के लिए फटकार लगाई। पुलिस ने तीन दिन तक मेयर से पूछताछ की। इसके बाद भी वह मेयर से कुछ भी बरामद नहीं कर सकी। कोर्ट ने मेयर की जमानत याचिका मंजूर कर ली है।
रमेश गुप्ता, वकील मेयर सुरेश वर्मा पक्ष।
मुझे न्यायालय पर पूरा भरोसा था। मेरी इस मामले में कोई भूमिका नहीं थी। मुझे फंसाने के लिए षड्यंत्र रचा जा रहा था। मेरे वकील ने कोर्ट में मेरी बेगुनाही के पूरे सबूत पेश किए थे। कोर्ट ने मेरी जमानत याचिका मंजूर कर ली है। यह असत्य पर सत्य की जीत है।
सुरेश वर्मा, मेयर पानीपत
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पानीपत ग्रामीण विकास मोर्चा के अध्यक्ष सतपाल राणा पर जानलेवा हमले के मामले में फंसे मेयर सुरेश वर्मा की जमानत याचिका पर जिला जज एकेे सिंह पंवार की कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। सरकारी वकील अशोक कुमार बागड़ी और सतपाल राणा की तरफ से हाईकोर्ट से आए एडवोकेट वाहला ने अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष के वकील एडवोकेट रमेश गुप्ता ने कोर्ट में पुलिस पर मेयर को जान बूझकर प्रताड़ित करने, राजनैतिक दबाव में काम करने और सतपाल राणा पर जान बूझकर मेयर को फंसाने के आरोप लगाए। तीनों वकीलों में करीब 40 मिनट पर जिरह चली। कोर्ट ने तीनों वकीलों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। शाम पांच बजे मेयर सुरेश वर्मा की जमानत याचिका अदालत ने मंजूर कर ली।
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कोर्ट में तीनों पक्षों ने ऐसे रखीं दलील
सतपाल राणा का वकील: 16 अक्तूबर की शाम को सतपाल राणा डाबर कॉलोनी में वाल्मीकि जयंती पर कार्यक्रम में जा रहे थे। उस वक्त मेयर डाबर कॉलोनी में दो लोगों के साथ थे। मेयर सुरेश वर्मा ने राणा को देखकर दो लोगों को कुछ इशारा किया था। रात को 11:30 बजे सतपाल राणा पर हमला कर दो लोगों ने एक व्यक्ति को फोन कर कहा कि मेयर साहब राणा के हाथ पैर तोड़ दिए हैं। सामने वाले व्यक्ति ने कहा कि जान से मार दो।
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पुलिस पक्ष की दलील: वारदात के वक्त मेयर सुरेश वर्मा डाबर कॉलोनी में ही थे।
मेयर पक्ष की दलील: वारदात के वक्त तो मेयर शादी समारोह में था। इसके उनके पास कई गवाह हैं। शादी में लगे कैमरों की फुटेज में भी मेयर दिख रहे हैं। उन्होंने इसकी सीडी पुलिस को भी देने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने सीडी लेने से मना कर दिया।
पुलिस और सतपाल राणा पक्ष की दलील : सतपाल राणा पर मेयर सुरेश वर्मा ने ही रंजिशन हमला करवाया है।
मेयर पक्ष की दलील: यदि मेयर वर्मा षड्यंत्र रचते और हमला कराते तो यह काम वह अपने भाइयों से न करवाकर किसी और से करवा सकते थे। सभी आरोप बेबुनियाद हैं।
पुलिस पक्ष की दलील: उनको मेयर के पास दो मोबाइल फोन मिले हैं, जबकि उन्हें शक है कि मेयर के पास तीन मोबाइल फोन हैं। इसको वह छुपा रहे हैं। उसी फोन से हमलावरों को निर्देश दिए गए थे।
मेयर पक्ष की दलील: तीन दिन पुलिस ने पांच-पांच घंटे मेयर से पूछताछ की। पुलिस मेयर से तीसरा मोबाइल बरामद क्यों नहीं कर पाई।
