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Panipat News: छह माह में 78 तस्कर दबोचे फिर भी नहीं टूटा नशे के कारोबार का नेटवर्क

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 30 Jun 2025 06:05 AM IST
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78 smugglers were arrested in six months but the network of drug trade is still not broken
पानीपत। औद्योगिक नगरी पानीपत में नशा तस्करी के नेटवर्क की जड़ें बहुत गहरी हो चुकी हैं। जिले से दिल्ली एनसीआर, पंजाब से लेकर यूपी, उड़ीसा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश तक नशा तस्करों का जाल फैला हुआ है।
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पिछले छह माह में पानीपत पुलिस 78 नशा तस्करों को गिरफ्तार कर चुकी है। इसके बावजूद भी पुलिस नशा तस्करों का नेटवर्क तोड़ने में नाकाम साबित हुई।
पुलिस टीमें छोटे-छोटे पैडलर्स तक ही पहुंच पा रही है। बड़े सप्लायर तक पुलिस के हाथ नहीं पहुंच पा रहे। औद्योगिक शहर होने के कारण पानीपत में दूसरे प्रदेशों के प्रवासी मजदूर बड़ी संख्या में रहते हैं।
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यहां पर पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, बंगाल तक के तीन लाख से अधिक प्रवासी मजदूर फैक्टरियों में काम करते हैं। जिले की एक सीमा उत्तर प्रदेश से लगती है। वहीं, दिल्ली भी यहां से नजदीक हैं। जिस कारण नशा तस्करों के लिए पानीपत जिला हॉट स्पॉट बन गया है। प्रवासी मजदूर होने के कारण पानीपत में मादक पदार्थों की खपत भी अच्छी खासी है। जिले में नशे के लिए सबसे अधिक प्रयोग गांजा का हो रहा है। यही कारण है कि जिले में गांजा की सप्लाई भी तेजी से बढ़ी है। उड़ीसा, बिहार और राजस्थान से यह खेप गांजा की खेप पानीपत पहुंच रही हैं।
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पुलिस का दावा है कि जनवरी से अब तक पुलिस ने जिले में एनडीपीएस के 53 मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इनमें 78 नशा तस्करों को जेल भेजा जा चुका है। जिसमें 83.96 किग्रा गांजा, 2.88 किग्रा अफीम, 11.12 किग्रा चरस, 59.90 किग्रा पॉपी हस्क, 856 ग्राम स्मैक, 438 ग्राम हेरोइन व 56 नशीले प्रतिबंधित इंजेक्शन बरामद किए गए हैं।
तीन से चार हजार में मिल जाते हैं पैडलर्स : पानीपत पुलिस का दावा है कि नशा तस्करों ने नशे की लत में पड़ने वाले युवकों को ही तस्करी में शामिल कर लिया है। जो युवा नशे की लत में पड़ जाता है वह खर्च चलाने के लिए तस्करी करने लगता है।

इसके लिए वह एक स्थान से दूसरे स्थान पर तस्करी करने के लिए तीन से चार हजार रुपये लेता है। जिससे उसकी नशे की लत पूरी हो जाती है। जब पुलिस उसे गिरफ्तार कर लेती है तो तस्कर दूसरे युवक को यह काम सौंप देते हैं। जिससे तस्करी का नेटवर्क लगातार चलता रहता है।
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