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Panipat News: ब्लड बैंक शुरू करने की कवायद, अब एक डॉक्टर को दिलाया जाएगा एक साल का प्रशिक्षण
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पानीपत। तमाम प्रयासों के बाद भी सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक को शुरू करने के लिए नियमित पैथोलोजिस्ट नहीं मिला। अगर पैथोलोजिस्ट मिले तो कुछ दिन में ही अपना तबादला करवा गए। स्वास्थ्य विभाग पौने पांच साल से पैथोलॉजिस्ट, स्टाफ व संसाधनों की मांग करता आया है। इस दौरान तीन बार पैथोलॉजिस्ट मिले भी लेकिन जब तक संसाधन उपलब्ध कराए गए, तब तक इनका तबादला हो गया।
अब सिविल सर्जन ने सिविल अस्पताल के ही एक डॉक्टर को ब्लड बैंक चलाने का एक साल का प्रशिक्षण दिलाने का फैसला किया है। इस संंबंध में मुख्यालय से अनुमति भी मिल गई है। अब डिप्टी एमएस डॉ. अमित पोरिया को डॉक्टरों से चर्चा कर एक डॉक्टर का नाम प्रशिक्षण के लिए भेजने के निर्देश दिए गए हैं। डॉक्टर को प्रशिक्षण पंचकूला में दिया जाएगा।
दरअसल, मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पानीपत में नवंबर-2018 में आयोजित जन विश्वास रैली में सिविल अस्पताल में ब्लड बैंक खोले जाने की घोषणा की थी। उस समय दावा किया गया था कि बहुत जल्द मशीनरी और मैनपावर मिलेगी। लाइसेंस के लिए आवेदन किया जाएगा। घोषणा के समय दावा किया था कि अस्पताल में ब्लड कंपोनेंट जैसे प्लेटलेट्स, फ्रेश फ्रोजन प्लाजमा (एफएफपी) लाल रक्त कणिकाएं (आरबीसी), श्वेत रक्त कणिकाएं (डब्ल्यूबीसी) मिलेंगी।
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गौरतलब है कि तीन साल तक तो अस्पताल में इंफ्रास्ट्रक्चर तक तैयार नहीं किया गया। 2022 में उपकरण तो खरीद लिए गए, लेकिन इस दौरान पैथोलॉजिस्ट सुमन का तबादला हो गया था। ये प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ पाया। उधर रेडक्रास ब्लड बैंक में भी रक्त का अभाव रहता है। यहां भी कंपोनेंट मिलने में देरी हो रही है। नतीजा, सिविल अस्पताल में भर्ती होने वाली गर्भवती, मरीज और घायलों को निजी ब्लड सेंटरों की दौड़ लगानी पड़ती है। कई बार रक्त देरी से मिलने पर गर्भवतियों व मरीजों की हालत भी गंभीर हो जाती है। ब्लड बैंक शुरू होने पर प्लेटलेट्स, फ्रोजन प्लाज्मा, श्वेत रक्त कणिकाएं, लाल रक्त कणिकाएं जैसे कंपोनेंट भी मिलेंगे। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि शुरुआत में होल ब्लड ही मिलेगा। कंपोनेंट के लिए अलग से लाइसेंस लेने की जरूरत होती है।
कोट.
ब्लड बैंक का पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार है। अस्पताल में पैथोलोजिस्ट नहीं है। अब सिविल सर्जन ने एक डॉक्टर को एक साल का प्रशिक्षण दिलाने का फैसला किया है। जल्द एक डॉक्टर का नाम फाइनल कर भेजा जाएगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद फिर इस डॉक्टर के नाम पर लाइसेंस के लिए आवेदन किया जाएगा।
डॉ. अमित पोरिया, डिप्टी एमएस सिविल अस्पताल
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अब सिविल सर्जन ने सिविल अस्पताल के ही एक डॉक्टर को ब्लड बैंक चलाने का एक साल का प्रशिक्षण दिलाने का फैसला किया है। इस संंबंध में मुख्यालय से अनुमति भी मिल गई है। अब डिप्टी एमएस डॉ. अमित पोरिया को डॉक्टरों से चर्चा कर एक डॉक्टर का नाम प्रशिक्षण के लिए भेजने के निर्देश दिए गए हैं। डॉक्टर को प्रशिक्षण पंचकूला में दिया जाएगा।
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दरअसल, मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पानीपत में नवंबर-2018 में आयोजित जन विश्वास रैली में सिविल अस्पताल में ब्लड बैंक खोले जाने की घोषणा की थी। उस समय दावा किया गया था कि बहुत जल्द मशीनरी और मैनपावर मिलेगी। लाइसेंस के लिए आवेदन किया जाएगा। घोषणा के समय दावा किया था कि अस्पताल में ब्लड कंपोनेंट जैसे प्लेटलेट्स, फ्रेश फ्रोजन प्लाजमा (एफएफपी) लाल रक्त कणिकाएं (आरबीसी), श्वेत रक्त कणिकाएं (डब्ल्यूबीसी) मिलेंगी।
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गौरतलब है कि तीन साल तक तो अस्पताल में इंफ्रास्ट्रक्चर तक तैयार नहीं किया गया। 2022 में उपकरण तो खरीद लिए गए, लेकिन इस दौरान पैथोलॉजिस्ट सुमन का तबादला हो गया था। ये प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ पाया। उधर रेडक्रास ब्लड बैंक में भी रक्त का अभाव रहता है। यहां भी कंपोनेंट मिलने में देरी हो रही है। नतीजा, सिविल अस्पताल में भर्ती होने वाली गर्भवती, मरीज और घायलों को निजी ब्लड सेंटरों की दौड़ लगानी पड़ती है। कई बार रक्त देरी से मिलने पर गर्भवतियों व मरीजों की हालत भी गंभीर हो जाती है। ब्लड बैंक शुरू होने पर प्लेटलेट्स, फ्रोजन प्लाज्मा, श्वेत रक्त कणिकाएं, लाल रक्त कणिकाएं जैसे कंपोनेंट भी मिलेंगे। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि शुरुआत में होल ब्लड ही मिलेगा। कंपोनेंट के लिए अलग से लाइसेंस लेने की जरूरत होती है।
कोट.
ब्लड बैंक का पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार है। अस्पताल में पैथोलोजिस्ट नहीं है। अब सिविल सर्जन ने एक डॉक्टर को एक साल का प्रशिक्षण दिलाने का फैसला किया है। जल्द एक डॉक्टर का नाम फाइनल कर भेजा जाएगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद फिर इस डॉक्टर के नाम पर लाइसेंस के लिए आवेदन किया जाएगा।
डॉ. अमित पोरिया, डिप्टी एमएस सिविल अस्पताल