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स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही, बिना डयूटी मजिस्ट्रेट, डीसीओ व पुलिस के मारा छापा
ब्यूरो/ अमर उजाला
Updated Fri, 06 May 2016 12:46 AM IST
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स्वास्थ्य विभाग के दो अधिकारियों ने ही ड्यूटी मजिस्ट्रेट, डीसीओ और एलएमओ के बिना ही रेलवे स्टेशन पर एमटीपी किट पकड़ने को लेकर छापा मार दिया। स्वास्थ्य अधिकारियों ने रेलवे स्टेशन के बाहर 60 एमटीपी किट पकड़ने का दावा किया है।
स्वास्थ्य अधिकारी अब जीआरपी में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा रहे हैं, लेकिन जीआरपी डीसी की मंजूरी के बिना मुकदमा दर्ज करने से पीछे हट रही है। जीआरपी के जवाब देने पर स्वास्थ्य विभाग के दोनों अधिकारियों को पसीने छूट गए हैं।
डीसी ने स्वास्थ्य विभाग द्वारा रेलवे स्टेशन पर रेड करने को लेकर किसी तरह की परमिशन न लेने की कहते हुए मामले की जांच कराने की बात कही है।
स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त सिविल सर्जन व डिप्टी सिविल सर्जन ने रेलवे रोड से एमटीपी किट पकड़ने के लिए बिना किसी ड्यूटी मजिस्ट्रेट, एलएमओ व डीसीओ के छापेमारी कर दी। दोनों अधिकारियों ने अपने साथ पुलिस टीम को भी ले जाना उचित नहीं समझा।
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इस परिणाम यह रहा कि दो आरोपी भागने में कामयाब हो गए। स्वास्थ्य विभाग ने तीन आरोपी को पकड़कर उनके कब्जे से 60 एमटीपी किट बरामद करने का दावा किया है। स्वास्थ्य विभाग के इस कदम की विभाग्र में तरह तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है। यह ऐसा पहला छापा है जिसमें स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने डयूटी मजिस्ट्रेट के साथ-साथ एलएमओ व डीसीओ को भी सूचना देना जरूरी नहीं समझा। प्रशासनिक अधिकारियों को मामले की भनक सुबह लगी, वहीं जीआरपी व आरपीएफ ने भी पूरे मामले की सूचना होने से इंकार कर दिया।
पांच लोगों के आने की सूचना थी
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पता चला है कि पांच आरोपी दिल्ली से एमटीपी किट लेकर पानीपत आ रहे हैं। पांचों आरोपी कलंदर चौक के रहने वाले है। अतिरिक्त सिविल सर्जन डॉ.नवीन सुनेजा व डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. सुधीर बतरा सूचना के आधार पर बिना डयूटी मजिस्ट्रेट, डीसीओ व पुलिस बिना ही रेलवे स्टेशन पर पहुंच गए। ट्रेन से पांच आरोपी उतरे थे।
स्वास्थ्य विभाग के दोनों अधिकारियों ने सभी आरोपियों को दबोचने का प्रयास किया, लेकिन दो आरोपी फरार होने में कामयाब हो गए। पांचों आरोपियों को पकडने के लिए स्वास्थ्य विभाग को पुलिस की मदद लेनी चाहिए थी। स्वास्थ्य विभाग की यह रेड विवादों में घिर गई है।
जीआरपी को स्वास्थ्य विभाग द्वारा रेलवे स्टेशन पर एमटीपी किटों को लेकर दबिश देने की कोई जानकारी नहीं थी। उनको एक डॉक्टर द्वारा वीरवार सुबह एफआईआर दर्ज कराने पहुंचने पर इसकी जानकारी लगी। यह उनके अधिकार क्षेत्र का नहीं है और न ही अधिकारियों के पास रेड की प्रशासन की मंजूरी थी।
रमेश चंद्र, प्रभारी, जीआरपी, पानीपत
उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई
वर्जन-उनके पास रेड की कोई सूचना नहीं थी। उन्होंने इस बारे में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से बातचीत की है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बंद कमरे में डयूटी मजिस्टेट,डीसीओ व एलएमओ की जरूरत होती है। यह आवश्यक नहीं है कि खुले वातावरण में होने वाली रेड में डयूटी मजिस्ट्रेट की मदद ली जाएं। अगर मामले में कोई लापरवाही बरती गई है तो कड़ी कार्रवाई होगी।
