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Panipat News: दीयों से भरा बाजार, पानीपत के साथ दिल्ली भी हो रहा रोशन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 22 Oct 2024 06:41 AM IST
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Market filled with lamps, along with Panipat, Delhi is also getting illuminated
पानीपत। दिवाली दीयों बिना रोशन नहीं हो सकती। इसी के चलते बाजार में चारों तरफ दीये सज गए हैं। कहीं मिट्टी के दीये हैं तो कहीं पर इलेक्ट्रिक दीयों की मांग है। मिट्टी के दीयों की मांग इस बार काफी बढ़ी है। पानीपत के साथ दिल्ली और चंडीगढ़ से भी इसके ऑर्डर आए हैं। दीये बनाने वाले लोग परिवार के साथ मिलकर दिन रात काम कर रहे हैं।
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दिवाली के नजदीक आते ही इसको लेकर तैयारियों ने जाेर पकड़ लिया है। कारीगरों ने दीयों की मांग को देखते हुए काम को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है। कई जगह स्वदेशी चीजों से प्रेम को देखते हुए लोगों ने मिट्टी के दीयों की बड़ी मात्रा में खरीदी करना प्रारंभ कर दिया है। दिवाली को नजदीक आता देख मिट्टी के दीयों के कारीगरों में अलग उत्साह देखने को मिलता है। पानीपत जिले के गोहाना रोड पर पुल के नीचे रहते कारीगरों ने बताया कि दिवाली में मिट्टी के दीयों की डिमांड अधिक हो जाती है। लोग अपने और अपने रिश्तेदारों के लिए बड़ी मात्रा में दीये खरीदते है।
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दुकान के मालिक पन्नालाल का कहना है कि वह पिछले 45 सालों से यहां मिट्टी के दीये बनाते हैं। दिवाली का सीजन आने पर उसके दो लाख के करीब दीये लोग खरीदकर ले जाते हैं। दीयों से लेकर मटकों तक में 10 से 12 डिजाइन बनाए गए हैं। पानीपत के साथ आसपास के शहरों के लोग यहां मटके व दीये लेने आते हैं।
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लोगों ने मिट्टी के दीयों के साथ-साथ चाईनीज दीयों को भी खरीदना शुरू कर दिया है। लोगों ने बाजारों की चमक-धमक को देखते हुए दिवाली के लिए आए दीये व फैंसी लाइटों से लेकर अन्य उपकरणों को खरीदना प्रारंभ कर दिया है। रेलवे रोड स्थित हिमांशु इलेक्ट्रॉनिक्स के संचालक हिमांशु ने बताया कि दिवाली के सीजन में लोग फैंसी लाइटों व चाइनीज दीयों की खरीदारी करते हैं। दिवाली के सीजन में दो से तीन लाख रुपये का व्यापार हो जाता है।



दिल्ली चंडीगढ़ जैसे बड़े शहरों में भी भेजे जा रहे दीये
किशनपुरा निवासी राहुल ने बताया कि वह पिछले 30 साल से यहां रहकर लोगों के लिए मिट्टी के दीये व मटके बना रहे हैं। हर दिवाली पर सात लाख ये बेचते हैं। दीयों से लेकर मटकों के भी डिजाइन देखने को मिलते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले साल हुई दीयों की खरीदारी से ज्यादा इस बार दीये लोग खरीद रहे हैं। लोगों में दीयों को लेकर एक अलग उत्साह देखने को मिलता है। दीयों की ज्यादा मांग होने पर उन्हें ज्यादा समय निकालकर दीये बनाने पड़ते हैं। दीयों की पानीपत के साथ दिल्ली व चंडीगढ़ में भी मांग है। राहुल ने बताया कि उससे पहले उसके पिता कृष्णलाल दीये बनाते हैं। सलारगंज गेट के पास मिट्टी के दीयों का स्टॉल लगा रही सरोज ने बताया कि वह पिछले 15 साल से यहां दीयों को बेचकर अपने परिवार का जीवनयापन कर रही है। उसका बेटा रोहित भी उसकी मदद करता है। दिवाली के सीजन में 40 से 50 हजार दीये बनाकर बेचती हैं। वह दीयों व मटकों के 25 से अधिक डिजाइन बनाती है।
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