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मासूम के इलाज के लिए स्कूल प्रबंधन ने किया मना, शहरवासी हुए मदद के लिए एकजुट
Updated Sun, 07 Oct 2018 11:45 PM IST
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मासूम के इलाज के लिए स्कूल प्रबंधन ने किया मना, शहरवासी हुए मदद के लिए एकजुुट
- अमर उजाला में प्रकाशित खबर के बाद शहरवासियों ने मदद के लिए लिया प्रण
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। सब्जी मंडी स्थित जीवीएम स्कूल वैन के नीचे आने से स्कूल के ही एलकेजी के छात्र आयुष की हालत दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। इसमें स्कूल प्रशासन ने बच्चे की मदद करने से साफ तौर पर मना कर दिया। इसके बाद मामले में स्कूल वैन ड्राइवर सहित स्कूल प्रबंधन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। बावजूद इसके स्कूल बच्चे के इलाज में किसी तरह की मदद नहीं कर रहा है।
ऑटो चालक पिता ने बताया कि वह मासूम के इलाज में अभी तक सात लाख रुपये खर्च कर चुका है। साथ ही उन्होंने उनका ऑटो भी बेच दिया है। पिता ने कर्ज लेकर बच्चे का इलाज दिल्ली के एक निजी अस्पताल में करवा रहा है। वहां अभी इलाज काफी लंबा चलेगा और भी ज्यादा रुपयों का खर्च इलाज में आएगा। लाचार पिता की इन बातों को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसके बाद शहरवासी खबर को पढ़ कर एकजुट हो गए व बच्चे के इलाज करवाने के लिए चंदा इकट्ठा करने लगे। खबर को सोशल मीडिया पर वायरल व व्हाट्सएप पर एक ग्रुप बना कर उसमें खबर को डाल कर शहर के तमाम लोगों को इसमें जोड़ जा रहा है।
ये है मामला :18 सिंतबर को हमेशा की तरह आयुष स्कूल की वैन से ही आ रहा था। जब वैन चावला कॉलोनी के मोड़ पर पहुंची तो वहां आयुष वैन से उतरने लगा। इसी दौरान वैन चालक ने आयुष के नीचे उतरने से पहले ही वैन को चला दिया। जिस दौरान आयुष वैन से नीचे गिर गया व उसके सिर पर वैन का आधा पहिया उतर गया। पिता का आरोप है कि स्कूल ने उनके स्कूल के लेटर हेड पर आयुष के ठीक होने तक लगने वाली राशि देने का लिखित प्रमाण दिया। लेकिन आयुष के इलाज में खर्च ज्यादा आते देख स्कूल प्रबंधन सदस्यों ने और सहायता करने से मना कर दिया। फिलहाल आयुष का इलाज दिल्ली के एक निजी अस्पताल में चल रहा है।
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ये लिखा है स्कूल द्वारा दिए पत्र में:
स्कूल के लेटर हेड पर घायल मासूम आयुष के पिता ने लिखा है कि मेरा पुत्र आयुष जोकि जीवीएम स्कूल सनौली रोड में पढ़ता है। 18 सितंबर को मेरा लड़का जीवीएम स्कूल की वैन से घर आ रहा था। इससे उतरते हुए मेरे बेटे आयुष को चोट लग गई। इसे मैं निजी अस्पताल ले गया। वहां से उसे गांव सिवाह स्थित पार्क अस्पताल में शिफ्ट कर दिया। जहां पर मैंने 20 सितंबर तक 35 हजार अस्पताल को फीस के रूप में दिए हैं। बाकी सारा खर्चा जो किसी भी अस्पताल में हो, वो जीवीएम स्कूल करने को तैयार है। मैं इन पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करूंगा। मैं इनका सम्मान करता हूं। जो भी इंश्योरेंस कलेम मिलेगा, वह मैं स्कूल को लौटा दूंगा। लेटर के नीचे पिता व स्कूल प्राचार्य के साइन भी है।
स्कूल प्रबंधन के मना करने पर करवाया केस दर्ज
मासूम के इलाज पर अधिक खर्च आता देख स्कूल प्रबंधन ने इसमें और रुपये देने से मना कर दिया। मासूम के पिता ने बताया कि स्कूल प्रबंधन ने उन्हें इलाज में रुपये देने से मना किया। इसके बाद उन्होंने पुलिस को संबंधित मामले की शिकायत दी। पुलिस ने इसमें मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुुरू कर दी।
