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वारदात में अपहरण की धारा ना जोड़ने व लूट की धारा हटाने पर पीड़ित ने एडीजीपी से लगाई न्याय की गुहार
Updated Sun, 23 Sep 2018 12:29 AM IST
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डीएसपी समालखा के बाद अब डीएसपी क्राइम पर लगे आरोपों की जांच
वारदात में अपहरण की धारा न जोड़ने व लूट की धारा हटाने पर पीड़ित ने एडीजीपी से लगाई न्याय की गुहार
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। पुलिस प्रशासन की लापरवाही का एक और नया मुकदमा सामने आया है। इस मामले में पुलिस डीएसपी व सीआईए प्रभारी की अपहरण व लूट के आरोपियों से मिलीभगत कर आरोपियों को छोड़ने व मुकदमे में धाराओं के साथ छेड़छाड़ करने के आरोप लगाए हैं। इसी की शिकायत लेकर पीड़ित ने एडीजीपी नवदीप सिंह विर्क से न्याय की गुहार लगाई है। विर्क ने उचित कार्रवाई का आश्वासन देते हुए मामले की जांच एसपी पानीपत मनबीर सिंह को सौंप दी। गौरतलब है कि अपराधियों के साथ मिलीभगत कर पीड़ित के साथ अन्याय करने पर डीएसपी समालखा नरेश अहलावत पर भी हाल ही में मुकदमा दर्ज हुआ था।
देशराज कॉलोनी निवासी अरविंद कुमार ने एडीजीपी को दी शिकायत में बताया कि 19 जुलाई को उसका सात बदमाशों ने अपहरण कर लिया। अपहरण कर उसे कॉलोनी के ही एक ऑफिस में ले गए। वहां ले जाने के बाद बदमाशों ने उसके साथ मारपीट की व उसकी जेब से 2700 रुपये लूट लिए। इस मामले की शिकायत उसने थाना किला पुलिस को दी। पुलिस की ओर से मामला सीआईए-टू पुलिस व क्राइम डीएसपी के पास चला गया। इसमें पीड़ित ने डीएसपी राजेश फौगाट व सीआईए-टू प्रभारी योगेश कटारिया पर आरोपियों से रिश्वत लेकर मुकदमे की धाराओं के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। पीड़ित ने आरोप है कि डीएसपी व सीआइए-टू प्रभारी ने मुकदमे में अपहरण की धारा नहीं जोड़ी। साथ ही दर्ज मुकदमे में से लूट की धारा को मिलीभगत कर हटा दिया। इतना ही नहीं सीआईए टू प्रभारी योगेश कटारिया ने पीड़ित के व्हाट्सएप नंबर से एक झूठी चैटिंग भी तैयार की। इसमें पीड़ित का कहना है कि उसके व्हाट्सएप नंबर का बैकअप निकलवा कर सच्चाई को सामने लाया जा सकता है। पीड़ित ने बताया कि 19 सितंबर सेशन कोर्ट की अग्रिम जमानत के बाद से सभी आरोपी फरार है।
17 सितंबर रात 8 बजे सातों आरोपियों ने पीड़ित के घर के बाहर बाइक पर सवार होकर चक्कर लगाए। जिस से डरकर पीड़ित ने आईजी करनाल के ऑफिस में फोन किया। उन्होंने सीआईए वन को फोन करने के बारे में कहा। सीआईए वन ने एसएचओ किला को फोन करने के लिए कहा। रात 9 बजे एसएचओ थाना किला को फोन किया तो, एसएचओ ने कहा कि डीएसपी राजेश फौगाट ने सीआईए-टू की जांच को सही ठहरा दिया। इसलिए अब उन आरोपियों को नहीं पकड़ सकते, न ही उनके खिलाफ कोई एक्शन ले सकते हैं। पीड़ित का आरोप है कि आरोपी उन्हें पुलिस महकमे में उच्च स्तर तक की पहुंच होने की धमकी देते हैं। एसपी को लिखित शिकायत पत्र में पीड़ित ने लिखा कि वह मामले की दूसरे जिले के बड़े अधिकारी से जांच करवाएं। अगर उनकी जांच रिपोर्ट में पीड़ित गलत साबित होता है तो उस पर कानूनी कार्रवाई कर मुकदमा दर्ज किया जाए। पीड़ित ने बताया कि उसे आरोपियों से जान मान का भय है, साथ ही उसके परिवार वालों को भी आरोपियों से खतरा है।
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मामले की जांच के आदेश वरिष्ठ अधिकारी को सौंप दी गई है। इसको गोपनीय रखा गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद मामले में कार्रवाई की जाएगी।
