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रिफाइनरी की जहरीली गैस से 100 से अधिक लोग चमड़ी व सांस के हुए रोगी, 10 परिवारों ने किया पलायन, अब लोगों को एनजीटी से आस
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पानीपत/थर्मल। रिफाइनरी से निकलने वाली जहरीली गैस से बोहली गांव के सोहनलाल व केसरदास समेत कई डेरों पर रहने वाले 100 से अधिक परिवार प्रभावित हैं। 60 पुरुष, 40 महिलाएं और 10 से अधिक बच्चे चर्म,़ दमा व आंखों के रोगी हो चुके हैं। रिफाइनरी के आसपास का भू-जल भी पीने योग्य नहीं रहा। रिफाइनरी के प्रदूषण से परेशान होकर डेरों से 10 परिवार पलायन कर चुके हैं। लोगों की फसल भी गैस के कारण जल रही है। पशुओं के लिए खाने योग्य चारा नहीं है। रिफाइनरी के अधिकारियों ने कई बार इन समस्याओं की जांच तो की, लेकिन उनकी बदहाल हो चली जिंदगी को कोई राहत नहीं मिली। अब एनजीटी ने लोगों की परेशानियों को देखते हुए और रिफाइनरी की मनमानी पर नकेल कसने के लिए रिफाइनरी पर 17.31 करोड़ का जुर्माना लगाया है। साथ ही रिफाइनरी को प्रदूषित गैस व पानी को नियंत्रित करने के निर्देश भी दिए हैं। एनजीटी के निर्देश आने के बाद रिफाइनरी के बड़े अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। लोगों को भी अब एनजीटी से ही आस है। लोगों की मांग है कि उन्हें यहां से कहीं और बसाया जाए। उन्होंने बताया कि वे कई बार इन परेशानियों को लेकर मंत्री कृष्ण लाल पंवार से भी मिल चुके हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ।
पशुओं के लिए 800 रुपये महीना पानी खरीदते हैं : करतार चंद
रिफाइनरी के पास स्थित सर्विस स्टेशन व रिफाइनरी से निकलने वाले प्रदूषित पानी से डेरों के आसपास का भू-जल प्रदूषित हो चुका है और यह पीने योग्य नहीं है। इसलिए लोगों को मजबूरन घरों में आरओ लगानी पड़ी है। डेरों पर रहने वाले सभी लोग खेती पर निर्भर हैं। पशुओं को नहलाने व उन्हें पीने का पानी देने के लिए वे रिफाइनरी टाउनशिप से ही 800 रुपये महीना पानी खरीदते हैं। वे हर रोज पानी का एक ड्रम खरीदते हैं। उसके बाद पशुओं को पानी पिलाया जाता है।
70 साल की शेरो दमा से पीड़ित : 70 साल की शेरो दमा से पीड़ित हैं। प्रदूषित पानी के कारण वह चर्म के रोग के साथ ही दमा का भी शिकार हो गई हैं। अब उनकी हालत गंभीर है और आजकल बेड पर हैं। उनका चंडीगढ़ पीजीआई से इलाज चल रहा है।
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इन परिवारों को करना पड़ा पलायन : रिफाइनरी से निकलने वाली जहरीली व जानलेवा गैस से लोग इतने परेशान हैं कि उन्हें डेरों से पलायन करना पड़ रहा है। पिछले 3 साल में डेरों के 10 परिवारों को अपनी जमीन बेचकर कहीं और शिफ्ट होना पड़ा। इनमें शेरचंद, ओमप्रकाश, हंसराज, तुंगल, चुन्नीलाल व भूपेंद्र सिंह समेत 10 परिवार शामिल हैं।
18 साल के अंग्रेज का हुआ अपेंडिक्स का ऑपरेशन : करतार चंद के 18 वर्षीय पुत्र अंग्रेज का कुछ दिन पहले अपेंडिस का ऑप्रेशन हुआ है। अंग्रेज समेत डेरों पर रहने वाले कई युवकों का शारीरिक विकास सही प्रकार से नहीं हुआ है। लोगों का कहना है कि प्रदूषित पानी के कारण बच्चों को पेट में दिक्कत है। ज्यादातर बच्चों का अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