डॉ.चंद्रशेखर खरे,उपायुक्त पानीपत।
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स्वास्थ्य अधिकारी अब जीआरपी में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा रहे हैं, लेकिन जीआरपी डीसी की मंजूरी के बिना मुकदमा दर्ज करने से पीछे हट रही है। जीआरपी के जवाब देने पर स्वास्थ्य विभाग के दोनों अधिकारियों को पसीने छूट गए हैं।
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डीसी ने स्वास्थ्य विभाग द्वारा रेलवे स्टेशन पर रेड करने को लेकर किसी तरह की परमिशन न लेने की कहते हुए मामले की जांच कराने की बात कही है।
स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त सिविल सर्जन व डिप्टी सिविल सर्जन ने रेलवे रोड से एमटीपी किट पकड़ने के लिए बिना किसी ड्यूटी मजिस्ट्रेट, एलएमओ व डीसीओ के छापेमारी कर दी। दोनों अधिकारियों ने अपने साथ पुलिस टीम को भी ले जाना उचित नहीं समझा।
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इस परिणाम यह रहा कि दो आरोपी भागने में कामयाब हो गए। स्वास्थ्य विभाग ने तीन आरोपी को पकड़कर उनके कब्जे से 60 एमटीपी किट बरामद करने का दावा किया है। स्वास्थ्य विभाग के इस कदम की विभाग्र में तरह तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है। यह ऐसा पहला छापा है जिसमें स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने डयूटी मजिस्ट्रेट के साथ-साथ एलएमओ व डीसीओ को भी सूचना देना जरूरी नहीं समझा। प्रशासनिक अधिकारियों को मामले की भनक सुबह लगी, वहीं जीआरपी व आरपीएफ ने भी पूरे मामले की सूचना होने से इंकार कर दिया।
पांच लोगों के आने की सूचना थी
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पता चला है कि पांच आरोपी दिल्ली से एमटीपी किट लेकर पानीपत आ रहे हैं। पांचों आरोपी कलंदर चौक के रहने वाले है। अतिरिक्त सिविल सर्जन डॉ.नवीन सुनेजा व डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. सुधीर बतरा सूचना के आधार पर बिना डयूटी मजिस्ट्रेट, डीसीओ व पुलिस बिना ही रेलवे स्टेशन पर पहुंच गए। ट्रेन से पांच आरोपी उतरे थे।
स्वास्थ्य विभाग के दोनों अधिकारियों ने सभी आरोपियों को दबोचने का प्रयास किया, लेकिन दो आरोपी फरार होने में कामयाब हो गए। पांचों आरोपियों को पकडने के लिए स्वास्थ्य विभाग को पुलिस की मदद लेनी चाहिए थी। स्वास्थ्य विभाग की यह रेड विवादों में घिर गई है।
जीआरपी को स्वास्थ्य विभाग द्वारा रेलवे स्टेशन पर एमटीपी किटों को लेकर दबिश देने की कोई जानकारी नहीं थी। उनको एक डॉक्टर द्वारा वीरवार सुबह एफआईआर दर्ज कराने पहुंचने पर इसकी जानकारी लगी। यह उनके अधिकार क्षेत्र का नहीं है और न ही अधिकारियों के पास रेड की प्रशासन की मंजूरी थी।
रमेश चंद्र, प्रभारी, जीआरपी, पानीपत
उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई
वर्जन-उनके पास रेड की कोई सूचना नहीं थी। उन्होंने इस बारे में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से बातचीत की है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बंद कमरे में डयूटी मजिस्टेट,डीसीओ व एलएमओ की जरूरत होती है। यह आवश्यक नहीं है कि खुले वातावरण में होने वाली रेड में डयूटी मजिस्ट्रेट की मदद ली जाएं। अगर मामले में कोई लापरवाही बरती गई है तो कड़ी कार्रवाई होगी।
डॉ.चंद्रशेखर खरे,उपायुक्त पानीपत।