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व्यापारी होना चाहते है कैशलेस, लेकिन स्वैप मशीन का चार्ज आ रहा आड़े
अमर उजाला ब्यूरो, पानीपत।
Updated Thu, 29 Dec 2016 12:10 AM IST
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बाजार
- फोटो : पानीपत
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अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। प्रधानमंत्री की पहले नोटबंदी और फिर कैशलेस इकॉनोमी को अपनाने की घोषणा के बाद बाजार अर्श से फर्श पर आ गया है। सरकारी विभाग भी पूरी तरह से कैशलेस इकॉनोमी को अब तक नहीं अपना सके हैं। यहां पर आज भी कैश से ही काम हो रहा है। बाजार के दुकानदार स्वैप मशीन अपनाना तो चाहते हैं, लेकिन उनके सामने बैंकों का हर बिल पर टैक्स काटना बड़ी समस्या है। ग्राहक ये टैक्स देने को राजी नहीं है और बैंक टैक्स के बिना कोई काम नहीं कर रहा। लोगों के पास कैश नहीं है। इस वजह से बाजारों में भी सन्नाटा है। करोड़ों रुपये का बाजार आज रोजी रोटी कमाने तक सिमट गया है।
प्रधानमंत्री की नोटबंदी को पूरे 50 दिन हो गए हैं। प्रधानमंत्री ने देश की जनता से 50 दिन तक साथ मांगा था। इसके बाद देश की तस्वीर बदल जाने का दावा किया था। बुधवार को प्रधानमंत्री की घोषणा के 50 दिन पूरे हो गए। अमर उजाला माई सिटी की टीम इन घोषणाओं और वादों की हकीकत जानने बाजार और सरकारी कार्यालयों में पहुंची तो वहंा सब पुराने ढर्रे पर मिला। न तो सरकारी विभागों में कैशलेस इकॉनोमी के प्रबंध मिले और न बाजारों में ही कोई विशेष व्यवस्था दिखी। बाजार में ग्राहक भी कम ही दिखाई दिए। हां, हर ओर दुकानदारों के मायूस चेहरे जरूर दिखाई दिए।
सरकारी विभागों में कैश पर काम
सरकारी तंत्र नोटबंदी के बाद आए कैशलेस ट्रांजेक्शन अपनाने के लिए जनता को जागरूक कर रहा है। लेकिन, खुद इसको अपनाने के लिए तैयार नहीं हैं। जिले में शायद ही किसी विभाग में कैशलेस सिस्टम अपनाया गया हो। राजस्व विभाग, वाहन पंजीकरण शाखा और पुलिस की चालान ब्रांच आदि जगह कैश पर ही काम हो रहा है। हालां,कि उपायुक्त लोगों को कैशलेस सिस्टम अपनाने की बार-बार हिदायत दे चुके हैं। दूसरी बड़ी दिक्कत निजी अस्पतालों में है। यहां पर मरीजों से चेक तक नहीं लिए जा रहे। उन पर कैश लाने का दबाव बनाया जा रहा है।
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बाजारों में पसरा सन्नाटा
नोटबंदी के बाद सबसे पतली हालात बाजारों की है। कंबल और शॉल मार्केट में ग्राहक नहीं है। दूसरे बाजारों में भी गिनती के ग्राहक ही पहुंच रहे हैं। कुछ दुकानदारों ने कैशलेस ट्रांजेक्शन को लेकर स्वैप मशीन और पे-टीएम को अपनाया था, लेकिन हर बिल पर टैक्स कटने से ग्राहक पीछे हट गए। ऐसे में दुकानदारों ने भी इसको नजरअंदाज कर दिया। पे-टीएम भी लोगों के हाथ में कुछ कैश आने पर ठप हो गए। बाजार के दुकानदार पूरे दिन ग्राहकों का इंतजार कर शाम को लगभग खाली हाथ लौट रहे हैं।
यह है स्वैप मशीन न अपनाने का कारण
