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गैरकानूनी तरीके से बच्चा गोद लेने पर तीन साल तक कैद या एक लाख जुर्माना
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पानीपत। जिले का कोई भी व्यक्ति अब अवैध तरीके से बच्चा गोद न ले वरना उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। गैर कानूनी तरीके से बच्चा गोद लेने पर किशोर न्याय अधिनियम के तहत तीन वर्ष की सजा अथवा एक लाख रुपये के जुर्माने या दोनों का प्रावधान है। बच्चा गोद लेने के लिए सेंट्रल एडॉपशन रिसोर्स एजेंसी (कारा) में गोद लेने के लिए आवेदन करना अनिवार्य है।
उपायुक्त सुशील सारवान ने बताया कि कोविड 19 महामारी के दौरान कुछ बच्चों ने अपने माता-पिता को खो दिया है। ऐसे मामले भी हैं, जिनमें बच्चों ने अपनी माता अथवा पिता में से किसी एक को खो दिया है। इस प्रकार एकल अभिभावकों से उनके बच्चे गोद लेने का प्रयास किया जाता है। कुछ गैर सरकारी स्वयंसेवी संगठन (एनजीओ) तथा व्यक्ति निजी तौर पर बच्चों को गोद लेने-देने के संदर्भ में सूचनाएं देते हैं, जो कि उचित नहीं है। कोई भी गैर सरकारी संगठन तथा व्यक्ति अपने स्तर पर बच्चा गोद नहीं दिला सकता।
जिला बाल संरक्षण अधिकारी निधि गुप्ता ने बच्चे को कानूनी रूप से मुक्त घोषित करने वाली प्रक्रिया बारे बताया। उन्होंने कहा कि अनाथ बच्चों को बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष पेश किया जाएगा। सीडब्ल्यूसी बच्चों को तत्काल देखभाल के लिए बाल देखरेख संस्थानों या विशेष दत्तक ग्रहण एजेेंसी में रखने के लिए आवश्यक आदेश जारी करेगी। जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा बच्चों को गोद लेने के लिए कानूनी रूप से मुक्त घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अंत में सीडब्ल्यूसी बच्चों को गोद लेने के लिए कानूनी रूप से मुक्त करेगी। गोद लेने की तारीख से दो वर्ष तक फॉलोअप भी किया जाएगा।
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उपायुक्त सुशील सारवान ने बताया कि कोविड 19 महामारी के दौरान कुछ बच्चों ने अपने माता-पिता को खो दिया है। ऐसे मामले भी हैं, जिनमें बच्चों ने अपनी माता अथवा पिता में से किसी एक को खो दिया है। इस प्रकार एकल अभिभावकों से उनके बच्चे गोद लेने का प्रयास किया जाता है। कुछ गैर सरकारी स्वयंसेवी संगठन (एनजीओ) तथा व्यक्ति निजी तौर पर बच्चों को गोद लेने-देने के संदर्भ में सूचनाएं देते हैं, जो कि उचित नहीं है। कोई भी गैर सरकारी संगठन तथा व्यक्ति अपने स्तर पर बच्चा गोद नहीं दिला सकता।
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जिला बाल संरक्षण अधिकारी निधि गुप्ता ने बच्चे को कानूनी रूप से मुक्त घोषित करने वाली प्रक्रिया बारे बताया। उन्होंने कहा कि अनाथ बच्चों को बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष पेश किया जाएगा। सीडब्ल्यूसी बच्चों को तत्काल देखभाल के लिए बाल देखरेख संस्थानों या विशेष दत्तक ग्रहण एजेेंसी में रखने के लिए आवश्यक आदेश जारी करेगी। जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा बच्चों को गोद लेने के लिए कानूनी रूप से मुक्त घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अंत में सीडब्ल्यूसी बच्चों को गोद लेने के लिए कानूनी रूप से मुक्त करेगी। गोद लेने की तारीख से दो वर्ष तक फॉलोअप भी किया जाएगा।
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