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Panipat News: पराली जलाने के बजाय मिट्टी में मिलाएं अवशेष, बढ़ेगी उर्वरता
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- कृषि विभाग और केंद्रीय पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कर रहे जागरूक
- जिले में घटित हुई थी पराली जलने की एक घटना, आग से मिट्टी की गुणवत्ता और पर्यावरण को होता है नुकसान
संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। धान की कटाई के साथ ही फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर कृषि विभाग ने किसानों को जागरूक करना तेज कर दिया है। किसानों को पराली जलाने के बजाय उसे कृषि उपकरणों की मदद से मिट्टी में मिलाने और बेलर मशीनों से गांठें बनाकर उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इससे मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने, उसकी उर्वरता बनाए रखने और वायु प्रदूषण कम करने में मदद मिलती है। केंद्रीय पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड की अधिकारी भी गांवों में पहुंचकर किसानों को पराली प्रबंधन के विकल्प बता रही हैं।
केंद्रीय पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड दिल्ली से टीम में शामिल डॉ. विजयलक्ष्मी ने भी जिले के कचरौली, बाबरपुर, बड़ौली, उझा गांवों में खेतों का निरीक्षण कर किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के तरीके समझाए। उन्होंने पराली जलाने के बजाय उसे मिट्टी में मिलाने की सलाह दी। पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है, मिट्टी के उपयोगी सूक्ष्मजीव प्रभावित होते हैं और मिट्टी के पोषक तत्वों को नुकसान पहुंच सकता है। इसके बजाय फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन मिट्टी की सेहत सुधारने में मददगार हो सकता है।
50 से अधिक बेलर मशीनें कर रहीं काम
जिले में इस सीजन करीब 75 हजार हैक्टेयर में धान की रोपाई हुई थी। अब तक लगभग 40 प्रतिशत क्षेत्र में कटाई हो चुकी है। फसल अवशेषों की गांठें बनाने के लिए 50 से अधिक बेलर मशीनें काम कर रही हैं। जिले में पराली जलने की एक घटना बराना गांव में सामने आई, जहां बिजली का तार टूटकर गिरने से करीब दो एकड़ खेत में अवशेष जले। हालांकि जांच में किसान की गलती नहीं मिली।
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वर्जन-
किसानों को फसल अवशेष जलाने के बजाय उनका उचित प्रबंधन करने के लिए जागरूक किया जा रहा है। पराली को मिट्टी में मिलाने या बेलर मशीनों से गांठें बनाकर उपयोग करने से प्रदूषण रोकने में मदद मिलती है। विभाग की टीमें खेतों का निरीक्षण कर रही हैं और किसानों को उपलब्ध विकल्पों की जानकारी दे रही हैं।
- सुधीर कुमार, सहायक कृषि अभियंता, पानीपत।
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- जिले में घटित हुई थी पराली जलने की एक घटना, आग से मिट्टी की गुणवत्ता और पर्यावरण को होता है नुकसान
संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। धान की कटाई के साथ ही फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर कृषि विभाग ने किसानों को जागरूक करना तेज कर दिया है। किसानों को पराली जलाने के बजाय उसे कृषि उपकरणों की मदद से मिट्टी में मिलाने और बेलर मशीनों से गांठें बनाकर उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इससे मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने, उसकी उर्वरता बनाए रखने और वायु प्रदूषण कम करने में मदद मिलती है। केंद्रीय पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड की अधिकारी भी गांवों में पहुंचकर किसानों को पराली प्रबंधन के विकल्प बता रही हैं।
केंद्रीय पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड दिल्ली से टीम में शामिल डॉ. विजयलक्ष्मी ने भी जिले के कचरौली, बाबरपुर, बड़ौली, उझा गांवों में खेतों का निरीक्षण कर किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के तरीके समझाए। उन्होंने पराली जलाने के बजाय उसे मिट्टी में मिलाने की सलाह दी। पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है, मिट्टी के उपयोगी सूक्ष्मजीव प्रभावित होते हैं और मिट्टी के पोषक तत्वों को नुकसान पहुंच सकता है। इसके बजाय फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन मिट्टी की सेहत सुधारने में मददगार हो सकता है।
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50 से अधिक बेलर मशीनें कर रहीं काम
जिले में इस सीजन करीब 75 हजार हैक्टेयर में धान की रोपाई हुई थी। अब तक लगभग 40 प्रतिशत क्षेत्र में कटाई हो चुकी है। फसल अवशेषों की गांठें बनाने के लिए 50 से अधिक बेलर मशीनें काम कर रही हैं। जिले में पराली जलने की एक घटना बराना गांव में सामने आई, जहां बिजली का तार टूटकर गिरने से करीब दो एकड़ खेत में अवशेष जले। हालांकि जांच में किसान की गलती नहीं मिली।
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वर्जन-
किसानों को फसल अवशेष जलाने के बजाय उनका उचित प्रबंधन करने के लिए जागरूक किया जा रहा है। पराली को मिट्टी में मिलाने या बेलर मशीनों से गांठें बनाकर उपयोग करने से प्रदूषण रोकने में मदद मिलती है। विभाग की टीमें खेतों का निरीक्षण कर रही हैं और किसानों को उपलब्ध विकल्पों की जानकारी दे रही हैं।
- सुधीर कुमार, सहायक कृषि अभियंता, पानीपत।
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