{"_id":"5ce98714bdec220742622138","slug":"15588083902-panipat-news177","type":"story","status":"publish","title_hn":"पानीपत, सोनीपत और फरीदाबाद की औद्योगिक इकाइयों पर कार्रवाई के आदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पानीपत, सोनीपत और फरीदाबाद की औद्योगिक इकाइयों पर कार्रवाई के आदेश
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पानीपत। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश के बावजूद हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने करीब एक वर्ष तक औद्योगिक इकाइयों पर कोई कार्रवाई नहीं की। औद्योगिक इकाइयों पर केमिकल युक्त पानी को भूजल में मिलाकर गंदा करने और अनापत्ति प्रमाणपत्र के बगैर भूजल के प्रयोग का आरोप है। इस संबंध में तीन याचिका एनजीटी में डाली गईं थीं, जिसके बाद एनजीटी ने कार्रवाई का आदेश दिया था, लेकिन हरियाणा प्रदूषण बोर्ड ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। जिस पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सख्त कदम उठाते हुए हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को 15 दिन का वक्त आदेशों को लागू करने और 30 दिन वक्त औद्योगिक इकाइयों पर कार्रवाई कर रिपोर्ट सौंपने के लिए दिया है।
करीब तीन महीने पहले केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 11 और 12 सितंबर 2018 और आठ मार्च 2019 तिथियों पर दिए गए कार्रवाई के आदेश की अनुपालना के बारे में हरियाणा स्टेट प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड से एनजीटी के आदेशों के तहत उनकी ओर से की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी थी। जिसमें कहा गया था कि वर्ष 2018 के भूजल प्रदूषण रोकने के आदेश का पालन हो रहा है या नहीं, इसका सत्यापन कर हरियाणा स्टेट प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड 30 अप्रैल 2019 तक रिपोर्ट सौंपेंगे। इसके साथ ही सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड औद्योगिक इकाइयों की जांच कर बताएगी कि कितनी औद्योगिक इकाइयों ने भूजल का प्रयोग करने की एनओसी नहीं ली है। जिसकी रिपोर्ट सात दिन में मांगी गई थी। एनओसी नहीं लेने वाली इकाइयों पर सीलिंग की कार्रवाई कर रिपोर्ट भी 30 अप्रैल 2019 तक देने के लिए कहा गया था। इस पर हरियाणा स्टेट प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सेंट्रल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को 17 मई को रिपोर्ट दी कि पानीपत और सोनीपत सभी इकाइयों का निरीक्षण कर आदेशों को लागू नहीं कराया जा सका है। जहां निरीक्षण हुआ है, वहां के सैंपल लेकर जांच के लिए लैब भेज दिए गए हैं।
अब केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने यह दिया आदेश : अब हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आदेश दिया गया है कि भूजल निकालने की एनओसी नहीं होने के मामले में पानीपत व सोनीपत की आठ, फरीदाबाद की 38 यूनिट पर 15 दिन के अंदर कार्रवाई करें। जिनके पास एनओसी नहीं है, उन पर एक्शन लें। गत 17 मई की रिपोर्ट तक जो इकाइयां खुद बंद कर ली गई या सील कर दी गईं या मौके पर चलती नहीं पाई गईं, अगले आदेश तक उनकी यथास्थिति रहेगी। इसके साथ ही हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इकाइयों के गंदे पानी के निकासी के लिए सीईटीपी की व्यवस्था करेगा। पूरा प्लान तैयार करेगा। उधर, सीजीडब्ल्यूबी ने बताया कि पानीपत में 55 से 47, सोनीपत में 34 में से 13 और फरीदाबाद में 8 में से पांच इकाइयों ने भूजल निकालने की एनओसी नहीं ली है। इन पर 15 दिन में कार्रवाई करनी है।
विज्ञापन
