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Panipat News: शामलात जमीन को मलकियत के लिए महापंचायत आज
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सनौली। यमुना नदी से सटे सनौली, बापौली, समालखा हल्के के 60 के लगभग गांवों के किसानों की यमुना खादर की शामलात जमीन को मलकियत करने की मांग को लेकर रविवार 10 मार्च को सनौली-तामसाबाद टोल टैक्स पर एक महापंचायत की आयोजन किया जाएगा।
महापंचायत को लेकर शनिवार को यमुना सुधार समिति प्रदेशाध्यक्ष रतन सिंह रावल एडवोकेट ने गांव जलालपर, रिशपुर, सनौली खुर्द सहित दर्जनों गांवों में दौरा कर किसानों को महापंचायत में आने का न्यौता देते हुए यह जानकारी दी है।
इस दौरान रावल ने सभी हल्के के किसानों, मजदूरों के साथ-साथ पंचायत में सभी गांवों के सरपंचों, पूर्व सरपंचों, नंबरदारों, चौकीदारों व मौजिज लोगों को यमुना खादर की शामलात जमीनों को लेकर मलकियत कराने की सरकार से पुरजोर मांग को लेकर शामिल होने का आह्वान किया है। रावल ने बताया कि यमुना से सटे अनेक गांवों के हजारों एकड़ जमीन शामलात देह की होने पर उन्हें बाढ़ से बर्बाद फसलों के मुआवजा सहित जमीन पर ऋण आदि कोई सुविधाएं नही मिलने से किसान परेशान हैं, जबकि वर्षो से इस जमीन पर उनके पूर्वज खेती करते आ रहे हैं। उनकी इस शामलात जमीनों को मलकियत करने की सरकार से मांग को लेकर एक महापंचयात की जाएगी जो आने वाले लोकसभा चुनावों से पहले उनकी अगर मांगे पूरी नही हुई तो किसान चुनाव का बहिष्कार करने के लिए मजबूर होगा। महापंचायत में अन्य मामलों पर भी निर्णय लिया जाएगा।
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महापंचायत को लेकर शनिवार को यमुना सुधार समिति प्रदेशाध्यक्ष रतन सिंह रावल एडवोकेट ने गांव जलालपर, रिशपुर, सनौली खुर्द सहित दर्जनों गांवों में दौरा कर किसानों को महापंचायत में आने का न्यौता देते हुए यह जानकारी दी है।
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इस दौरान रावल ने सभी हल्के के किसानों, मजदूरों के साथ-साथ पंचायत में सभी गांवों के सरपंचों, पूर्व सरपंचों, नंबरदारों, चौकीदारों व मौजिज लोगों को यमुना खादर की शामलात जमीनों को लेकर मलकियत कराने की सरकार से पुरजोर मांग को लेकर शामिल होने का आह्वान किया है। रावल ने बताया कि यमुना से सटे अनेक गांवों के हजारों एकड़ जमीन शामलात देह की होने पर उन्हें बाढ़ से बर्बाद फसलों के मुआवजा सहित जमीन पर ऋण आदि कोई सुविधाएं नही मिलने से किसान परेशान हैं, जबकि वर्षो से इस जमीन पर उनके पूर्वज खेती करते आ रहे हैं। उनकी इस शामलात जमीनों को मलकियत करने की सरकार से मांग को लेकर एक महापंचयात की जाएगी जो आने वाले लोकसभा चुनावों से पहले उनकी अगर मांगे पूरी नही हुई तो किसान चुनाव का बहिष्कार करने के लिए मजबूर होगा। महापंचायत में अन्य मामलों पर भी निर्णय लिया जाएगा।
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