रिफाइनरी में मॉकड्रिल करते हैं तो हमें बसों में भरकर 6 किलोमीटर दूर छोड़ आते हैं : सोहनलाल डेरे पर रहने वाले ग्रामीणों ने बताया कि रिफाइनरी के कारण उनका जन-जीवन काफी प्रभावित है। रिफाइनरी हर माह एक बार मॉकड्रिल करती है। उस वक्त अचानक ने उनके पास रिफाइनरी के कर्मचारी बस लेकर आते हैं और उनको बच्चों समेत बसों में भरकर रिफाइनरी से 6 किलोमीटर दूर छोड़ आते हैं। उनको कई-कई दिनों तक घरों से दूर रात बितानी पड़ती है। इसके बाद उनको वापस लाने की भी रिफाइनरी की ओर से कोई सुविधा नहीं दी जाती।
दमा से दो भाइयों की हो चुकी है मौत : करतार चंद ने बताया कि रिफाइनरी से निकलने वाली जहरीली गैस के कारण लोगों में दमा की बीमारी फैल रही है। दमा से उसके बड़े भाई कालाराम व बहादुर की मौत हो चुकी है। अब 65 वर्षीय केसरदास की हालत गंभीर बनी हुई है। केसरदास भी दमा से पीड़ित है और चर्म रोग से ग्रस्त है।
नलकूपों का पानी पीते ही दस्त लग जाते हैं : बोहली गांव के डेरों पर रहने वाले बिजेंद्र सिंह ने बताया कि वो नलकूपों का पानी नहीं पी सकते। पीना इतना विषैला है कि पीने के बाद दस्त लग जाते हैं और उन्हें डायरिया होने का खतरा बना रहता है। प्रदूषित पानी पीने के कारण 20 से अधिक बच्चे बीमार हैं।
चार साल के अंशुमन की आंखें हुईं खराब : लोगों की माने तो रिफाइनरी के प्लांटों से निकलने वाली खतरनाक गैस आंखों में जलन पैदा करती है, जिससे आंखों से पानी गिरता है। इसी कारण 4 साल के अंशुमन की आंखों भी खराब हो गईं। दो साल से उसकी आंखों का पानीपत के निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है।
ये लोग चर्म व दमा के हैं रोगी : ज्ञानो, सुनहरी, गुड्डो, शेरो, गीता देवी, सरिता, सुमन, जीरो देवी, इंद्रपाल, शाहिल, सीतादेवी, कृष्णा बलकार चंद, निशम सिंह, पाले राम, राम सिंह व राममेहर चर्म व दमा रोगी हैं। इनका चंडीगढ़ पीजीआई, पानीपत सिविल अस्पताल, पानीपत के कई निजी अस्पताल व करनाल के निजी अस्पतालों में इलाज रहा है।
पशुओं को चारा डालने में लगता है डर : पालेराम ने बताया कि रिफाइनरी की गैस के कारण उनकी बरसीम, गेहूं, ज्वार समेत सभी फसलें खराब हो जाती हैं। फसल ऊपर से जल जाती है। उनको ये डर लगा रहता है कि कहीं इस चारे से पशुओं को नुकसान ना हो जाए। वो चारे को लेकर कई बार डीसी कार्यालय में भी गए, लेकिन उनकी किसी ने सुनवाई नहीं की।
एनजीटी ने रिफाइनरी पर लगाया 17.31 करोड़ का हर्जाना : एनजीटी ने पानीपत रिफाइनरी द्वारा फैलाए जा रहे वायू व जल प्रदूषण पर सख्त रुख अपनाते हुए 17.31 करोड़ रुपये का मुआवजा भरने के निर्देश जारी किए हैं। ये राशि रिफाइनरी को एक माह में सीपीसीबी में जमा करानी होगी। रिफाइनरी पर सुताना, ददलाना व बोहली गांव की ग्रीन बेल्ट को खराब करने, नालों में प्रदूषित पानी छोड़कर भू-जल खराब करने व वायु में प्रदूषण फैलाने का आरोप है। एनजीटी ने ये फैसला डीसी सुमेधा कटारिया, हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा सौंपी रिपोर्ट पर लिया है। एनजीटी ने रिफाइनरी को जल्द से जल्द अपनी व्यवस्था सुधारने के भी निर्देश दिए हैं।
