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मंदिरों में आज धूमधाम से मनाया जाएगा गुरु पूर्णिमा महोत्सव

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 23 Jul 2021 01:18 AM IST
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Auspicious combination of Sarvartha Siddhi and Preeti Yoga being made on Guru Purnima
पानीपत। पंडित राधे राधे - फोटो : Panipat
मंदिरों में शुक्रवार को धूमधाम से गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास की पूर्णिमा 23 जुलाई शुक्रवार को सुबह 10 बजकर 44 मिनट से शुरू होगी, जो 24 जुलाई की सुबह 08 बजकर 07 म िनट तक रहेगी। इस बार पूर्णिमा दो तिथियों में आने के कारण 23 व 24 जुलाई को गुरु पूजा पर्व मनाया जाएगा। पंडित राधे-राधे महाराज ने बताया कि गुरु पूर्णिमा पूजा के लिए सूर्योदय के बाद त्रिमुहूर्त व्यापिनी आषाढ़ पूर्णिमा होना आवश्यक है। पूर्णिमा तिथि यदि 3 मुहूर्त से कम हो तो यह पर्व पहले दिन मनाया जाएगा। हरियाणा पंजाब में गुरु पूर्णिमा 23 जुलाई को मनाई जाएगी। पूर्णिमा तिथि का व्रत 23 जुलाई को होगा तथा स्नान-दान 24 जुलाई को होगा। वहीं, उदया तिथि में पूर्णिमा मनाए जाने के कारण दूसरे कई राज्यों में यह 24 जुलाई को मनाई जाएगी। 25 जुलाई को सावन मास की शुरूआत होगी।
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गुरु पूर्णिमा या आषाढ़ पूर्णिमा के दिन सर्वार्थ सिद्धि और प्रीति योग का शुभ संयोग बन रहा है। 24 जुलाई को सुबह 6 बजकर 12 मिनट से प्रीति योग लगेगा, जो कि 25 जुलाई की सुबह 03 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। इस दिन दोपहर 12 बजकर 40 मिनट से अगले दिन 25 जुलाई को सुबह 05 बजकर 39 मिनट तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। ये दोनों योग शुभ कार्यों की सिद्धि के लिए उत्तम माने जाते हैं। हालांकि आषाढ़ या गुरु पूर्णिमा के दिन राहुकाल सुबह 09 बजकर 03 मिनट से सुबह 10 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। इस दौरान शुभ कार्यों की मनाही होती है। आषाढ़ पूर्णिमा का व्रत रखने के साथ ही भक्त भगवान विष्णु की आराधना करते हैं और सत्यनारायण कथा का पाठ या श्रवण करते हैं।
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अध्ययन के लिए उपयुक्त है वर्षा ऋतु
गुरु पूर्णिमा वर्षा ऋतु के आरंभ में आती है। इस दिन से चार महीने तक परिव्राजक साधु-संत एक ही स्थान पर रहकर ज्ञान की गंगा बहाते हैं। ये चार महीने मौसम की दृष्टि से भी सर्वश्रेष्ठ होते हैं। न अधिक गर्मी और न अधिक सर्दी। इसलिए अध्ययन के लिए उपयुक्त माने गए हैं। जैसे सूर्य के ताप से तप्त भूमि को वर्षा से शीतलता एवं फसल पैदा करने की शक्ति मिलती है, वैसे ही गुरु के चरणों में उपस्थित साधकों को ज्ञान, शांति, भक्ति और योग शक्ति प्राप्त करने की शक्ति मिलती है।
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