मेयर पक्ष की दलील: वह मेयर के शादी समारोह में होने की सीडी पुलिस को देना चाहते थे, तो पुलिस ने सीडी लेने से क्यों मना कर दिया।
पुलिस पक्ष की दलील: पुलिस का कंप्यूटर खराब था, इसलिए सीडी नहीं ली। (इस पर जिला न्यायाधीश ने पुलिस को कड़ी फटकार लगाई)।
पुलिस पक्ष की दलील: मेयर सुरेश वर्मा ने तीन दिन की पूछताछ के दौरान पुलिस का बिल्कुल सहयोग नहीं किया।
मेयर पक्ष की दलील: सहयोग कैसे करते हैं। मेयर वर्मा तीन दिन पुलिस के पास पांच-पांच घंटे रहे। पुलिस के सैकड़ों सवालों का मेयर वर्मा ने जवाब दिया। कानून का पूरा सम्मान किया।
मेयर पक्ष की दलील: पुलिस ने राजनैतिक दबाव में ही मेयर सुरेश वर्मा पर धारा 307 लगा दी। इसके बारे में पुलिस ने डॉक्टर से सतपाल राणा की मेडिकल रिपोर्ट तक नहीं ली।
सतपाल राणा पक्ष की दलील: मेयर सुरेश वर्मा पानीपत ग्रामीण विकास मोर्चा के अध्यक्ष सतपाल राणा से रंजिश रखते थे। वह मेयर के कारनामों का आरटीआई के माध्यम से खुलासा कर रहे थे। इसलिए उन पर मेयर ने हमला कराया।
मेयर सुरेश वर्मा पक्ष की दलील: मेयर सुरेश वर्मा ने कभी नहीं कहा कि सतपाल राणा की उनसे कोई दुशमनी है। वह एक जिम्मेदारी भरे पद पर रहते हुए ऐसा कदम क्यों उठाएंगे।
कुटानी गांव में मनी दिवाली
मेयर सुरेश वर्मा की जमानत याचिका मंजूर होते ही गांव कुटानी में ग्रामीणों ने पटाखे चलाकर और मिठाइयां बांटकर खुशी मनाई गई। ग्रामीणों ने मेयर वर्मा की जमानत याचिका मंजूर होने पर एक दूसरे को बधाई भी दी। पार्षद पति संजीव कुमार ने कहा कि वह असत्य पर सत्य की जीत है। उनको कानून पूरा विश्वास था। सीनियर डिप्टी मेयर काजल बठला के पति सुभाष बठला और अन्य समर्थकों ने कोर्ट में ही मिठाई बांटकर खुशी जताई।
पुलिस के दावे कोर्ट में ढेर
पुलिस तीन दिन की पूछताछ और दो पेज की जांच रिपोर्ट तैयार कर मेयर सुरेश वर्मा की जमानत याचिका खारिज कराने पर पूरी तरह से आश्वास्त थी। पुलिस मेयर की मामले में भूमिका होने का दावा ठोक रही थी। पुलिस तीन दिन तक यही राग अलापती रही कि मेयर जांच में सहयोग नहीं कर रहे। कोर्ट ने तीनों पक्षों की दलील सुनने के बाद और पुलिस को कड़ी फटकार लगाई। इसके साथ ही पुलिस के दावे कोर्ट में ढेर हो गए।
पुलिस ने सुबह से ही छापेमारी शुरू की
कोर्ट में पुलिस अपनी दलीलें पेश करने के बाद भी मेयर वर्मा को कस्टडी में लेने के लिए आश्वस्त थी। पुलिस सुबह 11 बजे ही मेयर को कस्टडी में लेने के लिए छापेमारी में जुट गई थी। पुलिस ने सुबह 11 से साढ़े चार बजे तक मेयर वर्मा के कार्यालय और उनके घर पर कई बार छापेमारी की। कोर्ट के फैसले के बाद पुलिस की छापेमारी रुक गई।
पुलिस ने कोई सबूत पेश नहीं किया
मेयर सुरेश वर्मा के वकील रमेश गुप्ता ने बताया कि पुलिस की तरफ से कोर्ट में जो दलीलें पेश की गई थीं। वे सब बेबुनियाद थीं। पुलिस के पास मेयर के खिलाफ कोई सबूत नहीं था। उनके पास मेयर के बेगुनाह होने के पूरे सबूत थे। पुलिस की झूठी दलीलों से ही विश्वास हो गया था कि मेयर की जमानत याचिका मंजूर हो जाएगी।
वकील के एक प्रश्न पर दोनों पक्ष हुए चुप
