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Panipat News: पोर्टल में तकनीकी दिक्कत से रुकी दशमलव वाली रजिस्ट्रियां
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पानीपत। शहरी स्थानीय निकाय पोर्टल की संपत्ति कर आईडी में संपत्ति के दशमलव गजों को तहसील का पोर्टल उठा नहीं पा रहा है। जिससे विशेष तौर पर अधिकृत एरिया की खसरों नंबर वाली रजिस्ट्रियां रुकने लगी हैं। इस समस्या का हल करवाने के लिए अब लोग नगर निगम में चक्कर काट रहे हैं। जिसका समाधान निगम के पास भी नहीं है। प्रदेश भर में ये समस्या पिछले चार दिनों से बरकरार है। हालांकि तहसील अधिकारियों का कहना है कि इस समस्या का जल्द समाधान हो जाएगा।
उदाहरण के तौर पर अगर किसी के मकान या प्लाॅट की रजिस्ट्री 100.50 गज है तो इसकी रजिस्ट्री के आधार पर निगम उसकी प्रॉपर्टी आईडी भी 100.50 गज की ही बना सकता है। अब तहसील में टोकन बुक करवाने के बाद रजिस्ट्री या तो 100 गज की उठेगी या 101 गज की। यानी दशमलव के 0.50 गज नहीं उठेंगे। जिससे रजिस्ट्री रुक जाएगी। इसे ठीक करवाने के लिए अब निगम से लोगों को संपत्ति कर आईडी में दशमलव को हटवाना पड़ेगा लेकिन निगम अधिकारी दस्तावेज के आधार पर 100.50 गज की संपत्ति को 100 गज या 101 भी नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि उसका आधार पुरानी रजिस्ट्री है। जिसमें गज 100.50 हैं।
वहीं, ये समस्या खरीद फरोख्त वालों के लिए भी परेशानी बनी हुई है। जो संपत्ति का भुगतान 100.50 गज का कर रहा है तो वह 101 गज के पैसे क्यों देगा और जो 100 गज का भुगतान करेगा तो बाकी का आधा गज कौन रखेगा। ये उलझन खरीद फरोख्त करने वालों में भी हो रही है। इस समस्या का हल अब तक न तो निगम अधिकारियों के पास है और न ही तहसील अधिकारियों के पास। दूसरी खास बात ये है कि ये समस्या केवल निगम के अधिकृत एरिया में खसरे नंबर वाली रजिस्ट्रियाें में ही आ रही है।
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वर्जन-
इस बारे में नायब तहसीलदार अस्तित्व पराशर ने बताया कि ये तकनीकी समस्या है। जो पूरे प्रदेश में ही चल रही है। इसकी जानकारी मुख्यालय स्तर तक है। इसे मुख्यालय स्तर पर ही दुरुस्त किया जाएगा।
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उदाहरण के तौर पर अगर किसी के मकान या प्लाॅट की रजिस्ट्री 100.50 गज है तो इसकी रजिस्ट्री के आधार पर निगम उसकी प्रॉपर्टी आईडी भी 100.50 गज की ही बना सकता है। अब तहसील में टोकन बुक करवाने के बाद रजिस्ट्री या तो 100 गज की उठेगी या 101 गज की। यानी दशमलव के 0.50 गज नहीं उठेंगे। जिससे रजिस्ट्री रुक जाएगी। इसे ठीक करवाने के लिए अब निगम से लोगों को संपत्ति कर आईडी में दशमलव को हटवाना पड़ेगा लेकिन निगम अधिकारी दस्तावेज के आधार पर 100.50 गज की संपत्ति को 100 गज या 101 भी नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि उसका आधार पुरानी रजिस्ट्री है। जिसमें गज 100.50 हैं।
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वहीं, ये समस्या खरीद फरोख्त वालों के लिए भी परेशानी बनी हुई है। जो संपत्ति का भुगतान 100.50 गज का कर रहा है तो वह 101 गज के पैसे क्यों देगा और जो 100 गज का भुगतान करेगा तो बाकी का आधा गज कौन रखेगा। ये उलझन खरीद फरोख्त करने वालों में भी हो रही है। इस समस्या का हल अब तक न तो निगम अधिकारियों के पास है और न ही तहसील अधिकारियों के पास। दूसरी खास बात ये है कि ये समस्या केवल निगम के अधिकृत एरिया में खसरे नंबर वाली रजिस्ट्रियाें में ही आ रही है।
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इस बारे में नायब तहसीलदार अस्तित्व पराशर ने बताया कि ये तकनीकी समस्या है। जो पूरे प्रदेश में ही चल रही है। इसकी जानकारी मुख्यालय स्तर तक है। इसे मुख्यालय स्तर पर ही दुरुस्त किया जाएगा।