स्वैप मशीन पर हर बिल पर दुकानदारों को सवा प्रतिशत टैक्स देना पड़ता है। यह सिर्फ 31 दिसंबर तक ही टैक्स फ्री है। एक जनवरी से इस पर चार्ज लगना शुरू हो जाएगा। दुकानदार इस चार्ज को अपनी जेब से देने की बजाय ग्राहक से ही लेता है। ग्राहक इस टैक्स को नहीं देता। यदि दुकानदार दबाव बनाता है तो ग्राहक सामान वापस करने के लिए कहने लगते हैं। इससे बाजार 50 दिनों में भी कैशलेस नहीं हो सके हैं। हरियाणा डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन के प्रधान राकेश गर्ग ने बताया कि नोटबंदी के 50 दिनों में जिले का व्यापार गिरकर 20 प्रतिशत पर आ गया है। इसमें से भी अधिकतर माल उधार में दिया गया है। नोटबंदी के कारण बाजार में चेक से पेमेंट अधिक हुआ है। व्यापार में पहले चेक से भुगतान करीब पांच प्रतिशत ही था। यह इस दौरान 25 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
कैश की समस्या नहीं हो रही कम
नोटबंदी को 50 दिन पूरे होने के बाद भी लोगों की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रहीं। जिले के लोग 50 दिन बाद भी बैंकों में कैश लेने के लाइनों में खड़े है। बैंकों और एटीएम के बाहर की लाइन कम नहीं हो रही। कई बैंकों के बाहर तो तड़के से लाइन लगने लगती है। हालांकि, जिले के जीटी रोड स्थित एसबीआई बैंक की चेस्ट में 180 करोड़ रुपये कुछ दिन पहले पहुंचे हैं। इसके बाद लोगों को उम्मीद थी कि उन्हें पर्याप्त कैश मिल जाएगा, लेकिन यह परेशानी अब तक कम नहीं हुई है।
फोटो कोट्स
हरियाणा डिस्ट्रीब्यूटर के प्रधान राकेश गर्ग ने बताया कि व्यापारी कैशलेस होना चाहते है, लेकिन स्वैप मशीन से ट्रांजेक्शन पर हर बिल पर सवा प्रतिशत हर टैक्स देना पड़ता है। दुकानदार खुद टैक्स देता है, तो उसका मुनाफा कम होता है। यदि ग्राहक से लेता है तो वह खरीदे गए सामान को लौटाने लगता है।
फोटो कोट्स
चौड़ा बाजार के प्रधान सुरेश बवेजा ने बताया कि 50 दिनों में बाजार का काम बिल्कुल ठप रहा। जो काम हुआ वह सिर्फ उधार में सामान देकर किया गया। एक बार उधार लेने वाला भी बाजार में ग्राहक नहीं था। 50 दिन पूरे हो चुके हैं। अब देखते है कि बाजार चल पाते है या मंदी छाई रहती है।
फोटो कोट्स
देवी मंदिर रोड मार्केट एसोसिएशन के चेयरमैन राजकुमार ने बताया कि 50 दिनों के भीतर कई बार तो ऐसा लगने लगा था कि कभी पानीपत के 25 प्रतिशत बाजार शायद बंद ना करने पड़ जाए। बाजार मेें बहुत अधिक मंदी आ गई थी। लेकिन, अब धीरे-धीरे काम लाइन पर आता दिखाई दे रहा है।
फोटो कोट्स
इंसार बाजार के प्रधान प्रेम कुमार ने बताया कि 50 दिन बाद भी बाजार खाली है। बाजार में दुकानदार कैशलेस होना चाहते हैं, लेकिन मशीन का रेंट, सर्विस चार्ज और हर कार्ड पर टैक्स देने के कारण ग्राहक इसका उपयोग नहीं कर रहा। इससे बाजार कैशलेस नहीं हो पा रहे है। मंदी का भी यही कारण है।
फोटो कोट्स
लाल बत्ती मार्केट के प्रधान गोरव लिखा ने बताया कि अब सिर्फ अच्छे दिनों का इंतजार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अच्छे दिन लाने की बात कहकर ही जनता से 50 दिन मांगे थे। जनता ने भी उन्हें खुशी-खुशी ये दिन दे दिए। इसके बाद बाजार भी 50 दिन बेरोजगार रहे। अभी तक मंदी छाई हुई है।
वर्जन
जिले में लगी स्वैप मशीन पर से टैक्स लिया जा रहा है। अभी 31 दिसंबर तक स्वैप मशीन टैक्स फ्री है। संभावना है कि मशीनों की टैक्स फ्री सुविधा को एक्सटेंड कर 31 मार्च 2017 तक कर दिया जा सकता है। अभी बैंकों के पास ही मशीनें कम हैं। जब मशीनों की संख्या बढ़ जाएगी तो स्वैप मशीनों को पूरी तरह से टैक्स फ्री भी किया जा सकता है।