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मासूम के इलाज के लिए स्कूल प्रबंधन ने किया मना, शहरवासी हुए मदद के लिए एकजुुट
- अमर उजाला में प्रकाशित खबर के बाद शहरवासियों ने मदद के लिए लिया प्रण
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। सब्जी मंडी स्थित जीवीएम स्कूल वैन के नीचे आने से स्कूल के ही एलकेजी के छात्र आयुष की हालत दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। इसमें स्कूल प्रशासन ने बच्चे की मदद करने से साफ तौर पर मना कर दिया। इसके बाद मामले में स्कूल वैन ड्राइवर सहित स्कूल प्रबंधन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। बावजूद इसके स्कूल बच्चे के इलाज में किसी तरह की मदद नहीं कर रहा है।
ऑटो चालक पिता ने बताया कि वह मासूम के इलाज में अभी तक सात लाख रुपये खर्च कर चुका है। साथ ही उन्होंने उनका ऑटो भी बेच दिया है। पिता ने कर्ज लेकर बच्चे का इलाज दिल्ली के एक निजी अस्पताल में करवा रहा है। वहां अभी इलाज काफी लंबा चलेगा और भी ज्यादा रुपयों का खर्च इलाज में आएगा। लाचार पिता की इन बातों को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसके बाद शहरवासी खबर को पढ़ कर एकजुट हो गए व बच्चे के इलाज करवाने के लिए चंदा इकट्ठा करने लगे। खबर को सोशल मीडिया पर वायरल व व्हाट्सएप पर एक ग्रुप बना कर उसमें खबर को डाल कर शहर के तमाम लोगों को इसमें जोड़ जा रहा है।
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ये है मामला :18 सिंतबर को हमेशा की तरह आयुष स्कूल की वैन से ही आ रहा था। जब वैन चावला कॉलोनी के मोड़ पर पहुंची तो वहां आयुष वैन से उतरने लगा। इसी दौरान वैन चालक ने आयुष के नीचे उतरने से पहले ही वैन को चला दिया। जिस दौरान आयुष वैन से नीचे गिर गया व उसके सिर पर वैन का आधा पहिया उतर गया। पिता का आरोप है कि स्कूल ने उनके स्कूल के लेटर हेड पर आयुष के ठीक होने तक लगने वाली राशि देने का लिखित प्रमाण दिया। लेकिन आयुष के इलाज में खर्च ज्यादा आते देख स्कूल प्रबंधन सदस्यों ने और सहायता करने से मना कर दिया। फिलहाल आयुष का इलाज दिल्ली के एक निजी अस्पताल में चल रहा है।
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ये लिखा है स्कूल द्वारा दिए पत्र में:
स्कूल के लेटर हेड पर घायल मासूम आयुष के पिता ने लिखा है कि मेरा पुत्र आयुष जोकि जीवीएम स्कूल सनौली रोड में पढ़ता है। 18 सितंबर को मेरा लड़का जीवीएम स्कूल की वैन से घर आ रहा था। इससे उतरते हुए मेरे बेटे आयुष को चोट लग गई। इसे मैं निजी अस्पताल ले गया। वहां से उसे गांव सिवाह स्थित पार्क अस्पताल में शिफ्ट कर दिया। जहां पर मैंने 20 सितंबर तक 35 हजार अस्पताल को फीस के रूप में दिए हैं। बाकी सारा खर्चा जो किसी भी अस्पताल में हो, वो जीवीएम स्कूल करने को तैयार है। मैं इन पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करूंगा। मैं इनका सम्मान करता हूं। जो भी इंश्योरेंस कलेम मिलेगा, वह मैं स्कूल को लौटा दूंगा। लेटर के नीचे पिता व स्कूल प्राचार्य के साइन भी है।
स्कूल प्रबंधन के मना करने पर करवाया केस दर्ज
मासूम के इलाज पर अधिक खर्च आता देख स्कूल प्रबंधन ने इसमें और रुपये देने से मना कर दिया। मासूम के पिता ने बताया कि स्कूल प्रबंधन ने उन्हें इलाज में रुपये देने से मना किया। इसके बाद उन्होंने पुलिस को संबंधित मामले की शिकायत दी। पुलिस ने इसमें मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुुरू कर दी।