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Panipat News: भगवान कृष्ण के माखन चोरी प्रसंग से आत्मनिर्भर बनने का दिया संदेश

Sun, 07 Jun 2026 12:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत Updated Sun, 07 Jun 2026 12:44 AM IST
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Lord Krishna's butter theft incident gave the message of becoming self-reliant.
कथा सुनाते स्वामी ब्रह्मस्वरूपानंद। स्रोत : समिति
पानीपत।कथावाचक स्वामी ब्रह्मस्वरूपानंद महाराज ने सेक्टर-24 स्थित गुर्जर भवन में शनिवार को भगवान कृष्ण की माखन चोरी के प्रसंग से आत्मनिर्भर बनने का संदेश दिया। उन्होंने कथा में बाल लीलाओं, गोपियों संग महारास और पूतना राक्षसी के प्रसंगों के बारे में बताया जिसे सुनकर श्रद्धालु आनंदित हुए।
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उन्होंने कहा कि माखन चोरी से वह गोपियों के मन की चोरी का आशय मानते रहे। वह चाहते थे कि उनके यहां का दूध, दही, घी माखन अत्याचारी कंस के क्षेत्र में न जाए, इसे खा-पीकर कंस के व्यभिचारी हमारे ऊपर जुल्म न करें। हमारे क्षेत्र की गोपियों द्वारा परिश्रम पूर्वक तैयार किया दूध, दही, घी, माखन हमारे ही ग्वाले खाकर बलिष्ठ बने और कंस के अत्याचारों का वीरतापूर्वक सामना कर प्रभावी बन सकें। इस प्रसंग से हमें आत्मनिर्भर बनने का संदेश मिलता है। भगवान कृष्ण की लीलाएं भक्ति योग का वर्णन करती हैं। इनमें धर्म-कर्म का मार्ग अपनाकर धर्म कर्म करने और ज्ञान प्राप्ति के माध्यम से मुक्ति प्राप्त करने का अद्भुत संगम है। कंस ने अपनी निराशा व हताशा में बलवान राक्षसी पूतना को योजनाबद्ध तरीके से कृष्ण का वध करने को भेजा। राक्षसी पूतना ने अपने जहर भरे स्तनों का दूध बालक कृष्ण को पिलाने की योजना बनाई। इस बीच योजना के विफल प्रयास के कारण पापात्मा, दुराचारी, पूतना का कृष्ण द्वारा वध कर दिया गया। पूतना को उसकी हरकतों का फल मिला। कथा में आगे महाराज ने बताया कि इंद्र जहां अपनी पूजा कराना चाह रहे थे, अभिमान और उसके अहम को मिटाने के लिए सभी को गोवर्धन की पूजा का आग्रह किया। जिससे इंद्र क्रोधित हुए। गोकुल के लोगों को इसका सबक सिखाने के लिए भारी वर्षा करते हैं ताकि गोकुल की गोपियां और ग्वाले भारी वर्षा और तूफान में बह जाएं। ब्रजवासियों की इस परेशानी में देख कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को कनिष्ठ उंगली पर उठाकर उन्हें गोवर्धन पर्वत के नीचे आकर शरण लेने का आग्रह किया। सभी ने भगवान कृष्ण को गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव का स्मरण किया इससे ब्रजवासियों की कृष्ण कृपा से प्राण रक्षा हुई और इंद्र का घमंड चूर चूर हो गया। इंद्र का अहंकार भंग हुआ और गोवर्धन की पूजा प्रारंभ हुई। श्रीमद्भागवत कथा का संदेश है कि भगवान गर्व प्रहारी है। प्रभु चरणों में सदैव आस्था और विनम्रता का भाव रखना चाहिए। इस अवसर पर जगदीश चौहान, नरेंद्र चौहान, गिरिजेश, कृष्ण मनचंदा, युधिष्ठिर शर्मा व महासचिव चमन गुलाटी उपस्थित रहे।
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कथा सुनाते स्वामी ब्रह्मस्वरूपानंद। स्रोत : समिति

कथा सुनाते स्वामी ब्रह्मस्वरूपानंद। स्रोत : समिति

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