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विश्व जल दिवस : 20 साल बाद कैसे बुझेगी शहर की प्यास, 40 साल में 300 से 400 फुट नीचे गिरा भूजल स्तर

Tue, 22 Mar 2022 01:48 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Tue, 22 Mar 2022 01:48 AM IST
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World Water Day: How will the city's thirst be quenched after 20 years, the groundwater level dropped by 300 to 400 feet in 40 years
पंचकूला। विश्व जल संरक्षण दिवस मंगलवार को है। आज भूजल संरक्षण की बड़ी-बड़ी बातें होंगी, लेकिन असलियत इससे उलट है। जो हमें धीरे-धीरे पेयजल से दूर ले जा रही है। दुनिया के कई मुल्क जल संकट से जूझ रहे हैं। जल संरक्षण नहीं होने से 40 साल में शहर का भूजल स्तर 300 से 400 फुट नीचे गिर गया है। यदि समय रहते सरकार और प्रशासन ने भूजल को बचाने की कोशिश नहीं की तो 20 साल में पेयजल गंभीर समस्या बनकर सामने खड़ी होगी। अभी पंचकूला शहरी क्षेत्र की आबादी करीब 3.20 लाख है, जो आगामी 15 से 18 साल के आसपास तक बढ़कर करीब 7.02 लाख तक पहुंच जाएगी।
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साल 1979-80 में हरियाणा शहरी विकास ने सेक्टर-21 में ट्यूबवेल लगाया था। उस समय 80 से 100 फुट पर पेयजल मिल जाता था, लेकिन चार दशक बाद भूजल स्तर पंचकूला एमडीसी एरिया का 350-400 फुट और इंडस्ट्रियल एरिया में 350 फुट पर पहुंच गया। यही स्थिति रही तो पेयजल 1000 फुट नीचे भी नहीं मिलेगा। शहरी क्षेत्र में लगे 200 ट्यूबवेल से 80 एमएलडी पानी की सप्लाई होती है, जो आने वाले पांच से सात सालों में जवाब दे जाएंगे। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए विभाग को तैयारी करनी होगी और अतिरिक्त 80 एमएलडी पानी की व्यवस्था करनी होगी। इसके अलावा अभी कौशल्या डैम से 45 और भाखड़ा से 45 एमएलडी पानी पंचकूला को मिलता है। वहीं बारिश होने पर कौशल्या डैम से साल में छह माह ही पानी मिलता है।
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जून में 170 एमएलडी पानी की आवश्यकता
हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि मई और जून माह में करीब 170 एमएलडी पानी की खपत पंचकूला शहरी क्षेत्र में होता है। आने वाले सालों में धीरे-धीरे आबादी बढ़ती जाएगी। ऐसी स्थिति विभाग को भाखड़ा और घग्गर नदी से पेयजल की संभावनाएं तलाशने की जरूरत है।
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पिछले सात सालों से पेयजल बचाने के लिए विभाग को पत्र लिख रहा हूं। समय रहते पेयजल को बचाने के लिए कोई सार्थक कदम नहीं उठाया गया तो आने वाले 20 सालों में पंचकूला में पेयजल संकट गहरा जाएगा। इसके अलावा जो भी पेयजल की बर्बादी करता है उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। विभाग सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित है। - सुभाष पपनेजा, महासचिव आरडब्ल्यूए सेक्टर-16 पंचकूला।

भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। वर्तमान में 600-650 फुट पर पानी है। एचएसवीपी इसको लेकर चिंतित है। तीन-चार एजेंसियों और विभागों से तालमेल कर निकट भविष्य में पेयजल के विकल्प तलाश रहे हैं। - एनके पायल, एक्सईएन, एचएसवीपी
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