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Panipat News: बाल विवाह के खिलाफ खड़ी हो रही बेटियां, 30 प्रतिशत खुद रुकवाती हैं शादी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 25 Jan 2024 04:56 AM IST
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Daughters are standing against child marriage, 30 percent stop the marriage themselves
पानीपत। बाल विवाह जैसी कुरीति के खिलाफ अब लोग जागरूक हो रहे हैं। लड़कियां खुद इस कुरीति के खिलाफ आवाज उठा रही हैं। परिवार द्वारा उनका वैध आयु से पहले विवाह तय करने पर वो खुद महिला सरंक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी को इसकी सूचना दे रही हैं।
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आंकड़े इस बात को बताने के लिए पर्याप्त हैं कि पिछले चार साल में बाल विवाह के मामले कम हुए हैं। 2021 के मुकाबले 2023 में बाल विवाह के 40 प्रतिशत केस कम हुए हैं। 30 प्रतिशत केस में लड़की खुद अपने विवाह का विरोध करते हुए बाल विवाह निषेध अधिकारी का दरवाजा खटखटाई हैं। पिछले चार साल में पानीपत 79 बाल विवाह रुकवाए गए हैं। 22 बाल विवाह हो चुके हैं। इनकी शिकायत पुलिस के पास है। पुलिस ने इस मामले के आरोपियों पर केस दर्ज किया है।
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साल- मामले

2020 19

2021 27

2022 17

2023 16


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खेलने की उम्र में बंधन में बांध रहे
जिला महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी के कार्यालय में पहुंच रहे बाल विवाह के ज्यादातर मामलों में यह सामने आया है कि परिवार के लोग आज भी लड़की को एक जिम्मेदारी समझते हैं। लोगों की बात मानकर भी लोग बेटियों को उनके खेलने की उम्र में शादी के बंधन में बांध दे रहे हैं। जिम्मेदारी निभाने के लिए ही ज्यादातर अभिभावक बाल अवस्था में लड़की को विवाह के बंधन में बांध देते हैं। इसके अलावा लड़कियों की छोटी उम्र में ही गलत संगत में पड़ने के भय से परिजन उनका रिश्ता तय कर देते हैं। जब लड़की अपनी मर्जी से शादी नहीं होती देखकर इसकी शिकायत विभाग को देती है तो वह शादी रुक जाती है।
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दो साल की सजा व एक लाख के जुर्माने का है प्रावधान

बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत बाल विवाह करवाने के आरोप में दो साल की सजा तथा एक लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। वहीं, बाल विवाहित लड़का या लड़की बालिग होने के दो साल के अंदर अपना विवाह खारिज करवा सकता है।




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एक खर्च में दो बेटियों की करना चाहते हैं शादी : बाल विवाह निषेध अधिकारी
बाल विवाह के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ी है। कोई भी व्यक्ति 1091 नंबर पर बाल विवाह की सूचना दे सकता है। विभाग द्वारा बाल विवाह की सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह से गुप्त रखी जाती है। परिवार की आर्थिक तंगी के कारण बाल विवाह की घटनाएं हो रही हैं। अगर एक लड़की बालिग है और दूसरी नाबालिग है तो परिवार के लोग एक खर्च में विवाह निपटाने के लिए दोनों की शादी कर रहे हैं। वहीं लड़कियों के प्रति अभी लोगों की मानसिकता में ज्यादा परिवर्तन नहीं हुआ है। ज्यादातर लोग आज भी लड़की को जिम्मेदारी समझते हैं। इसलिए इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए वह जल्द से जल्द उसकी शादी करना चाहते हैं। वैसे लड़कियों की शादी करने की वैध उम्र 18 वर्ष और लड़कों की 21 वर्ष है।

रजनी गुप्ता, महिला सरंक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी
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