- नवदीप सिंह विर्क, एडीजीपी
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डीएसपी समालखा के बाद अब डीएसपी क्राइम पर लगे आरोपों की जांच
वारदात में अपहरण की धारा न जोड़ने व लूट की धारा हटाने पर पीड़ित ने एडीजीपी से लगाई न्याय की गुहार
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। पुलिस प्रशासन की लापरवाही का एक और नया मुकदमा सामने आया है। इस मामले में पुलिस डीएसपी व सीआईए प्रभारी की अपहरण व लूट के आरोपियों से मिलीभगत कर आरोपियों को छोड़ने व मुकदमे में धाराओं के साथ छेड़छाड़ करने के आरोप लगाए हैं। इसी की शिकायत लेकर पीड़ित ने एडीजीपी नवदीप सिंह विर्क से न्याय की गुहार लगाई है। विर्क ने उचित कार्रवाई का आश्वासन देते हुए मामले की जांच एसपी पानीपत मनबीर सिंह को सौंप दी। गौरतलब है कि अपराधियों के साथ मिलीभगत कर पीड़ित के साथ अन्याय करने पर डीएसपी समालखा नरेश अहलावत पर भी हाल ही में मुकदमा दर्ज हुआ था।
देशराज कॉलोनी निवासी अरविंद कुमार ने एडीजीपी को दी शिकायत में बताया कि 19 जुलाई को उसका सात बदमाशों ने अपहरण कर लिया। अपहरण कर उसे कॉलोनी के ही एक ऑफिस में ले गए। वहां ले जाने के बाद बदमाशों ने उसके साथ मारपीट की व उसकी जेब से 2700 रुपये लूट लिए। इस मामले की शिकायत उसने थाना किला पुलिस को दी। पुलिस की ओर से मामला सीआईए-टू पुलिस व क्राइम डीएसपी के पास चला गया। इसमें पीड़ित ने डीएसपी राजेश फौगाट व सीआईए-टू प्रभारी योगेश कटारिया पर आरोपियों से रिश्वत लेकर मुकदमे की धाराओं के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। पीड़ित ने आरोप है कि डीएसपी व सीआइए-टू प्रभारी ने मुकदमे में अपहरण की धारा नहीं जोड़ी। साथ ही दर्ज मुकदमे में से लूट की धारा को मिलीभगत कर हटा दिया। इतना ही नहीं सीआईए टू प्रभारी योगेश कटारिया ने पीड़ित के व्हाट्सएप नंबर से एक झूठी चैटिंग भी तैयार की। इसमें पीड़ित का कहना है कि उसके व्हाट्सएप नंबर का बैकअप निकलवा कर सच्चाई को सामने लाया जा सकता है। पीड़ित ने बताया कि 19 सितंबर सेशन कोर्ट की अग्रिम जमानत के बाद से सभी आरोपी फरार है।
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17 सितंबर रात 8 बजे सातों आरोपियों ने पीड़ित के घर के बाहर बाइक पर सवार होकर चक्कर लगाए। जिस से डरकर पीड़ित ने आईजी करनाल के ऑफिस में फोन किया। उन्होंने सीआईए वन को फोन करने के बारे में कहा। सीआईए वन ने एसएचओ किला को फोन करने के लिए कहा। रात 9 बजे एसएचओ थाना किला को फोन किया तो, एसएचओ ने कहा कि डीएसपी राजेश फौगाट ने सीआईए-टू की जांच को सही ठहरा दिया। इसलिए अब उन आरोपियों को नहीं पकड़ सकते, न ही उनके खिलाफ कोई एक्शन ले सकते हैं। पीड़ित का आरोप है कि आरोपी उन्हें पुलिस महकमे में उच्च स्तर तक की पहुंच होने की धमकी देते हैं। एसपी को लिखित शिकायत पत्र में पीड़ित ने लिखा कि वह मामले की दूसरे जिले के बड़े अधिकारी से जांच करवाएं। अगर उनकी जांच रिपोर्ट में पीड़ित गलत साबित होता है तो उस पर कानूनी कार्रवाई कर मुकदमा दर्ज किया जाए। पीड़ित ने बताया कि उसे आरोपियों से जान मान का भय है, साथ ही उसके परिवार वालों को भी आरोपियों से खतरा है।
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मामले की जांच के आदेश वरिष्ठ अधिकारी को सौंप दी गई है। इसको गोपनीय रखा गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद मामले में कार्रवाई की जाएगी।
- नवदीप सिंह विर्क, एडीजीपी