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गिरने के बावजूद नहीं मानी हार, जीता स्वर्ण पदक

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 24 Mar 2022 02:06 AM IST
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Despite falling, did not give up, won the gold medal
पानीपत। मैराथन दौड़ की विजता खिलाड़ी वर्षा 1 लाख के चैक के साथ। - फोटो : Panipat
पानीपत। ‘तेरे गिरने में तेरी हार नहीं, तू आदमी है अवतार नहीं, गिर, उठ, चल, दौड़, फिर भाग... क्योंकि जीत संक्षिप्त है इसका कोई सार नहीं..।’ गीत की इन पंक्तियों को बड़ौली गांव की वर्षा ने सच करके दिखाया है जो राज्य स्तरीय जूनियर मैराथन चैंपियनशिप में दौड़ के दौरान गिर गई लेकिन उसने हार नहीं मानी। घुटने पर लगी चोट को नजरअंदाज कर उसने फिर दौड़ लगाई। फिर रफ्तार पकड़ते हुए 43 मिनट में 13 किलोमीटर दौड़ कर जींद के गांव उचाना में बुधवार को आयोजित राज्य स्तरीय मैराथन में स्वर्ण पदक जीता और एक लाख रुपये का इनाम जीता। यहीं नहीं सीनियर मैराथन में भी दूसरा स्थान प्राप्त किया।
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रोजाना आठ घंटे लगाती है गांव में दौड़
वर्षा ने छह साल पहले 13 वर्ष की आयु में दौड़ लगाना शुरू कर दिया था। वर्षा का लक्ष्य है कि वह दौड़ प्रतियोगिता में ओलंपिक में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतें और देश का नाम रोशन करें। वर्षा के पिता मुकेश पालीवाल ने बताया कि वह रोजाना देेखते थे कि उनकी बेटी दौड़ लगाती है। इसके बाद उन्होंने उससे कई बार पूछा कि बेटी तू रोज 10 से 12 किलोमीटर दौड़ क्यों लगाती है? इस पर उसने बताया कि दौड़ प्रतियोगिता में देश का नाम रोशन करना है। पिता का कहना है कि अब उनकी बेटी अलग अलग प्रतियोगिता में पदक पर पदक ला रही है। जिससे उनकी खुशी मिलती है। पिता मुकेश गांव में ही खेती करते हैं। कोच रवि रोजाना वर्षा को अभ्यास कराते है।
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गांव में पहुंचने पर किया भव्य स्वागत
जींद से स्वर्ण पदक जीतने के बाद गांव बड़ौली में पहुंचने पर गांव वालों ने वर्षा का फूल माला से स्वागत किया। गांव वालों का कहना है कि उन्हें बेटी वर्षा पर गर्व है कि वह मेडल जीतकर हरियाणा में उनके गांव का नाम रोशन कर रही है। वर्षा राज्य स्तरीय और जिला स्तरीय चैंपियनशिप में चार से पांच स्वर्ण पदक जीत चुकी है और ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी दौड़ में रजत पदक जीत चुकी है। अब वर्षा नगालैंड में होने वाली नेशनल चैंपियनशिप की तैयारी कर रही है। मेडल जीतकर घर जाने के बाद वर्षा ने जश्न नहीं मनाया और रोज की तरह शाम को दौड़ मारने के लिए निकल गई।
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