राकेश वर्मा, एलडीएम, पानीपत।
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पानीपत। प्रधानमंत्री की पहले नोटबंदी और फिर कैशलेस इकॉनोमी को अपनाने की घोषणा के बाद बाजार अर्श से फर्श पर आ गया है। सरकारी विभाग भी पूरी तरह से कैशलेस इकॉनोमी को अब तक नहीं अपना सके हैं। यहां पर आज भी कैश से ही काम हो रहा है। बाजार के दुकानदार स्वैप मशीन अपनाना तो चाहते हैं, लेकिन उनके सामने बैंकों का हर बिल पर टैक्स काटना बड़ी समस्या है। ग्राहक ये टैक्स देने को राजी नहीं है और बैंक टैक्स के बिना कोई काम नहीं कर रहा। लोगों के पास कैश नहीं है। इस वजह से बाजारों में भी सन्नाटा है। करोड़ों रुपये का बाजार आज रोजी रोटी कमाने तक सिमट गया है।
प्रधानमंत्री की नोटबंदी को पूरे 50 दिन हो गए हैं। प्रधानमंत्री ने देश की जनता से 50 दिन तक साथ मांगा था। इसके बाद देश की तस्वीर बदल जाने का दावा किया था। बुधवार को प्रधानमंत्री की घोषणा के 50 दिन पूरे हो गए। अमर उजाला माई सिटी की टीम इन घोषणाओं और वादों की हकीकत जानने बाजार और सरकारी कार्यालयों में पहुंची तो वहंा सब पुराने ढर्रे पर मिला। न तो सरकारी विभागों में कैशलेस इकॉनोमी के प्रबंध मिले और न बाजारों में ही कोई विशेष व्यवस्था दिखी। बाजार में ग्राहक भी कम ही दिखाई दिए। हां, हर ओर दुकानदारों के मायूस चेहरे जरूर दिखाई दिए।
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सरकारी तंत्र नोटबंदी के बाद आए कैशलेस ट्रांजेक्शन अपनाने के लिए जनता को जागरूक कर रहा है। लेकिन, खुद इसको अपनाने के लिए तैयार नहीं हैं। जिले में शायद ही किसी विभाग में कैशलेस सिस्टम अपनाया गया हो। राजस्व विभाग, वाहन पंजीकरण शाखा और पुलिस की चालान ब्रांच आदि जगह कैश पर ही काम हो रहा है। हालां,कि उपायुक्त लोगों को कैशलेस सिस्टम अपनाने की बार-बार हिदायत दे चुके हैं। दूसरी बड़ी दिक्कत निजी अस्पतालों में है। यहां पर मरीजों से चेक तक नहीं लिए जा रहे। उन पर कैश लाने का दबाव बनाया जा रहा है।
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नोटबंदी के बाद सबसे पतली हालात बाजारों की है। कंबल और शॉल मार्केट में ग्राहक नहीं है। दूसरे बाजारों में भी गिनती के ग्राहक ही पहुंच रहे हैं। कुछ दुकानदारों ने कैशलेस ट्रांजेक्शन को लेकर स्वैप मशीन और पे-टीएम को अपनाया था, लेकिन हर बिल पर टैक्स कटने से ग्राहक पीछे हट गए। ऐसे में दुकानदारों ने भी इसको नजरअंदाज कर दिया। पे-टीएम भी लोगों के हाथ में कुछ कैश आने पर ठप हो गए। बाजार के दुकानदार पूरे दिन ग्राहकों का इंतजार कर शाम को लगभग खाली हाथ लौट रहे हैं।
यह है स्वैप मशीन न अपनाने का कारण
