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विश्व जल दिवस : 80 एमएलडी जमीनी पानी का पंचकूला में रोजाना दोहन
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माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। शहर का भू जल स्तर महज दो सालों में 150 से 300 फुट तक नीचे चला गया है..। इसका मुख्य कारण है, 80 एमएलडी जमीनी पानी का पंचकूला में रोजाना 200 ट्यूबवेलों के जरिए दोहन है। बता दें कि साल 1979-80 में हरियाणा शहरी विकास ने सेक्टर-21 में ट्यूबवेल लगाया था। उस समय 80 से 100 फीट पर पेयजल मिल जाता था, लेकिन चार दशक बाद भूजल स्तर औसत 450 से 650 फुट तक पहुंचा गया है। इसके नीचे जमीन में पेयजल नहीं है।
एचएसवीपी इंजीनियरिंग विंग के अधिकारियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि कुछ साल पहले पंचकूला सेक्टर-15 और एमडीसी एरिया में टयूबवेल के जरिए 1000 फुट तक नीचे ज्यादा पानी के लिए बोर किया गया, वहां बिल्कुल पानी ही नहीं था। यही स्थिति रही तो ये ट्यूबवेल भी आने वाले पांच सालों के भीतर जवाब दे जाएंगे। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि मई और जून माह में करीब 180 एमएलडी पानी की खपत पंचकूला शहरी क्षेत्र में होता है। आने वाले सालों में धीरे-धीरे आबादी बढ़ती जाएगी। ऐसी स्थिति विभाग को भाखड़ा और घग्गर नदी से पेयजल की संभावनाएं तलाशने की जरूरत है।
कौशल्या से नहीं मिल रहा पानी
कौशल्या डैम से जुड़ी पानी की पाइप लाइन अमरावती ब्रीज के पास जुलाई में टूटी थी। कौशल्या डैम से 45 एमएलडी पानी की सप्लाई बंद होने के बाद एचएसवीपी को अभी सेक्टरों में पेयजल की आपूर्ति पूरी करने के लिए लगातार 8 घंटे बजाय 22 घंटे 200 ट्यूबवेलों को चलाना पड़ रहा है। विभाग इतना लापरवाह है कि नौ का समय बीतने के बाद भी करीब एक हजार मीटर की पाइप लाइन का काम शुरू कराने शुरू नहीं करा पाया। नतीजा 45 एमएलडी जमीनी पानी का रोजाना दोहन हो रहा है।
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सात करोड़ की लागत से छह वाटर स्टोरेज टैंक बनाने का प्लान
भू जल को बचाने के लिए पंचकूला शहरी क्षेत्र में सेक्टर-27, 31 सहित एमडीसी एरिया में सात करोड़ की लागत से छह वाटर स्टोरेज टैंक बनाए जाने हैं, लेकिन प्रस्ताव अभी कागजों में है। यह प्रपोजल अगर सिरे चढ़ता है, तो भू जल को बचाने में मदद मिलेगी।
भू जल बचाने के लिए छह मरला से ऊपर के मकानों को रिचार्ज पिट बनाना अनिवार्य है। साथ ही वाटर स्टोरेज के लिए विभाग भी सात करोड़ की लागत से छह वाटर टैंक बनाने की प्लानिंग कर रहा है। - एनके पायल, एक्सईएन एचएसवीपी।
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पंचकूला। शहर का भू जल स्तर महज दो सालों में 150 से 300 फुट तक नीचे चला गया है..। इसका मुख्य कारण है, 80 एमएलडी जमीनी पानी का पंचकूला में रोजाना 200 ट्यूबवेलों के जरिए दोहन है। बता दें कि साल 1979-80 में हरियाणा शहरी विकास ने सेक्टर-21 में ट्यूबवेल लगाया था। उस समय 80 से 100 फीट पर पेयजल मिल जाता था, लेकिन चार दशक बाद भूजल स्तर औसत 450 से 650 फुट तक पहुंचा गया है। इसके नीचे जमीन में पेयजल नहीं है।
एचएसवीपी इंजीनियरिंग विंग के अधिकारियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि कुछ साल पहले पंचकूला सेक्टर-15 और एमडीसी एरिया में टयूबवेल के जरिए 1000 फुट तक नीचे ज्यादा पानी के लिए बोर किया गया, वहां बिल्कुल पानी ही नहीं था। यही स्थिति रही तो ये ट्यूबवेल भी आने वाले पांच सालों के भीतर जवाब दे जाएंगे। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि मई और जून माह में करीब 180 एमएलडी पानी की खपत पंचकूला शहरी क्षेत्र में होता है। आने वाले सालों में धीरे-धीरे आबादी बढ़ती जाएगी। ऐसी स्थिति विभाग को भाखड़ा और घग्गर नदी से पेयजल की संभावनाएं तलाशने की जरूरत है।
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कौशल्या से नहीं मिल रहा पानी
कौशल्या डैम से जुड़ी पानी की पाइप लाइन अमरावती ब्रीज के पास जुलाई में टूटी थी। कौशल्या डैम से 45 एमएलडी पानी की सप्लाई बंद होने के बाद एचएसवीपी को अभी सेक्टरों में पेयजल की आपूर्ति पूरी करने के लिए लगातार 8 घंटे बजाय 22 घंटे 200 ट्यूबवेलों को चलाना पड़ रहा है। विभाग इतना लापरवाह है कि नौ का समय बीतने के बाद भी करीब एक हजार मीटर की पाइप लाइन का काम शुरू कराने शुरू नहीं करा पाया। नतीजा 45 एमएलडी जमीनी पानी का रोजाना दोहन हो रहा है।
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सात करोड़ की लागत से छह वाटर स्टोरेज टैंक बनाने का प्लान
भू जल को बचाने के लिए पंचकूला शहरी क्षेत्र में सेक्टर-27, 31 सहित एमडीसी एरिया में सात करोड़ की लागत से छह वाटर स्टोरेज टैंक बनाए जाने हैं, लेकिन प्रस्ताव अभी कागजों में है। यह प्रपोजल अगर सिरे चढ़ता है, तो भू जल को बचाने में मदद मिलेगी।
भू जल बचाने के लिए छह मरला से ऊपर के मकानों को रिचार्ज पिट बनाना अनिवार्य है। साथ ही वाटर स्टोरेज के लिए विभाग भी सात करोड़ की लागत से छह वाटर टैंक बनाने की प्लानिंग कर रहा है। - एनके पायल, एक्सईएन एचएसवीपी।