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सार्वजनिक शौचालयों में मिली गंदगी, न मिले कोड, लटके रहे ताले
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आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर शहर की सफाई को लेकर लोगों को जागरूक करने के लिए निगम द्वारा चलाया जा रहा अमृत महोत्सव अपने अभियान में ही नहीं टिक पाया है। जिन सार्वजनिक शौचालयों की सफाई व क्यूआर कोड लगाने का निगम दमखम भर रहा है, वे शौचालय अभी तक साफ नहीं हो पाए हैं। इनमें मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं। किसी में पानी नहीं है तो किसी की टॉयलेट सीट टूटी है। किसी शौचालय के बाहर ताले लगे हैं तो किसी के अंदर गंदगी की भरमार है। अभी तक शहर की कॉलोनियों में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन तो दूर की बात शहर की सड़कों पर भी गंदगी के ढेर लगे हैं।
वीरवार को नगर निगम के अमृत महोत्सव की पड़ताल के लिए शहर की कई मुख्य सड़कों पर बने सार्वजनिक शौचालयों का दौरा किया गया। जिनके हालात बदतर मिले। वहीं, निगम के अस्थायी यानी मोबाइल टॉयलेट तो दिखे ही नहीं। शहर के चौक चौराहों पर गंदगी की भरमार मिली। शहर की सफाई व्यवस्था पर हर महीने करोड़ों रुपये खर्च करने वाला निगम अमृत महोत्सव में लोगों को जागरूक करने के काम पर करीब 5 से सात लाख रुपये खर्च करने जा रहा है।
अपने ही शौचालयों की सफाई भूला निगम
खास बात ये है कि नगर निगम ताऊ देवी लाल कांपलेक्स के शौचालय ही सबसे ज्यादा खस्ताहाल हैं। यहां बाहर दो शौचालय हैं। एक पर ताला लटका मिला और दूसरा गंदगी से भरा हुआ मिला। निगम अधिकारी इन शौचालयों पर इस अभियान के तहत क्यूआर कोड लगाना तक भूल गए।
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न पानी, न साबुन, बदबूदार शौचालय
वहीं, जीटी रोड पर फ्लाईओवर के नीचे बने शौचालय का निरीक्षण किया गया तो यहां टोंटी से पानी तक नहीं आ रहा था। लाइट की सुविधा नहीं थी। सफाई न होने की वजह से बदबूदार माहौल बन चुका था। वहीं, शौचालय में साबुन या सैनिटाइजर नाम की भी कोई चीज नहीं थी। हालांकि इसके बाद भी सरकार को खुश करने के लिए निगम अधिकारी कागजों में इस सफाई अभियान को सफल बनाने की पूरी तैयारी में हैं।
35 लोकेशन पर नहीं हो पाई दो दिन में सफाई
27 सितंबर से शुरू हुए 3 अक्तूबर तक चलने वाले निगम के इस अमृत महोत्सव के दौरान निगम को 29 व 30 सितंबर को सार्वजनिक शौचालयों की सफाई करवाने का लक्ष्य मिला था। 29 व 30 को अभियान चलाया भी गया लेकिन शौचालयों की सफाई नहीं हो पाई। शहर में 35 जगहों पर सार्वजनिक शौचालय हैं। इसके अलावा करीब 10 मोबाइल टॉयलेट भी निगम के पास हैं, लेकिन ये मोबाइल टॉयलेट शहर में नजर ही नहीं आ रहे हैं।
शौचालयों की सफाई के लिए जिस एजेंसी को टेंडर दिया गया है उसे नोटिस भेजा जाएगा। इनकी सफाई करवाई जाएगी। इसके बाद फिर सुलभ एजेंसी को इन शौचालयों की सफाई का काम दिया जाएगा। सारी प्रक्रिया नियमानुसार ही की जाएगी।
आरके सिंह, आयुक्त, नगर निगम, पानीपत।
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वीरवार को नगर निगम के अमृत महोत्सव की पड़ताल के लिए शहर की कई मुख्य सड़कों पर बने सार्वजनिक शौचालयों का दौरा किया गया। जिनके हालात बदतर मिले। वहीं, निगम के अस्थायी यानी मोबाइल टॉयलेट तो दिखे ही नहीं। शहर के चौक चौराहों पर गंदगी की भरमार मिली। शहर की सफाई व्यवस्था पर हर महीने करोड़ों रुपये खर्च करने वाला निगम अमृत महोत्सव में लोगों को जागरूक करने के काम पर करीब 5 से सात लाख रुपये खर्च करने जा रहा है।
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अपने ही शौचालयों की सफाई भूला निगम
खास बात ये है कि नगर निगम ताऊ देवी लाल कांपलेक्स के शौचालय ही सबसे ज्यादा खस्ताहाल हैं। यहां बाहर दो शौचालय हैं। एक पर ताला लटका मिला और दूसरा गंदगी से भरा हुआ मिला। निगम अधिकारी इन शौचालयों पर इस अभियान के तहत क्यूआर कोड लगाना तक भूल गए।
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न पानी, न साबुन, बदबूदार शौचालय
वहीं, जीटी रोड पर फ्लाईओवर के नीचे बने शौचालय का निरीक्षण किया गया तो यहां टोंटी से पानी तक नहीं आ रहा था। लाइट की सुविधा नहीं थी। सफाई न होने की वजह से बदबूदार माहौल बन चुका था। वहीं, शौचालय में साबुन या सैनिटाइजर नाम की भी कोई चीज नहीं थी। हालांकि इसके बाद भी सरकार को खुश करने के लिए निगम अधिकारी कागजों में इस सफाई अभियान को सफल बनाने की पूरी तैयारी में हैं।
35 लोकेशन पर नहीं हो पाई दो दिन में सफाई
27 सितंबर से शुरू हुए 3 अक्तूबर तक चलने वाले निगम के इस अमृत महोत्सव के दौरान निगम को 29 व 30 सितंबर को सार्वजनिक शौचालयों की सफाई करवाने का लक्ष्य मिला था। 29 व 30 को अभियान चलाया भी गया लेकिन शौचालयों की सफाई नहीं हो पाई। शहर में 35 जगहों पर सार्वजनिक शौचालय हैं। इसके अलावा करीब 10 मोबाइल टॉयलेट भी निगम के पास हैं, लेकिन ये मोबाइल टॉयलेट शहर में नजर ही नहीं आ रहे हैं।
शौचालयों की सफाई के लिए जिस एजेंसी को टेंडर दिया गया है उसे नोटिस भेजा जाएगा। इनकी सफाई करवाई जाएगी। इसके बाद फिर सुलभ एजेंसी को इन शौचालयों की सफाई का काम दिया जाएगा। सारी प्रक्रिया नियमानुसार ही की जाएगी।
आरके सिंह, आयुक्त, नगर निगम, पानीपत।