स्वैप मशीन पर हर बिल पर दुकानदारों को सवा प्रतिशत टैक्स देना पड़ता है। यह सिर्फ 31 दिसंबर तक ही टैक्स फ्री है। एक जनवरी से इस पर चार्ज लगना शुरू हो जाएगा। दुकानदार इस चार्ज को अपनी जेब से देने की बजाय ग्राहक से ही लेता है। ग्राहक इस टैक्स को नहीं देता। यदि दुकानदार दबाव बनाता है तो ग्राहक सामान वापस करने के लिए कहने लगते हैं। इससे बाजार 50 दिनों में भी कैशलेस नहीं हो सके हैं। हरियाणा डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन के प्रधान राकेश गर्ग ने बताया कि नोटबंदी के 50 दिनों में जिले का व्यापार गिरकर 20 प्रतिशत पर आ गया है। इसमें से भी अधिकतर माल उधार में दिया गया है। नोटबंदी के कारण बाजार में चेक से पेमेंट अधिक हुआ है। व्यापार में पहले चेक से भुगतान करीब पांच प्रतिशत ही था। यह इस दौरान 25 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
कैश की समस्या नहीं हो रही कम
नोटबंदी को 50 दिन पूरे होने के बाद भी लोगों की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रहीं। जिले के लोग 50 दिन बाद भी बैंकों में कैश लेने के लाइनों में खड़े है। बैंकों और एटीएम के बाहर की लाइन कम नहीं हो रही। कई बैंकों के बाहर तो तड़के से लाइन लगने लगती है। हालांकि, जिले के जीटी रोड स्थित एसबीआई बैंक की चेस्ट में 180 करोड़ रुपये कुछ दिन पहले पहुंचे हैं। इसके बाद लोगों को उम्मीद थी कि उन्हें पर्याप्त कैश मिल जाएगा, लेकिन यह परेशानी अब तक कम नहीं हुई है।
फोटो कोट्स
हरियाणा डिस्ट्रीब्यूटर के प्रधान राकेश गर्ग ने बताया कि व्यापारी कैशलेस होना चाहते है, लेकिन स्वैप मशीन से ट्रांजेक्शन पर हर बिल पर सवा प्रतिशत हर टैक्स देना पड़ता है। दुकानदार खुद टैक्स देता है, तो उसका मुनाफा कम होता है। यदि ग्राहक से लेता है तो वह खरीदे गए सामान को लौटाने लगता है।
फोटो कोट्स
चौड़ा बाजार के प्रधान सुरेश बवेजा ने बताया कि 50 दिनों में बाजार का काम बिल्कुल ठप रहा। जो काम हुआ वह सिर्फ उधार में सामान देकर किया गया। एक बार उधार लेने वाला भी बाजार में ग्राहक नहीं था। 50 दिन पूरे हो चुके हैं। अब देखते है कि बाजार चल पाते है या मंदी छाई रहती है।
फोटो कोट्स
देवी मंदिर रोड मार्केट एसोसिएशन के चेयरमैन राजकुमार ने बताया कि 50 दिनों के भीतर कई बार तो ऐसा लगने लगा था कि कभी पानीपत के 25 प्रतिशत बाजार शायद बंद ना करने पड़ जाए। बाजार मेें बहुत अधिक मंदी आ गई थी। लेकिन, अब धीरे-धीरे काम लाइन पर आता दिखाई दे रहा है।
फोटो कोट्स
इंसार बाजार के प्रधान प्रेम कुमार ने बताया कि 50 दिन बाद भी बाजार खाली है। बाजार में दुकानदार कैशलेस होना चाहते हैं, लेकिन मशीन का रेंट, सर्विस चार्ज और हर कार्ड पर टैक्स देने के कारण ग्राहक इसका उपयोग नहीं कर रहा। इससे बाजार कैशलेस नहीं हो पा रहे है। मंदी का भी यही कारण है।
फोटो कोट्स
लाल बत्ती मार्केट के प्रधान गोरव लिखा ने बताया कि अब सिर्फ अच्छे दिनों का इंतजार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अच्छे दिन लाने की बात कहकर ही जनता से 50 दिन मांगे थे। जनता ने भी उन्हें खुशी-खुशी ये दिन दे दिए। इसके बाद बाजार भी 50 दिन बेरोजगार रहे। अभी तक मंदी छाई हुई है।
वर्जन
जिले में लगी स्वैप मशीन पर से टैक्स लिया जा रहा है। अभी 31 दिसंबर तक स्वैप मशीन टैक्स फ्री है। संभावना है कि मशीनों की टैक्स फ्री सुविधा को एक्सटेंड कर 31 मार्च 2017 तक कर दिया जा सकता है। अभी बैंकों के पास ही मशीनें कम हैं। जब मशीनों की संख्या बढ़ जाएगी तो स्वैप मशीनों को पूरी तरह से टैक्स फ्री भी किया जा सकता है।
राकेश वर्मा, एलडीएम, पानीपत।