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Panipat News: समयसीमा बीती, पूरी नहीं हो सकी शहर के मुख्य नालों की सफाई
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जिला सचिवालय के साथ लगती ड्रेन में लगे गंदगी के ढेर। संवाद
पानीपत। मानसून की बारिश सिर पर है, लेकिन नगर निगम ड्रेन नंबर-1 और शहर के मुख्य नालों की सफाई पूरी तरह से नहीं कर पाया है। प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत में अंतर साफ नजर आ रहा है।
जिला प्रशासन ने दावा किया था कि 26 जून तक शहर के सभी बड़े नालों और ड्रेनों की सफाई का काम शत-प्रतिशत पूरा कर लिया जाएगा। लेकिन समय सीमा खत्म होने के बाद भी धरातल पर स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। हकीकत यह है कि अब तक केवल 50 प्रतिशत तक ही सफाई का काम हो पाया है। इससे मानसून की पहली ही तेज बारिश में जलभराव की चिंता सताने लगी है।
नगर निगम ने कागजों पर बाढ़ नियंत्रण की तैयारी पूरी दिखाते हुए ड्रेन नंबर-1 की सफाई के लिए करीब 44.74 लाख का टेंडर जारी किया था। इसके अलावा नोहरा ड्रेन सहित अन्य सहायक ड्रेनों की गाद निकालने के लिए करीब 56 लाख का अलग से टेंडर लगाया था। यानी एक करोड़ से अधिक का बजट पास होने के बाद भी काम कछुआ चाल से चल रहा है। उपायुक्त ने वीरवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) में उच्चाधिकारियों के सामने 90 प्रतिशत सफाई कार्य पूरा होने का दावा किया था। जबकि जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है।
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शादी आश्रम के पास थमा काम, अंदरूनी कॉलोनियों की स्थिति चिंताजनक: जीटी रोड पर शादी आश्रम के नजदीक अभी तक पानी निकासी के पुख्ता प्रबंध नहीं किए गए हैं। शहर की लाइफ लाइन कही जाने वाली ड्रेन नंबर-1 में भारी मात्रा में गाद और गंदगी जमा है। ड्रेन के जाम होने से शहर के अंदरूनी नालों का पानी आगे निकलने में परेशानी आ सकती है। इसके चलते शहर के बीचोबीच स्थित पुरानी कॉलोनियों, जलघर क्षेत्र और निचले क्षेत्रों के छोटे नालों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है। नालियां पहले से ही ओवरफ्लो हैं और स्थानीय निवासियों को डर है कि बारिश होते ही गंदा पानी उनके घरों में घुस जाएगा।
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जिला प्रशासन ने दावा किया था कि 26 जून तक शहर के सभी बड़े नालों और ड्रेनों की सफाई का काम शत-प्रतिशत पूरा कर लिया जाएगा। लेकिन समय सीमा खत्म होने के बाद भी धरातल पर स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। हकीकत यह है कि अब तक केवल 50 प्रतिशत तक ही सफाई का काम हो पाया है। इससे मानसून की पहली ही तेज बारिश में जलभराव की चिंता सताने लगी है।
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नगर निगम ने कागजों पर बाढ़ नियंत्रण की तैयारी पूरी दिखाते हुए ड्रेन नंबर-1 की सफाई के लिए करीब 44.74 लाख का टेंडर जारी किया था। इसके अलावा नोहरा ड्रेन सहित अन्य सहायक ड्रेनों की गाद निकालने के लिए करीब 56 लाख का अलग से टेंडर लगाया था। यानी एक करोड़ से अधिक का बजट पास होने के बाद भी काम कछुआ चाल से चल रहा है। उपायुक्त ने वीरवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) में उच्चाधिकारियों के सामने 90 प्रतिशत सफाई कार्य पूरा होने का दावा किया था। जबकि जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है।
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शादी आश्रम के पास थमा काम, अंदरूनी कॉलोनियों की स्थिति चिंताजनक: जीटी रोड पर शादी आश्रम के नजदीक अभी तक पानी निकासी के पुख्ता प्रबंध नहीं किए गए हैं। शहर की लाइफ लाइन कही जाने वाली ड्रेन नंबर-1 में भारी मात्रा में गाद और गंदगी जमा है। ड्रेन के जाम होने से शहर के अंदरूनी नालों का पानी आगे निकलने में परेशानी आ सकती है। इसके चलते शहर के बीचोबीच स्थित पुरानी कॉलोनियों, जलघर क्षेत्र और निचले क्षेत्रों के छोटे नालों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है। नालियां पहले से ही ओवरफ्लो हैं और स्थानीय निवासियों को डर है कि बारिश होते ही गंदा पानी उनके घरों में घुस जाएगा।