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70 उद्योगों व अस्पतालों ने एनओसी के लिए किया अप्लाई
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पानीपत। केंद्रीय भूजल प्राधिकरण की सख्ती के बाद अब उद्योगों, अस्पतालों, डेयरियों, डिस्टलरी समेत तमाम संस्थान हरकत में आए हैं। अब शहर की औद्योगिक इकाइयों ने भूजल निकालने के लिए केंद्रीय भूजल प्राधिकरण में एनओसी के लिए अप्लाई करना शुरू कर दिया है। अब तक 70 औद्योगिक इकाइयों, अस्पतालों, डेयरियों व डिस्टलरी समेत तमाम संस्थानों ने एनओसी के लिए अप्लाई कर दिया है। अब तक मात्र 7 उद्योगों के पास ही भूजल निकाले के लिए एनओसी थी। प्राधिकरण लगातार अवैध रूप से भूमिगत जल का दोहन करने वाले उद्योगों पर कार्रवाई कर रहा था। ऐसे में 49 उद्योगों को बंद करने के भी निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
अप्लाई की गई 70 एनओसी में 54 टेक्सटाइल उद्योग, एक एक अस्पताल, फार्मा कंपनी, डिस्टलिरी, स्टील इंडस्ट्री, कोटन कंपनी, रबर प्लांट, केमिकल प्लांट, सीमेंट प्लांट, 3 डेयरियों, 3 फूड प्रोसेस कंपनी, एक प्लाइवुड, एक राइस मिल, 2 पैकेज ड्रिंक प्लांट ने एनओसी अप्लाई किया है। इनमें बापौली क्षेत्र की 10 व समालखा क्षेत्र की 6 औद्योगिक इकाइयां है। हैरान करने वाली बात ये है कि पानीपत में 15 से अधिक एस्टेट कंपनी है इनमें से मात्र 1 कंपनी के पास ही केंद्रीय भूजल प्राधिकरण से एनओसी प्राप्त है। जबकि एनएफएल व रिफाइनरी बिना एनओसीा के भूजल का दोहन कर रही है।
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अप्लाई की गई 70 एनओसी में 54 टेक्सटाइल उद्योग, एक एक अस्पताल, फार्मा कंपनी, डिस्टलिरी, स्टील इंडस्ट्री, कोटन कंपनी, रबर प्लांट, केमिकल प्लांट, सीमेंट प्लांट, 3 डेयरियों, 3 फूड प्रोसेस कंपनी, एक प्लाइवुड, एक राइस मिल, 2 पैकेज ड्रिंक प्लांट ने एनओसी अप्लाई किया है। इनमें बापौली क्षेत्र की 10 व समालखा क्षेत्र की 6 औद्योगिक इकाइयां है। हैरान करने वाली बात ये है कि पानीपत में 15 से अधिक एस्टेट कंपनी है इनमें से मात्र 1 कंपनी के पास ही केंद्रीय भूजल प्राधिकरण से एनओसी प्राप्त है। जबकि एनएफएल व रिफाइनरी बिना एनओसीा के भूजल का दोहन कर रही है।
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