पुलिस पक्ष के वकील और सतपाल राणा के पक्ष में हाईकोर्ट से आए वकील बार-बार कोर्ट में यह दलील दे रहे थे कि सतपाल राणा पर हमला कराने का षड्यंत्र मेयर सुरेश वर्मा ने रचा है। दोनों पक्षों की इस दलील के बीच मेयर सुरेश वर्मा के वकील रमेश गुप्ता ने कहा कि यदि मेयर सुरेश वर्मा ही सतपाल राणा पर जानलेवा हमला कराने का षड्यंत्र रचते तो वह यह काम अपने भाइयों से क्यों करवाते। यह काम वह किसी और से करवा सकते थे। मेयर सुरेश वर्मा को पता था कि यदि हमला हुआ तो उनका नाम सीधे आएगा। जिले के एक जिम्मेदारी भरे पद पर होते हुए मेयर हमला क्यों करवाएंगे। मेयर वर्मा के वकील रमेश गुप्ता की इस दलील पर पुलिस और सतपाल राणा पक्ष के दोनों वकील चुप हो गए।
मेयर की जमानत याचिका के खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे राणा
मेयर सुरेश वर्मा की सेशन कोर्ट में जमानत याचिका मंजूर होने के बाद पानीपत ग्रामीण विकास मोर्चा के अध्यक्ष सतपाल राणा ने हाईकोर्ट में अपनी याचिका दायर करने की बात कही है। सतपाल राणा मंगलवार को हाईकोर्ट में अपनी अर्जी डालकर सेशन कोर्ट की जमानत याचिका का विरोध करेंगे।
यह है मामला
16 अक्तूबर की रात डाबर कॉलोनी में वाल्मीकि जयंती के कार्यक्रम से लौटते वक्त पानीपत ग्रामीण मोर्चा के प्रधान सतपाल राणा पर जानलेवा हमला हुआ था। सतपाल राणा का आरोप था कि उसे गोली मारने की कोशिश की गई। पुलिस में दी शिकायत में सतपाल राणा ने मेयर सुरेश वर्मा व उसके पांच भाईयों दलबीर वर्मा, संजय वर्मा, आजाद वर्मा धनपत वर्मा व विक्रम वर्मा समेत विक्की, सुखविंद्र उर्फ सूखा, पिंटू , सुभाष मलिक, गुल्लू व मुनीम कुंडू के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था। पुलिस ने मामले की जांच के बाद पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने मेयर वर्मा के खिलाफ भी गिरफ्तारी का वारंट हासिल कर लिए थे। सीआईए-टू ने तीन दिन की जांच के बाद मेयर सुरेश वर्मा को गिरफ्तार कर लिया था। बाद में मेयर को एक लाख रुपये की जमानत और मुचलके पर रिहा कर दिया।
पुलिस ने तीन दिन मेयर सुरेश वर्मा से पूछताछ की। पुलिस ने दो पेज की अपनी जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश की थी। कोर्ट ने वकीलों की बहस सुनने के बाद मेयर वर्मा की जमानत याचिका मंजूर कर ली है।
मनोज वर्मा, प्रभारी सीआइए-टू, पानीपत।
पुलिस कोर्ट में मेयर सुरेश वर्मा के खिलाफ कोई सबूत पेश नहीं कर पाई। मेयर की मामले में कोई भूमिका नहीं है। पुलिस राजनैतिक दबाव में काम कर रही है। हमने कोर्ट में मेयर के मामले में शामिल न होने के पूरे सबूत पेश किए। कोर्ट ने हमारी दलीलों को सुनते हुए पुलिस को लंबी पूछताछ के लिए फटकार लगाई। पुलिस ने तीन दिन तक मेयर से पूछताछ की। इसके बाद भी वह मेयर से कुछ भी बरामद नहीं कर सकी। कोर्ट ने मेयर की जमानत याचिका मंजूर कर ली है।
रमेश गुप्ता, वकील मेयर सुरेश वर्मा पक्ष।
मुझे न्यायालय पर पूरा भरोसा था। मेरी इस मामले में कोई भूमिका नहीं थी। मुझे फंसाने के लिए षड्यंत्र रचा जा रहा था। मेरे वकील ने कोर्ट में मेरी बेगुनाही के पूरे सबूत पेश किए थे। कोर्ट ने मेरी जमानत याचिका मंजूर कर ली है। यह असत्य पर सत्य की जीत है।
सुरेश वर्मा, मेयर पानीपत