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स्कूलों में जुलाई माह के पहले शनिवार को मनाया जाएगा शतरंज दिवस : ढांडा
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पानीपत। प्रदेश के सरकारी व निजी स्कूलों में जुलाई महीने के पहले शनिवार को शतरंज दिवस मनाया जाएगा। इसकी घोषणा शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने शनिवार को पानीपत के कचरौली गांव स्थित राजकीय माध्यमिक विद्यालय में की। शिक्षा मंत्री का कहना है कि इससे बच्चों में खेल के साथ बुद्धि, धैर्य और निर्णय क्षमता का भी विकास होगा। विद्यालय में कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय शिक्षा विभाग के अतिरिक्त निदेशक सुनील बजाज ने की।
शिक्षा मंत्री ने विद्यालय में शतरंज बोर्ड पर प्रथम चाल चलकर शतरंज दिवस का औपचारिक उद्घाटन किया। शिक्षा मंत्री ने कहा कि शतरंज केवल एक खेल नहीं बल्कि बुद्धि, धैर्य, योजना, निर्णय क्षमता व समस्या समाधान कौशल को विकसित करने का सशक्त माध्यम है। प्रतिस्पर्धी युग में विद्यार्थियों को ऐसे बौद्धिक खेलों से जोड़ना समय की मांग है जिससे उनका मानसिक विकास भी हो सके। अध्यापकों के लिए भी शतरंज प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाए ताकि स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दिया जा सके। अगर शिक्षक मानसिक व शारीरिक रूप से स्वस्थ होंगे तो विद्यार्थी अपने आप ही स्वस्थ होंगे। उन्होंने विद्यालय प्रशासन को विद्यालय स्तर पर शतरंज क्लब गठित करने तथा नियमित शतरंज कक्षाएं आयोजित करने के निर्देश दिए।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि भविष्य में शतरंज को स्कूलों की सह-पाठ्यक्रम गतिविधि के रूप में और अधिक मजबूती से लागू किया जाएगा ताकि हर बच्चा अपनी बौद्धिक क्षमता से नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर सके। हरियाणा के बच्चे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शतरंज में राज्य का नाम रोशन कर रहे हैं। शतरंज खेल से बच्चों में धैर्य, अनुशासन और तर्क शक्ति विकसित होती है जो जीवन में सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। अतिरिक्त निदेशक सुनील बजाज ने कहा कि शतरंज दिवस के माध्यम से विद्यार्थियों को इस खेल से जोड़ने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। प्रत्येक विद्यालय में शतरंज क्लब का गठन कर नियमित अभ्यास व प्रतियोगिताएं सुनिश्चित की जाएंगी ताकि ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में छुपी हुई प्रतिभाओं को सामने लाया जा सके। शतरंज कार्यशालाएं विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने शतरंज की बुनियादी तकनीक, ओपनिंग ट्रिक्स व रणनीति पर विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया। विद्यालय द्वारा बच्चों को पुरस्कार वितरित कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। इस अवसर पर जिला शिक्षा अधिकारी राकेश बूरा व खंड शिक्षा अधिकारी विक्रम सहरावत उपस्थित रहे।
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शिक्षा मंत्री ने विद्यालय में शतरंज बोर्ड पर प्रथम चाल चलकर शतरंज दिवस का औपचारिक उद्घाटन किया। शिक्षा मंत्री ने कहा कि शतरंज केवल एक खेल नहीं बल्कि बुद्धि, धैर्य, योजना, निर्णय क्षमता व समस्या समाधान कौशल को विकसित करने का सशक्त माध्यम है। प्रतिस्पर्धी युग में विद्यार्थियों को ऐसे बौद्धिक खेलों से जोड़ना समय की मांग है जिससे उनका मानसिक विकास भी हो सके। अध्यापकों के लिए भी शतरंज प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाए ताकि स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दिया जा सके। अगर शिक्षक मानसिक व शारीरिक रूप से स्वस्थ होंगे तो विद्यार्थी अपने आप ही स्वस्थ होंगे। उन्होंने विद्यालय प्रशासन को विद्यालय स्तर पर शतरंज क्लब गठित करने तथा नियमित शतरंज कक्षाएं आयोजित करने के निर्देश दिए।
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शिक्षा मंत्री ने कहा कि भविष्य में शतरंज को स्कूलों की सह-पाठ्यक्रम गतिविधि के रूप में और अधिक मजबूती से लागू किया जाएगा ताकि हर बच्चा अपनी बौद्धिक क्षमता से नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर सके। हरियाणा के बच्चे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शतरंज में राज्य का नाम रोशन कर रहे हैं। शतरंज खेल से बच्चों में धैर्य, अनुशासन और तर्क शक्ति विकसित होती है जो जीवन में सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। अतिरिक्त निदेशक सुनील बजाज ने कहा कि शतरंज दिवस के माध्यम से विद्यार्थियों को इस खेल से जोड़ने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। प्रत्येक विद्यालय में शतरंज क्लब का गठन कर नियमित अभ्यास व प्रतियोगिताएं सुनिश्चित की जाएंगी ताकि ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में छुपी हुई प्रतिभाओं को सामने लाया जा सके। शतरंज कार्यशालाएं विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने शतरंज की बुनियादी तकनीक, ओपनिंग ट्रिक्स व रणनीति पर विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया। विद्यालय द्वारा बच्चों को पुरस्कार वितरित कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। इस अवसर पर जिला शिक्षा अधिकारी राकेश बूरा व खंड शिक्षा अधिकारी विक्रम सहरावत उपस्थित रहे।
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