मामले में रिफाइनरी के अधिकारियों की मीटिंग जारी : मामले की गंभीरता को देखते हुए रिफाइनरी के बड़े अधिकारियों ने मीटिंग बुलाई है। मीटिंग में एनजीटी द्वारा दिए गए निर्देशों पर चर्चा चल रहा है। फिलहाल मामले में अधिकारियों ने कुछ भी बोलने से इनकार किया है।
अगर रिफाइनरी के कारण लोगों को परेशानियां हो रही हैं और लोगों में रोग फैल रहे हैं तो इसकी स्टडी की जाएगी। लोगों के हितों में जो भी होगा वो कदम उठाए जाएंगे। मामला एनजीटी के संज्ञान में हैं इसलिए इस बारे में अधिक नहीं कहा जा सकता।
-जीएएन कोरेरा, जीएम एचआर रिफाइनरी।
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पशुओं के लिए 800 रुपये महीना पानी खरीदते हैं : करतार चंद
रिफाइनरी के पास स्थित सर्विस स्टेशन व रिफाइनरी से निकलने वाले प्रदूषित पानी से डेरों के आसपास का भू-जल प्रदूषित हो चुका है और यह पीने योग्य नहीं है। इसलिए लोगों को मजबूरन घरों में आरओ लगानी पड़ी है। डेरों पर रहने वाले सभी लोग खेती पर निर्भर हैं। पशुओं को नहलाने व उन्हें पीने का पानी देने के लिए वे रिफाइनरी टाउनशिप से ही 800 रुपये महीना पानी खरीदते हैं। वे हर रोज पानी का एक ड्रम खरीदते हैं। उसके बाद पशुओं को पानी पिलाया जाता है।
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70 साल की शेरो दमा से पीड़ित : 70 साल की शेरो दमा से पीड़ित हैं। प्रदूषित पानी के कारण वह चर्म के रोग के साथ ही दमा का भी शिकार हो गई हैं। अब उनकी हालत गंभीर है और आजकल बेड पर हैं। उनका चंडीगढ़ पीजीआई से इलाज चल रहा है।
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इन परिवारों को करना पड़ा पलायन : रिफाइनरी से निकलने वाली जहरीली व जानलेवा गैस से लोग इतने परेशान हैं कि उन्हें डेरों से पलायन करना पड़ रहा है। पिछले 3 साल में डेरों के 10 परिवारों को अपनी जमीन बेचकर कहीं और शिफ्ट होना पड़ा। इनमें शेरचंद, ओमप्रकाश, हंसराज, तुंगल, चुन्नीलाल व भूपेंद्र सिंह समेत 10 परिवार शामिल हैं।
18 साल के अंग्रेज का हुआ अपेंडिक्स का ऑपरेशन : करतार चंद के 18 वर्षीय पुत्र अंग्रेज का कुछ दिन पहले अपेंडिस का ऑप्रेशन हुआ है। अंग्रेज समेत डेरों पर रहने वाले कई युवकों का शारीरिक विकास सही प्रकार से नहीं हुआ है। लोगों का कहना है कि प्रदूषित पानी के कारण बच्चों को पेट में दिक्कत है। ज्यादातर बच्चों का अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
रिफाइनरी में मॉकड्रिल करते हैं तो हमें बसों में भरकर 6 किलोमीटर दूर छोड़ आते हैं : सोहनलाल डेरे पर रहने वाले ग्रामीणों ने बताया कि रिफाइनरी के कारण उनका जन-जीवन काफी प्रभावित है। रिफाइनरी हर माह एक बार मॉकड्रिल करती है। उस वक्त अचानक ने उनके पास रिफाइनरी के कर्मचारी बस लेकर आते हैं और उनको बच्चों समेत बसों में भरकर रिफाइनरी से 6 किलोमीटर दूर छोड़ आते हैं। उनको कई-कई दिनों तक घरों से दूर रात बितानी पड़ती है। इसके बाद उनको वापस लाने की भी रिफाइनरी की ओर से कोई सुविधा नहीं दी जाती।