नगर निगम को पानी की गुणवत्ता की करनी है जांच : इसके साथ ही नगर निगम को शहर के ग्राउंड वाटर की गुणवत्ता जांच करने के आदेश भी दिए गए है। जांच के बाद रिपोर्ट सीपीसीबी को सौंपनी हैं।
इन्होंने एनजीटी में दी थी याचिका : वर्ष 2018 में शैलेश कुमार बनाम स्टेट ऑफ हरियाणा और गौरव जैन बनाम स्टेट ऑफ हरियाणा की ओर से पील एनजीटी में दायर की गईं थीं। इनकी शिकायत थी कि पनीपत, सोनीपत और फरीदाबाद की औद्योगिक इकाइयां भूजल में अपने दूषित पानी को डिस्चार्ज कर रहीं हैं। इसके बाद एक अन्य मामले की सुनवाई में गत आठ मार्च 2019 को एनजीटी ने बगैर एनओसी भूजल का उपयोग करने वाली इकाइयों पर भी कार्रवाई का आदेश दिया।
विज्ञापन
करीब तीन महीने पहले केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 11 और 12 सितंबर 2018 और आठ मार्च 2019 तिथियों पर दिए गए कार्रवाई के आदेश की अनुपालना के बारे में हरियाणा स्टेट प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड से एनजीटी के आदेशों के तहत उनकी ओर से की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी थी। जिसमें कहा गया था कि वर्ष 2018 के भूजल प्रदूषण रोकने के आदेश का पालन हो रहा है या नहीं, इसका सत्यापन कर हरियाणा स्टेट प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड 30 अप्रैल 2019 तक रिपोर्ट सौंपेंगे। इसके साथ ही सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड औद्योगिक इकाइयों की जांच कर बताएगी कि कितनी औद्योगिक इकाइयों ने भूजल का प्रयोग करने की एनओसी नहीं ली है। जिसकी रिपोर्ट सात दिन में मांगी गई थी। एनओसी नहीं लेने वाली इकाइयों पर सीलिंग की कार्रवाई कर रिपोर्ट भी 30 अप्रैल 2019 तक देने के लिए कहा गया था। इस पर हरियाणा स्टेट प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सेंट्रल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को 17 मई को रिपोर्ट दी कि पानीपत और सोनीपत सभी इकाइयों का निरीक्षण कर आदेशों को लागू नहीं कराया जा सका है। जहां निरीक्षण हुआ है, वहां के सैंपल लेकर जांच के लिए लैब भेज दिए गए हैं।
विज्ञापन
अब केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने यह दिया आदेश : अब हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आदेश दिया गया है कि भूजल निकालने की एनओसी नहीं होने के मामले में पानीपत व सोनीपत की आठ, फरीदाबाद की 38 यूनिट पर 15 दिन के अंदर कार्रवाई करें। जिनके पास एनओसी नहीं है, उन पर एक्शन लें। गत 17 मई की रिपोर्ट तक जो इकाइयां खुद बंद कर ली गई या सील कर दी गईं या मौके पर चलती नहीं पाई गईं, अगले आदेश तक उनकी यथास्थिति रहेगी। इसके साथ ही हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इकाइयों के गंदे पानी के निकासी के लिए सीईटीपी की व्यवस्था करेगा। पूरा प्लान तैयार करेगा। उधर, सीजीडब्ल्यूबी ने बताया कि पानीपत में 55 से 47, सोनीपत में 34 में से 13 और फरीदाबाद में 8 में से पांच इकाइयों ने भूजल निकालने की एनओसी नहीं ली है। इन पर 15 दिन में कार्रवाई करनी है।
विज्ञापन
नगर निगम को पानी की गुणवत्ता की करनी है जांच : इसके साथ ही नगर निगम को शहर के ग्राउंड वाटर की गुणवत्ता जांच करने के आदेश भी दिए गए है। जांच के बाद रिपोर्ट सीपीसीबी को सौंपनी हैं।
इन्होंने एनजीटी में दी थी याचिका : वर्ष 2018 में शैलेश कुमार बनाम स्टेट ऑफ हरियाणा और गौरव जैन बनाम स्टेट ऑफ हरियाणा की ओर से पील एनजीटी में दायर की गईं थीं। इनकी शिकायत थी कि पनीपत, सोनीपत और फरीदाबाद की औद्योगिक इकाइयां भूजल में अपने दूषित पानी को डिस्चार्ज कर रहीं हैं। इसके बाद एक अन्य मामले की सुनवाई में गत आठ मार्च 2019 को एनजीटी ने बगैर एनओसी भूजल का उपयोग करने वाली इकाइयों पर भी कार्रवाई का आदेश दिया।