दमा से दो भाइयों की हो चुकी है मौत : करतार चंद ने बताया कि रिफाइनरी से निकलने वाली जहरीली गैस के कारण लोगों में दमा की बीमारी फैल रही है। दमा से उसके बड़े भाई कालाराम व बहादुर की मौत हो चुकी है। अब 65 वर्षीय केसरदास की हालत गंभीर बनी हुई है। केसरदास भी दमा से पीड़ित है और चर्म रोग से ग्रस्त है।
नलकूपों का पानी पीते ही दस्त लग जाते हैं : बोहली गांव के डेरों पर रहने वाले बिजेंद्र सिंह ने बताया कि वो नलकूपों का पानी नहीं पी सकते। पीना इतना विषैला है कि पीने के बाद दस्त लग जाते हैं और उन्हें डायरिया होने का खतरा बना रहता है। प्रदूषित पानी पीने के कारण 20 से अधिक बच्चे बीमार हैं।
चार साल के अंशुमन की आंखें हुईं खराब : लोगों की माने तो रिफाइनरी के प्लांटों से निकलने वाली खतरनाक गैस आंखों में जलन पैदा करती है, जिससे आंखों से पानी गिरता है। इसी कारण 4 साल के अंशुमन की आंखों भी खराब हो गईं। दो साल से उसकी आंखों का पानीपत के निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है।
ये लोग चर्म व दमा के हैं रोगी : ज्ञानो, सुनहरी, गुड्डो, शेरो, गीता देवी, सरिता, सुमन, जीरो देवी, इंद्रपाल, शाहिल, सीतादेवी, कृष्णा बलकार चंद, निशम सिंह, पाले राम, राम सिंह व राममेहर चर्म व दमा रोगी हैं। इनका चंडीगढ़ पीजीआई, पानीपत सिविल अस्पताल, पानीपत के कई निजी अस्पताल व करनाल के निजी अस्पतालों में इलाज रहा है।
पशुओं को चारा डालने में लगता है डर : पालेराम ने बताया कि रिफाइनरी की गैस के कारण उनकी बरसीम, गेहूं, ज्वार समेत सभी फसलें खराब हो जाती हैं। फसल ऊपर से जल जाती है। उनको ये डर लगा रहता है कि कहीं इस चारे से पशुओं को नुकसान ना हो जाए। वो चारे को लेकर कई बार डीसी कार्यालय में भी गए, लेकिन उनकी किसी ने सुनवाई नहीं की।
एनजीटी ने रिफाइनरी पर लगाया 17.31 करोड़ का हर्जाना : एनजीटी ने पानीपत रिफाइनरी द्वारा फैलाए जा रहे वायू व जल प्रदूषण पर सख्त रुख अपनाते हुए 17.31 करोड़ रुपये का मुआवजा भरने के निर्देश जारी किए हैं। ये राशि रिफाइनरी को एक माह में सीपीसीबी में जमा करानी होगी। रिफाइनरी पर सुताना, ददलाना व बोहली गांव की ग्रीन बेल्ट को खराब करने, नालों में प्रदूषित पानी छोड़कर भू-जल खराब करने व वायु में प्रदूषण फैलाने का आरोप है। एनजीटी ने ये फैसला डीसी सुमेधा कटारिया, हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा सौंपी रिपोर्ट पर लिया है। एनजीटी ने रिफाइनरी को जल्द से जल्द अपनी व्यवस्था सुधारने के भी निर्देश दिए हैं।
मामले में रिफाइनरी के अधिकारियों की मीटिंग जारी : मामले की गंभीरता को देखते हुए रिफाइनरी के बड़े अधिकारियों ने मीटिंग बुलाई है। मीटिंग में एनजीटी द्वारा दिए गए निर्देशों पर चर्चा चल रहा है। फिलहाल मामले में अधिकारियों ने कुछ भी बोलने से इनकार किया है।
अगर रिफाइनरी के कारण लोगों को परेशानियां हो रही हैं और लोगों में रोग फैल रहे हैं तो इसकी स्टडी की जाएगी। लोगों के हितों में जो भी होगा वो कदम उठाए जाएंगे। मामला एनजीटी के संज्ञान में हैं इसलिए इस बारे में अधिक नहीं कहा जा सकता।
-जीएएन कोरेरा, जीएम एचआर रिफाइनरी।